डिंडौरी न्यूज । युवा अधिवक्ता सम्यक जैन ने प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव तथा मुख्य सचिव को पत्र लिखकर महत्वपूर्ण सुझाव प्रस्तुत किए हैं।
अपने पत्र में उन्होंने प्रदेश में चल रही विभिन्न शासकीय योजनाओं एवं अभियानों की समीक्षा प्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि वर्तमान व्यवस्था में अत्यधिक समीक्षा बैठकें, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और रिपोर्टिंग प्रक्रियाएं अधिकारियों के वास्तविक कार्य निष्पादन में बाधा बन रही हैं।
उन्होंने उल्लेख किया कि माह के लगभग 25 दिन विभिन्न स्तरों पर बैठकों में ही व्यतीत हो जाते हैं, जिससे जमीनी स्तर पर कार्यों के लिए केवल 4–5 दिन ही शेष रहते हैं। इसके कारण योजनाओं का गुणवत्तापूर्ण क्रियान्वयन प्रभावित हो रहा है और कार्य केवल लक्ष्य पूर्ति तक सीमित रह जाते हैं।
सम्यक जैन ने यह भी बताया कि कलेक्टर से लेकर पटवारी स्तर तक के अधिकारी अधिकतर समय फोटो अपलोडिंग, डेटा एंट्री और रिपोर्टिंग में व्यस्त रहते हैं, जिससे वास्तविक विकास कार्यों की निगरानी प्रभावित हो रही है। इसके साथ ही उन्होंने फाइलों के लंबित रहने, जनसुनवाई में देरी और प्रशासनिक कार्यक्षमता में गिरावट को भी गंभीर समस्या बताया।
पत्र में उन्होंने “मोर वर्किंग, लेस मीटिंग” (कम बैठकें, अधिक कार्य) की नीति अपनाने की आवश्यकता पर बल देते हुए सुझाव दिया कि टी.एल. जैसी समीक्षा बैठकों को माह में अधिकतम 1–2 बार तक सीमित किया जाए।
उन्होंने प्रशासन में पोस्डकोरब सिद्धांत लागू करने की भी बात कही, जिससे योजना निर्माण, संगठन, समन्वय और रिपोर्टिंग को अधिक प्रभावी बनाया जा सके। इसके अलावा उन्होंने रिपोर्टिंग प्रणाली को सरल बनाने, अनावश्यक फोटो अपलोडिंग कम करने और योजनाओं का मूल्यांकन गुणवत्ता के आधार पर करने का सुझाव दिया।
सम्यक जैन ने पत्र में यह भी कहा कि अधिकारियों और कर्मचारियों पर अत्यधिक कार्य दबाव और लगातार बैठकों के कारण उनकी कार्यक्षमता प्रभावित हो रही है, जिससे प्रशासनिक गुणवत्ता पर भी नकारात्मक असर पड़ रहा है।
अंत में उन्होंने मुख्यमंत्री एवं मुख्य सचिव से अनुरोध कर माँग कि हैं कि प्रदेशहित में इन सुझावों पर गंभीरता से विचार कर एक संतुलित, पारदर्शी और जनहितकारी प्रशासनिक व्यवस्था स्थापित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं l








