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आरक्षण और यूजीसी प्रावधानों पर उठी आवाज, डिंडौरी में सवर्ण समाज-करणी सेना की रैली

एडीटर: Chetram Rajpoot September 22, 2026

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– समान अवसर और कानूनों के कथित दुरुपयोग पर रोक की मांग, कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

– सवर्ण समाज एवं करणी सेना ने डिंडौरी में निकाली रैली, राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के नाम कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

डिंडौरी न्यूज । जिला मुख्यालय डिंडौरी में मंगलवार को सवर्ण समाज एवं करणी सेना के संयुक्त तत्वावधान में विभिन्न मांगों को लेकर रैली आयोजित की गई। रैली के बाद राष्ट्रपति एवं प्रधानमंत्री के नाम कलेक्टर के माध्यम से ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में आरक्षण व्यवस्था, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग से संबंधित प्रावधानों, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अधिनियम, सभी वर्गों को समान अवसर तथा देश में समान संवैधानिक व्यवस्था से जुड़े विषयों को प्रमुखता से उठाया गया।

संगठन की ओर से बताया गया कि जिले के विभिन्न विकासखंडों से सवर्ण समाज एवं करणी सेना के प्रतिनिधि इस कार्यक्रम में शामिल हुए। प्रतिनिधियों ने कहा कि सामाजिक एवं राष्ट्रीय हित से जुड़े विभिन्न विषयों पर लंबे समय से चर्चा की जा रही है। इसी क्रम में 13 सितंबर 2026 को जिला स्तरीय बैठक आयोजित की गई थी, जिसमें विभिन्न विकासखंडों के प्रतिनिधियों एवं पदाधिकारियों ने भाग लेकर मांगों और सुझावों पर विचार-विमर्श किया। बैठक में लिए गए निर्णय के अनुसार 22 सितंबर को जिला मुख्यालय में रैली निकालकर शासन तक अपनी बात पहुंचाने का निर्णय लिया गया था।

– यूजीसी के प्रावधानों की पुनः समीक्षा की मांग

ज्ञापन में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग से संबंधित ऐसे प्रावधानों एवं नीतियों की पुनः समीक्षा किए जाने की मांग की गई है, जिनको लेकर संगठन के अनुसार समाज के विभिन्न वर्गों में असंतोष एवं आशंकाएं उत्पन्न हो रही हैं। संगठन ने मांग की है कि ऐसे प्रावधानों पर व्यापक स्तर पर विशेषज्ञों और सभी संबंधित पक्षों से विचार-विमर्श किया जाए। आवश्यक होने पर संबंधित प्रावधानों में बदलाव अथवा उन्हें वापस लेने की दिशा में निर्णय लिया जाए।

ज्ञापन में कहा गया कि उच्च शिक्षा से जुड़े नियम एवं नीतियां विद्यार्थियों, शिक्षकों और शैक्षणिक संस्थानों को प्रभावित करती हैं। इसलिए किसी भी महत्वपूर्ण प्रावधान को लागू करने से पहले व्यापक चर्चा एवं सभी हितधारकों के विचारों को महत्व दिया जाना चाहिए।

– आरक्षण व्यवस्था का आधार आर्थिक करने की मांग

ज्ञापन में आरक्षण व्यवस्था की व्यापक समीक्षा करते हुए आर्थिक स्थिति को भी प्रमुख आधार बनाए जाने की मांग की गई है। संगठन का कहना है कि आर्थिक रूप से कमजोर नागरिकों को भी शिक्षा, रोजगार और प्रतियोगी अवसरों में पर्याप्त अवसर मिलना चाहिए।

संगठन ने कहा कि समाज में आर्थिक रूप से कमजोर परिवार प्रत्येक वर्ग में मौजूद हैं। ऐसे में आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को अवसर उपलब्ध कराने के लिए आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा किए जाने की आवश्यकता है। ज्ञापन के माध्यम से सरकार से इस विषय पर व्यापक स्तर पर विचार करने का आग्रह किया गया है।

– एससी-एसटी अधिनियम के कथित दुरुपयोग की रोकथाम की मांग

ज्ञापन में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति से संबंधित कानूनों की भी समीक्षा किए जाने की मांग की गई। संगठन ने कहा कि इन कानूनों का उद्देश्य वास्तविक पीड़ितों को संरक्षण प्रदान करना है और यह संरक्षण बना रहना चाहिए। साथ ही संगठन ने मांग की कि यदि किसी मामले में कानून के दुरुपयोग की शिकायत सामने आती है तो उसकी निष्पक्ष जांच एवं परीक्षण के लिए प्रभावी कानूनी और प्रशासनिक व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

संगठन ने स्पष्ट किया कि वास्तविक रूप से पीड़ित व्यक्तियों को कानून का संरक्षण मिलना चाहिए, लेकिन किसी भी कानून के कथित दुरुपयोग की शिकायत सामने आने पर निष्पक्ष प्रक्रिया के माध्यम से उसका परीक्षण भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

– शिक्षा और रोजगार में समान अवसर की मांग

ज्ञापन में समाज के सभी वर्गों को शिक्षा, रोजगार, प्रतियोगी परीक्षाओं और अन्य क्षेत्रों में समान अवसर उपलब्ध कराने की मांग भी प्रमुखता से रखी गई। संगठन ने कहा कि सामाजिक समरसता, आपसी सद्भाव और समान अवसर की भावना को मजबूत करने के लिए शासन को आवश्यक कदम उठाने चाहिए।

प्रतिनिधियों ने कहा कि देश के प्रत्येक नागरिक को आगे बढ़ने का अवसर मिलना चाहिए तथा सामाजिक विभाजन को कम करने के लिए नीतियों में संतुलन और व्यापक विचार-विमर्श आवश्यक है।

– ‘एक देश, एक विधान, एक संविधान’ की भावना मजबूत करने की मांग

ज्ञापन में देश की एकता, अखंडता एवं संवैधानिक व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए ‘एक देश, एक विधान, एक संविधान’ की भावना को सुदृढ़ करने की मांग की गई। संगठन ने कहा कि देश में समानता, राष्ट्रीय एकता और संवैधानिक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए एकरूपता की दिशा में आवश्यक कदम उठाए जाने चाहिए।

संगठन ने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि संवैधानिक एवं कानूनी प्रावधानों की समीक्षा करते समय विशेषज्ञों, सामाजिक संगठनों और संबंधित सभी हितधारकों से व्यापक चर्चा की जाए तथा देशहित, सामाजिक समरसता और समान अवसर को ध्यान में रखते हुए आवश्यक निर्णय लिए जाएं।

– मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन की चेतावनी

ज्ञापन के अंत में संगठन की ओर से कहा गया कि उनकी मांगों पर शासन गंभीरतापूर्वक विचार करे और आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करे। साथ ही ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि यदि मांगों पर कोई कार्रवाई नहीं होती है तो सवर्ण समाज को दीर्घकालीन आंदोलन के लिए बाध्य होना पड़ सकता है। संगठन ने ऐसी स्थिति के लिए प्रशासन को जिम्मेदार ठहराने की बात कही है।

रैली एवं ज्ञापन कार्यक्रम में डिंडौरी जिले के विभिन्न विकासखंडों से आए प्रतिनिधि एवं पदाधिकारी मौजूद रहे। कार्यक्रम के माध्यम से संगठन ने केंद्र सरकार तक अपनी मांगें पहुंचाने और संबंधित विषयों पर व्यापक चर्चा की मांग रखी।

 

 

एडीटर

Chetram Rajpoot

चेतराम राजपूत ‘मध्यभूमि के बोल’ के संपादक हैं और दो दशक से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। स्थानीय मुद्दों, भ्रष्टाचार के खुलासे और जमीनी खोजी पत्रकारिता के लिए उनकी पहचान है।...

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