– जनजातीय कार्य विभाग ने जारी किए नए आदेश, GFMS पोर्टल और eHRMS के अनुरूप ही होगी भर्ती, नियम तोड़ने वालों पर होगी कार्रवाई
भोपाल। जनजातीय कार्य विभाग के विद्यालयों में वर्षों से अतिथि शिक्षकों की भर्ती को लेकर सामने आ रही अनियमितताओं और संस्था प्रमुखों तथा प्राचार्यों की मनमानी पर अब विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। अपने चहेतों को लाभ पहुंचाने के लिए रिक्त पदों को छिपाना, विषय के विपरीत अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति करना तथा वास्तविक आवश्यकता से अधिक भर्ती जैसे मामलों की लगातार शिकायतों के बाद जनजातीय कार्य विभाग मंत्रालय ने स्पष्ट निर्देश जारी कर पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने की पहल की है।
आयुक्त, जनजातीय कार्य मध्यप्रदेश द्वारा 4 जुलाई 2026 को जारी आदेश में शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए विभागीय विद्यालयों में अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति संबंधी विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। यह आदेश लोक शिक्षण संचालनालय के 30 जून 2026 के निर्देशों के अनुरूप जारी किया गया है।


– रिक्त पदों के अनुसार ही होगी नियुक्ति
आदेश में स्पष्ट किया गया है कि प्रत्येक विद्यालय की स्कूल मैनेजमेंट एंड डेवलपमेंट कमेटी (SMDC) पहले रिक्त पदों का सत्यापन करेगी और उसके बाद Guest Faculty Management System (GFMS) के माध्यम से ही अतिथि शिक्षकों की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।
यदि किसी जिले में GFMS पोर्टल के माध्यम से भर्ती में तकनीकी या अन्य कठिनाई आती है तो जिला स्तर पर समिति गठित की जाएगी, जिसमें सहायक आयुक्त/जिला संयोजक, जिला शिक्षा अधिकारी तथा जिला परियोजना समन्वयक शामिल रहेंगे। यही समिति SMDC द्वारा अनुशंसित पैनल से आवश्यकता के अनुसार अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति करेगी।
– विषय विरुद्ध नियुक्तियों पर लगेगी रोक
विभाग ने साफ कर दिया है कि विषय शिक्षक, प्रयोगशाला शिक्षक, खेलकूद शिक्षक सहित अन्य सह-अकादमिक पदों पर भी नियुक्ति निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार ही होगी। इसके अलावा सांदीपनि विद्यालयों में भी यही प्रक्रिया लागू रहेगी।
– eHRMS के अनुसार ही होगी भर्ती
आदेश में विभागीय जिला अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि eHRMS पोर्टल पर दर्ज स्वीकृत, भरे एवं रिक्त पदों के अनुरूप ही अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति की जाए। किसी भी स्थिति में जिले में स्वीकृत रिक्त पदों से अधिक अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति नहीं की जा सकेगी।
मानदेय भुगतान पर भी सख्ती
मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि अतिथि शिक्षकों का मानदेय केवल उसी विद्यालय से और निर्धारित मद से आहरित किया जाएगा, जहां उनकी पदस्थापना होगी। इससे फर्जी भुगतान और वित्तीय अनियमितताओं पर रोक लगाने का प्रयास किया गया है।
– नियमों की अनदेखी पर होगी कार्रवाई
आदेश के बिंदु 5 एवं 6 के पालन को अनिवार्य बताते हुए विभाग ने चेतावनी दी है कि यदि किसी अधिकारी द्वारा इन निर्देशों की अवहेलना की गई तो उसके विरुद्ध आवश्यक प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी। गौरतलब है कि जनजातीय कार्य विभाग के विद्यालयों में लंबे समय से यह आरोप लगते रहे हैं कि कई संस्था प्रमुख एवं प्राचार्य अपने परिचितों और चहेतों को लाभ पहुंचाने के लिए रिक्त पदों की वास्तविक जानकारी छिपाकर या विषय के विपरीत अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति कर रहे थे। इससे योग्य अभ्यर्थियों के साथ अन्याय होने के साथ-साथ शासन की मंशा भी प्रभावित हो रही थी। मंत्रालय के ताजा आदेश को ऐसे मामलों पर अंकुश लगाने और अतिथि शिक्षक भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी, नियमसम्मत एवं जवाबदेह बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।







