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15वें वित्त की राशि पर उठे गंभीर सवाल: कार्ययोजना में विकास कार्य, भुगतान होटल-टेंट और अन्य मदों में!

रिपोर्ट: Chetram Rajpoot September 3, 2026

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– दूधी मझोली पंचायत में चार साल में 165 गतिविधियां प्रस्तावित, महज 13 कार्य शुरू; लाखों के भुगतान की जांच की मांग

डिंडौरी न्यूज । जनपद पंचायत डिंडौरी अंतर्गत ग्राम पंचायत दूधी मझोली में 15वें वित्त आयोग के तहत प्राप्त राशि के उपयोग को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। उपलब्ध वित्तीय एवं कार्ययोजना संबंधी विवरण यह संकेत देता है कि पंचायत में ग्रामीण विकास के लिए प्रस्तावित कार्यों की तुलना में अन्य मदों में किए गए भुगतानों की जांच आवश्यक है। आरोप है कि पंचायत द्वारा स्वीकृत कार्ययोजना को दरकिनार कर होटल, टेंट, वाहन भाड़ा, वेतन-मानदेय और अन्य मदों में राशि खर्च की गई। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिन कार्यों को ग्राम विकास योजना में प्राथमिकता के साथ प्रस्तावित किया गया था, उनमें से अधिकांश धरातल पर शुरू ही नहीं हुए, जबकि दूसरी ओर विभिन्न मदों में भुगतान का सिलसिला जारी रहा।

– 165 गतिविधियां प्रस्तावित, सिर्फ 13 कार्य शुरू

पंचायत के उपलब्ध विवरण के अनुसार वर्ष 2022 से 2025 के बीच कुल 165 गतिविधियां प्रस्तावित की गईं, लेकिन इनमें से महज 13 कार्य ही प्रारंभ किए गए।

वर्षवार स्थिति देखें तो—

– 2022: 22 गतिविधियां प्रस्तावित, केवल 2 कार्य शुरू।

– 2023: 48 गतिविधियां प्रस्तावित, केवल 6 कार्य शुरू।

– 2024: 44 गतिविधियां प्रस्तावित, केवल 2 कार्य शुरू।

– 2025: 51 गतिविधियां प्रस्तावित, केवल 3 कार्य शुरू।

यानी चार वर्षों में प्रस्तावित 165 गतिविधियों में लगभग 92 प्रतिशत गतिविधियों पर कार्य प्रारंभ नहीं हुआ। ऐसे में यह सवाल स्वाभाविक है कि पंचायत की विकास कार्ययोजना में शामिल कार्यों को प्राथमिकता क्यों नहीं मिली और पंचायत की राशि किन मदों में खर्च की गई?

– बिना वर्क आईडी भुगतान का भी आरोप

वित्तीय वर्ष 2022-23 के भुगतान विवरण में कई अलग-अलग मदों में राशि खर्च किए जाने की जानकारी सामने आई है। सेवन रजिस्टर, लिजपिट सहित अन्य कार्यों के नाम पर 18,000, 79,500, 15,000, 18,000, 15,000, 15,000, 15,000, 52,000, 52,000, 51,000, 10,000, 25,750 और 89,772 रुपये जैसी विभिन्न राशियों का भुगतान दर्ज होने की बात सामने आई है।

इसके अलावा 1,60,875 रुपये के भुगतान को बिना वर्क आईडी के किए जाने का भी आरोप है। साथ ही 31 हजार और 34 हजार रुपये सहित अन्य भुगतानों का उल्लेख है। यदि इन भुगतानों के पीछे निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार कार्य स्वीकृति, वर्क आईडी और संबंधित अभिलेख उपलब्ध नहीं हैं, तो यह जांच का गंभीर विषय बन जाता है।

– 2023-24 में होटल से लेकर टेंट तक भुगतान

वित्तीय वर्ष 2023-24 के विवरण में भी कई भुगतान सवालों के घेरे में हैं। अन्य व्यय के नाम पर 26,500 रुपये, मनीष होटल को 43,880 रुपये, आशीष टेंट को 22,000 रुपये, निर्वाचन व्यय के नाम पर 89,400 रुपये तथा RK ट्रेडर्स को 72,250 रुपये का भुगतान किए जाने की जानकारी सामने आई है। इसके अतिरिक्त होटल एवं अन्य मदों में भी राशि खर्च की गई। सवाल यह है कि 15वें वित्त की राशि से किए गए इन भुगतानों का पंचायत की स्वीकृत ग्राम विकास योजना में प्रस्तावित कार्यों से क्या संबंध था?

– विकास कार्य पीछे, अन्य खर्च आगे!

पंचायत स्तर पर 15वें वित्त की राशि का उद्देश्य ग्रामीणों की मूलभूत आवश्यकताओं से जुड़े विकास कार्यों को पूरा करना है। इसके लिए ग्राम विकास योजना तैयार कर कार्यों को ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर दर्ज किया जाता है। लेकिन दूधी मझोली पंचायत के उपलब्ध आंकड़ों में एक ओर सैकड़ों गतिविधियां प्रस्तावित हैं, वहीं दूसरी ओर चार साल में केवल 13 कार्य शुरू होने की स्थिति सामने आती है। इसके समानांतर होटल, टेंट, वाहन, मानदेय और अन्य मदों में भुगतान किए जाने के आरोप हैं। यही विरोधाभास पूरे मामले को गंभीर बनाता है।

– सरपंच-सचिव की भूमिका पर सवाल

इस पूरे मामले में तत्कालीन/संबंधित पंचायत पदाधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है। पंचायत की सरपंच श्रीमती यशोदा पट्टा एवं सचिव कमल सिंह धुर्वे के कार्यकाल में हुए भुगतान, स्वीकृतियां, कार्ययोजना, वर्क आईडी, बिल-वाउचर और बैंक से हुए लेन-देन का मिलान किया जाना जरूरी है। जांच में यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि जिन मदों में भुगतान हुआ, वे 15वें वित्त आयोग के लिए निर्धारित प्रावधानों के अनुरूप थे या नहीं।

एडीटर

Chetram Rajpoot

चेतराम राजपूत ‘मध्यभूमि के बोल’ के संपादक हैं और दो दशक से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। स्थानीय मुद्दों, भ्रष्टाचार के खुलासे और जमीनी खोजी पत्रकारिता के लिए उनकी पहचान है।...

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