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महिला एवं बाल विकास विभाग में 80 परियोजना अधिकारियों को पदोन्नति, सहायक संचालक पद पर मिली नई जिम्मेदारी

akvlive.in

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– राज्य शासन ने जारी किया आदेश, 03 अगस्त 2026 से प्रभावी पदस्थापना; दो वर्ष की परिवीक्षा अवधि रहेगी लागू

भोपाल/डिंडौरी। मध्यप्रदेश शासन के महिला एवं बाल विकास विभाग ने परियोजना अधिकारी/विकासखंड महिला सशक्तिकरण अधिकारी संवर्ग के अधिकारियों को बड़ी सौगात देते हुए 80 अधिकारियों को पदोन्नत कर सहायक संचालक पद पर नियुक्त करने के आदेश जारी किए हैं। विभाग की ओर से 03 अगस्त 2026 को जारी आदेश के अनुसार इन अधिकारियों को मध्यप्रदेश वेतन पुनरीक्षण नियम-2017 के अंतर्गत वेतन मैट्रिक्स लेवल-12 (₹15,600-39,100 + ग्रेड पे ₹5,400 के समतुल्य) में सहायक संचालक पद पर पदोन्नत किया गया है।

आदेश के अनुसार पदोन्नत अधिकारियों की सूची वरिष्ठता के आधार पर जारी की गई है। इनमें राज्यभर के परियोजना अधिकारी एवं विकासखंड महिला सशक्तिकरण अधिकारी शामिल हैं, जिन्हें अब सहायक संचालक के रूप में नई जिम्मेदारियां सौंपी जाएंगी।

– दो वर्ष की रहेगी परिवीक्षा

शासन के आदेश में स्पष्ट किया गया है कि मध्यप्रदेश सिविल सेवा (सामान्य शर्तें) नियम, 1961 के प्रावधानों के अनुसार सभी पदोन्नत अधिकारी दो वर्ष की परिवीक्षा अवधि पर रहेंगे। इस अवधि में उनके कार्य एवं आचरण का मूल्यांकन किया जाएगा।

– वर्तमान पद पर ही संभालेंगे दायित्व

आदेश के मुताबिक प्रत्येक पदोन्नत अधिकारी के लिए अलग से पदस्थापना आदेश जारी किए जाएंगे। तब तक संबंधित अधिकारी अपने वर्तमान कार्यस्थल पर ही उच्च पद का प्रभार संभालते रहेंगे।

– पदोन्नति निरस्त होने का भी प्रावधान

शासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि किसी अधिकारी के विरुद्ध पदोन्नति आदेश जारी होने की तिथि तक कोई विभागीय जांच, अनुशासनात्मक कार्रवाई या अन्य ऐसी स्थिति पाई जाती है, जो पदोन्नति के लिए बाधक हो, तो संबंधित अधिकारी की पदोन्नति निरस्त मानी जाएगी और प्रकरण विभागीय पदोन्नति समिति के समक्ष पुनः प्रस्तुत किया जाएगा।

प्रतिनियुक्त अधिकारियों के लिए विशेष व्यवस्था

जो परियोजना अधिकारी वर्तमान में प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत हैं, उनके संबंध में आदेश में उल्लेख किया गया है कि विभाग में उपलब्ध सबसे कनिष्ठ अधिकारी की सहायक संचालक पद पर की गई पदोन्नति निरस्त कर उन्हें मूल संवर्ग में समायोजित किया जा सकेगा।

– आरक्षण नियमों का किया गया पालन

विभाग ने आदेश में उल्लेख किया है कि यह पदोन्नति प्रक्रिया मध्यप्रदेश लोक सेवा (अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण) अधिनियम, 1994 तथा मध्यप्रदेश लोक सेवा पदोन्नति नियम, 2025 के प्रावधानों का पालन करते हुए की गई है।

– न्यायालयीन निर्णयों के अधीन रहेगा आदेश

शासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह पदोन्नति आदेश सर्वोच्च न्यायालय एवं उच्च न्यायालय में लंबित या भविष्य में पारित होने वाले निर्णयों के अधीन रहेगा।

वेतन निर्धारण का विकल्प देना होगा

जिन अधिकारियों ने पूर्व में उच्च वेतनमान अथवा क्रमोन्नति का लाभ प्राप्त कर लिया है, उन्हें मध्यप्रदेश लोक सेवा पदोन्नति नियम, 2025 के नियम-13 के तहत आदेश प्राप्त होने की तिथि से एक माह के भीतर वेतन निर्धारण संबंधी अपना विकल्प प्रस्तुत करना होगा।

महिला एवं बाल विकास विभाग के इस निर्णय को विभागीय अधिकारियों के लिए महत्वपूर्ण प्रशासनिक कदम माना जा रहा है। इससे लंबे समय से पदोन्नति की प्रतीक्षा कर रहे अधिकारियों को नई जिम्मेदारी मिलने के साथ विभागीय कार्यों की गति और निगरानी में भी सुधार की उम्मीद है।

Chetram Rajpoot

चेतराम राजपूत मध्यभूमि के बोल समाचार पत्र के संपादक हैं। 2013 से इस दायित्व का निर्वहन कर रहे हैं। निष्पक्ष और निर्भीक पत्रकारिता के प्रति उनकी प्रतिबद्धता ने madhyabhoomi.in को विश्वसनीय समाचार स्रोत बनाया है, जो मुख्यधारा की मीडिया से अलग, विकास, समानता, आर्थिक और सामाजिक न्याय जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर केंद्रित है। हम सच्चाई और पारदर्शिता में विश्वास रखते हैं। मीडिया की स्वतंत्रता और निष्पक्षता को बनाए रखने के लिए सतत प्रयासरत हैं। बेखौफ कलम... जो लिखता है बेलिबास सच..

Chetram Rajpoot

चेतराम राजपूत मध्यभूमि के बोल समाचार पत्र के संपादक हैं। 2013 से इस दायित्व का निर्वहन कर रहे हैं। निष्पक्ष और निर्भीक पत्रकारिता के प्रति उनकी प्रतिबद्धता ने madhyabhoomi.in को विश्वसनीय समाचार स्रोत बनाया है, जो मुख्यधारा की मीडिया से अलग, विकास, समानता, आर्थिक और सामाजिक न्याय जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर केंद्रित है। हम सच्चाई और पारदर्शिता में विश्वास रखते हैं। मीडिया की स्वतंत्रता और निष्पक्षता को बनाए रखने के लिए सतत प्रयासरत हैं। बेखौफ कलम... जो लिखता है बेलिबास सच..

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