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दशलक्षण पर्व के समापन पर आस्था का महासंगम, तीन विमानों के साथ नगर में निकली भव्य शोभायात्रा

एडीटर: Chetram Rajpoot September 30, 2026

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– 105 उपशांत मति माता जी के सान्निध्य में हुआ श्रीजी का अभिषेक, शांतिधारा एवं मंगल प्रवचन

डिंडौरी न्यूज । दिगंबर जैन समाज के पावन दशलक्षण पर्व के समापन अवसर पर बुधवार को नगर में भव्य एवं धार्मिक शोभायात्रा निकाली गई। 105 उपशांत मति माता जी के पावन सान्निध्य में आयोजित इस आयोजन में जैन समाज के महिला, पुरुष, युवा एवं बच्चों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। शोभायात्रा के दौरान पूरा नगर धार्मिक जयघोष और भक्तिमय वातावरण से गूंजता रहा।

शोभायात्रा का शुभारंभ दोपहर करीब 12:30 बजे श्री 1008 मुनिसुव्रत जिनालय से हुआ। शोभायात्रा में आकर्षण का केंद्र तीन श्रीजी के विमान रहे। इसके साथ बैंड पार्टी, घोड़ों पर ध्वज, अष्ट द्रव्य के वाहन, मंगल कलश, आर्यिका संघ, पुरुष एवं युवा वर्ग, बालिका मंडल, महिला मंडल तथा विभिन्न वाहनों की व्यवस्था रही। श्रद्धालु धार्मिक भावनाओं के साथ शोभायात्रा में शामिल हुए।

शोभायात्रा नगर के प्रमुख मार्गों से होती हुई नीलम होटल के सामने पहुंची, जहां श्री 1008 पार्श्वनाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर जी का विमान भी शोभायात्रा में शामिल हुआ। इसके बाद शोभायात्रा श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन कांच मंदिर पहुंची और वहां से जिला चिकित्सालय चौक होते हुए विद्यातन (विद्या वाटिका) कार्यक्रम स्थल पहुंची।

विद्यातन कार्यक्रम स्थल पर 105 उपशांत मति माता जी के सान्निध्य में श्रीजी का संयुक्त अभिषेक एवं शांतिधारा पूजन विधि-विधान एवं भक्तिभाव के साथ संपन्न हुआ। इस दौरान श्रद्धालुओं ने धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेकर पुण्यार्जन किया। अभिषेक एवं शांतिधारा के पश्चात 105 उपशांत मति माता जी के मंगल प्रवचन हुए। माता जी ने दशलक्षण पर्व के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए आत्मशुद्धि, संयम, त्याग, क्षमा एवं सदाचार को जीवन में अपनाने का संदेश दिया।

मंगल प्रवचन के दौरान समाजजनों ने श्रद्धापूर्वक माता जी के विचारों का श्रवण किया। दशलक्षण पर्व के दस दिनों तक चले धार्मिक आयोजनों के समापन के अवसर पर आयोजित यह कार्यक्रम समाज के लिए विशेष आध्यात्मिक महत्व का रहा। कार्यक्रम का समापन शाम करीब 4:30 बजे हुआ।

इसके पश्चात श्रीजी की स्थापना का क्रम निर्धारित मंदिरों में संपन्न कराया गया। सबसे पहले श्री 1008 पार्श्वनाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर में श्रीजी की स्थापना की गई। इसके बाद शोभायात्रा श्री पार्श्वनाथ कांच मंदिर पहुंची, जहां विधि-विधान के साथ श्रीजी की स्थापना संपन्न हुई। अंत में शोभायात्रा 105 उपशांत मति माता जी के सान्निध्य में श्री 1008 मुनिसुव्रत जिनालय पहुंची, जहां भी श्रीजी की स्थापना धार्मिक विधि-विधान के साथ संपन्न कराई गई।

शोभायात्रा के अग्रभाग की व्यवस्था सत्येन्द्र जैन, रितेश जैन पार्षद एवं सम्यक जैन अधिवक्ता द्वारा संभाली गई। वहीं शोभायात्रा की मध्य व्यवस्था में तीनों समितियों के अध्यक्ष, जैनम अध्यक्ष, बालिका मंडल अध्यक्ष एवं महिला मंडल अध्यक्ष सहित समाज के पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं ने अपनी जिम्मेदारियां निभाईं। आयोजन को व्यवस्थित एवं सफल बनाने में समाज के विभिन्न वर्गों का सहयोग रहा।

दशलक्षण पर्व के समापन पर निकली भव्य शोभायात्रा ने नगर में भक्ति, धर्म और आध्यात्मिकता का वातावरण निर्मित कर दिया। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति और उत्साह ने आयोजन को विशेष बना दिया। पूरे आयोजन की समस्त व्यवस्थाएं श्री 1008 पार्श्वनाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर कमेटी द्वारा की गईं।

 

 

एडीटर

Chetram Rajpoot

चेतराम राजपूत ‘मध्यभूमि के बोल’ के संपादक हैं और दो दशक से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। स्थानीय मुद्दों, भ्रष्टाचार के खुलासे और जमीनी खोजी पत्रकारिता के लिए उनकी पहचान है।...

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