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दूसरी महिला के साथ रहने पर पुलिसकर्मी बर्खास्त, विभागीय जांच के बाद एसपी ने की सेवा से पृथक

रिपोर्ट: Chetram Rajpoot September 3, 2026

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– शिकायतकर्ता दीपक ठाकुर के शिकायत पर हुई कार्रवाई

डिंडौरी न्यूज । मध्यप्रदेश पुलिस विभाग में अनुशासनहीनता और अशोभनीय आचरण के मामले में बड़ी कार्रवाई सामने आई है। डिंडौरी जिले में पदस्थ कार्यवाहक प्रधान आरक्षक क्रमांक 244 रोहन सिंह मरावी को विभागीय जांच के बाद पुलिस सेवा से पृथक कर दिया गया है। पुलिस अधीक्षक आशीष खरे द्वारा जारी अंतिम आदेश में पुलिसकर्मी के विरुद्ध लगाए गए आरोपों को गंभीर प्रकृति का मानते हुए यह कार्रवाई की गई है। विभागीय जांच में यह तथ्य सामने आया कि पुलिसकर्मी ने अपनी प्रथम विवाहित पत्नी सावित्री बाई से विधिवत तलाक प्राप्त किए बिना दूसरी महिला को पत्नी की तरह रखकर उसके साथ संबंध स्थापित किए और संतान उत्पन्न की। विभाग ने इसे न केवल सेवा आचरण के विपरीत माना, बल्कि पुलिस विभाग की छवि को आमजन के बीच धूमिल करने वाला अशोभनीय आचरण भी माना।

– शिकायत के बाद शुरू हुई विभागीय जांच

प्रकरण की शुरुआत ग्राम चौरा रैयता, जनपद पंचायत अमरपुर निवासी दीपक ठाकुर द्वारा प्रस्तुत शिकायत से हुई। शिकायत में कार्यवाहक प्रधान आरक्षक रोहन सिंह मरावी के वैवाहिक जीवन एवं आचरण को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए थे। शिकायत के आधार पर पुलिस विभाग ने प्राथमिक जांच के बाद विभागीय जांच की कार्रवाई शुरू की। विभागीय जांच में जांच अधिकारी द्वारा गवाहों के कथन, प्रतिपरीक्षण, कूट परीक्षण, प्रस्तुतकर्ता अधिकारी की रिपोर्ट, उपस्थिति प्रतिवेदन सहित अन्य दस्तावेजों का परीक्षण किया गया। जांच के दौरान दोनों आरोपों को प्रमाणित पाया गया।

– पत्नी से तलाक नहीं, फिर भी दूसरी महिला के साथ रहना माना गंभीर कदाचार

विभागीय जांच में यह भी सामने आया कि रोहन सिंह मरावी ने पहली पत्नी सावित्री बाई से विधिवत तलाक प्राप्त नहीं किया था। दोनों के बीच वैवाहिक विवाद एवं भरण-पोषण से संबंधित न्यायालयीन प्रकरण भी चला था। दस्तावेजों के अनुसार न्यायालय द्वारा सावित्री बाई के लिए भरण-पोषण राशि निर्धारित की गई थी, जिसे बाद में बढ़ाया भी गया। जांच के दौरान रोहन सिंह मरावी ने अपने बचाव में कहा कि पहली पत्नी लंबे समय से उसके साथ नहीं रह रही थी तथा उसके साथ संबंध नहीं थे। उसने यह भी तर्क दिया कि वह दूसरी महिला के साथ रह रहा था और उससे संतान भी हुई है। हालांकि विभागीय जांच में यह बचाव आरोपों से मुक्त करने के लिए पर्याप्त नहीं माना गया।

– सेवा आचरण नियमों का उल्लंघन

अंतिम आदेश में उल्लेख किया गया है कि मध्यप्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के नियम 3(1)(3) के तहत सरकारी कर्मचारी से ऐसा आचरण अपेक्षित है जो सरकारी सेवक के अनुरूप हो। विभाग ने प्रथम पत्नी से विधिवत विवाह विच्छेद किए बिना दूसरी महिला के साथ दांपत्य संबंध स्थापित करने और संतान उत्पन्न करने के आचरण को अनुचित एवं अशोभनीय मानते हुए सेवा आचरण नियमों का गंभीर उल्लंघन माना।

आदेश में कहा गया कि इस प्रकार के आचरण से पुलिस विभाग की छवि आम जनता के मध्य धूमिल हुई है और यह सरकारी सेवक के पद की गरिमा एवं नैतिकता के अनुरूप नहीं है।

– पहले किया गया था निलंबित

विभागीय कार्रवाई के दौरान रोहन सिंह मरावी को कार्यालयीन आदेश क्रमांक/प्रकरण के तहत 27 मार्च 2025 से निलंबित कर रक्षित केंद्र डिंडौरी से संबद्ध किया गया था। विभागीय जांच पूरी होने के बाद उन्हें आरोपों के संबंध में अंतिम बचाव अभ्यावेदन प्रस्तुत करने का अवसर भी दिया गया।

अंतिम आदेश में उल्लेख है कि निलंबन अवधि 27 मार्च 2025 से 10 नवंबर 2025 तक कुल 299 दिवस रही। विभागीय जांच एवं उपलब्ध अभिलेखों के परीक्षण के बाद पुलिस अधीक्षक ने उनके विरुद्ध आरोपों को गंभीर मानते हुए सेवा से पृथक करने का दंड अधिरोपित किया।

– 18 जून 2007 को हुई थी नियुक्ति

आदेश के अनुसार रोहन सिंह मरावी की पुलिस विभाग में 18 जून 2007 को आरक्षक के पद पर नियुक्ति हुई थी। बाद में उन्हें 27 मार्च 2021 को कार्यवाहक प्रधान आरक्षक का प्रभार सौंपा गया था। विभागीय जांच के निष्कर्षों और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर पुलिस अधीक्षक आशीष खरे ने विभागीय जांच क्रमांक 02/2025 में अंतिम आदेश जारी करते हुए कार्यवाहक प्रधान आरक्षक रोहन सिंह मरावी को पुलिस सेवा से पृथक करने की कार्रवाई की है।

 

 

एडीटर

Chetram Rajpoot

चेतराम राजपूत ‘मध्यभूमि के बोल’ के संपादक हैं और दो दशक से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। स्थानीय मुद्दों, भ्रष्टाचार के खुलासे और जमीनी खोजी पत्रकारिता के लिए उनकी पहचान है।...

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