– संदिग्ध भुगतानों की जांच में दोहरे, अवैध और अधिक भुगतान का खुलासा; अन्य अधिकारियों-कर्मचारियों पर भी कार्रवाई प्रस्तावित
डिंडौरी न्यूज । मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) कार्यालय में वर्ष 2017 से 2024 के बीच हुए संदिग्ध भुगतानों की जांच में 60 लाख 65 हजार 590 रुपये की वित्तीय अनियमितता सामने आई है। जांच में अनियमित, दोहरे, अवैध एवं अधिक भुगतान किए जाने के मामले सामने आए हैं। कार्यालय आयुक्त, कोष एवं लेखा, मध्यप्रदेश भोपाल से प्राप्त संदिग्ध भुगतानों की सूची के आधार पर जिला स्तर पर गठित जांच दल ने पूरे मामले की विस्तृत जांच की। जांच दल ने 28 सितंबर 2026 को अपना जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत किया, जिसमें संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों की भूमिका भी निर्धारित की गई है।
– IFMIS में भुगतान प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी
जांच प्रतिवेदन के अनुसार तत्कालीन प्रभारी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. रमेश मरावी द्वारा IFMIS में Approver के रूप में विभिन्न देयकों एवं एरियर भुगतानों का अनुमोदन किया गया। वहीं सहायक ग्रेड-3 गुलाब प्रसाद साहू IFMIS में Verifier एवं लेखा प्रभारी के रूप में देयकों के परीक्षण और अग्रेषण की जिम्मेदारी निभा रहे थे। जांच में उनके द्वारा निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं का पालन नहीं किए जाने की बात सामने आई है।
इसी तरह Supervisor प्रकाश सिंह परस्ते द्वारा IFMIS में Creator के रूप में इलेक्ट्रॉनिक देयकों को निर्धारित प्रारूप एवं आवश्यक अभिलेखों के बिना अग्रेषित किए जाने का उल्लेख जांच प्रतिवेदन में किया गया है।
जांच दल के अनुसार भुगतान प्रक्रिया में मध्यप्रदेश वित्तीय संहिता तथा मध्यप्रदेश कोषालय संहिता, 2020 में निर्धारित प्रावधानों का पालन नहीं किया गया। इन परिस्थितियों को संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों का प्रथम दृष्टया कदाचरण माना गया है।
– सहायक ग्रेड-3 गुलाब प्रसाद साहू निलंबित
वित्तीय अनियमितता के मामले में सहायक ग्रेड-3 गुलाब प्रसाद साहू को मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के नियम 9 के तहत निलंबित किया गया है। वहीं जांच में भूमिका सामने आए अन्य अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध भी नियमानुसार कार्रवाई प्रस्तावित की गई है।
– तीन पूर्व पदस्थ अधिकारियों पर भी कार्रवाई प्रस्तावित
जांच की अवधि के दौरान सीएमएचओ कार्यालय में पदस्थ रहे डॉ. बलदेव सिंह भलावी, डॉ. भरत सिंह तेकाम एवं डॉ. आर.के. मेहरा के संबंध में भी पृथक कार्रवाई प्रस्तावित की जाएगी। इनमें डॉ. बलदेव सिंह भलावी सेवानिवृत्त हो चुके हैं, डॉ. भरत सिंह तेकाम का निधन हो चुका है, जबकि डॉ. आर.के. मेहरा का अन्यत्र स्थानांतरण हो चुका है।
– 7 वर्ष की अवधि के भुगतानों की जांच से सामने आया मामला
वर्ष 2017 से 2024 के बीच किए गए भुगतानों को लेकर सामने आई यह वित्तीय अनियमितता सरकारी भुगतान प्रणाली में जिम्मेदारी और निगरानी की भूमिका पर भी सवाल खड़े करती है। खासतौर पर IFMIS में Creator, Verifier और Approver स्तर पर निर्धारित प्रक्रिया के पालन को लेकर जांच में गंभीर टिप्पणियां की गई हैं।
फिलहाल जांच प्रतिवेदन के आधार पर एक कर्मचारी के निलंबन की कार्रवाई हो चुकी है, जबकि अन्य संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई प्रस्तावित की गई है। 60.65 लाख रुपये की वित्तीय अनियमितता सामने आने के बाद अब आगे की विभागीय कार्रवाई और जिम्मेदारी तय होने पर मामले की तस्वीर और स्पष्ट होगी।
