– अच्छे दिनों की इंतजार कर रहे ग्राम पंचायतो के पेसा कर्मचारी
मध्यप्रदेश सरकार द्वारा पेसा एक्ट को धरातल में मजबूती के साथ लागू करने के लिए सूबे के 20 जिलों एवं अनुसूचित 89 ब्लॉकों में जिला से लेकर ग्राम स्तर पर पेसा मोबलाईजरो की भर्ती की गई थी, मध्यप्रदेश में लगभग 5254 से अधिक पैसा कर्मी आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं। सरकार के वादे और दावे महज घोषणा तक सीमित है, मुख्यमंत्री मोहन यादव और पंचायत मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने पेसा मोबलाईजरो का वेतन 4हजार से बढ़ाकर 8 हजार करने का वादा किया था लेकिन 8 हजार तो दूर मूल रूप से मिलने वाली 4000 हजार रुपए मानदेय भी कई महीनों से नहीं मिल रहा है।

अक्सर सरकार यह दावा करती है कि कर्मचारी हमारे परिवार के हिस्सा है लेकिन कई बार यह दावा बादा भरोसा ब्रेक हो जाता है, संविदा कर्मी दैनिक कर्मचारी या दैनिक वेतन भोगी हो या फिर दैनिक कर्मचारी आज भी कम मानदेय मात्र 4000 /माह और सीमित अधिकारों के साथ सिर्फ शोषण हो रहे हैं आज प्रदेश की विभिन्न अनुसूचित जनजातीय ग्राम पंचायत में काम करने वाले पेसा मोबिलाइजर की ही बात की जाए तो इन्हें ना तो समय पर मानदेय मिलता है और ना ही अब सरकार द्वारा किए गए संकल्प पत्र में वादे या घोषणाएं हुई है, लेकिन आज तक आदेश में परिवर्तित नहीं हुए, न पूरी हुई है, अंततः सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं हो या सरकार के लिए दिन-रात फील्ड पर काम करने वाले ये ग्राम पंचायत पेसा मोबिलाइजर मानसिक और आर्थिक रूप से न केवल शोषण हो रहे हैं बल्कि बंधुआ मजदूरों की तरह सिर्फ काम कर रहे हैं, विगत 6माह से एवं नए मोबिलाईजरों को 13 माह से मानदेय नही मिला, प्रदेश के 20 जिलों के 89 ब्लॉको के ग्राम पंचायतो मे 5254 ग्राम सभा पेसा मोबिलाइजर को मानदेय प्राप्त नहीं हुआ है आश्चर्य की बात यह है कि समता समानता और अधिकारों की दुहाई देने वाली सरकार को अपने ही कर्मचारियों की अधिकारों की चिंता नहीं है।

– कभी मानदेय का इंतजार तो कभी अधिकारों के लिए लड़ाई शोषित होते ग्राम सभा पेसा मोबिलाईजर्स
तमाम तरह की योजनाओं का संचालन मानसिक दबाव सीमित अधिकार स्थानीय राजनीति और शासन प्रशासन द्वारा निर्देशित आदेशों का पालन करने और ग्राम पंचायत के विकास में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले शासन के समस्त जन कल्याणकारी कर घर-घर जाकर लोगों को लाभ दिलाना या लोगों को मदद करना जैसे महत्वपूर्ण कार्य ग्राम सभा पेसा मोबिलाइजर लंबे अरसे से सेवाएं जरूर दे रहे हैं, लेकिन आज भी अधिकार विहीन होकर सिर्फ शोषित हो रहे हैं,कई अवसरों पर सरकार के महत्वपूर्ण पदों पर काबिज नेताओं ने तमाम तरह के बड़े-बड़े दावे या वादे जरूर किए है, लेकिन आज भी पेसा मोबिलाइजर की स्थिति दयनीय है,मानदेय देने के लिए कभी बजट नहीं आता तो कभी अधिकारी लोगो द्वारा मोबिलाईजरों को परेशान करना तो कभी सिस्टम इतना लापरवाह हो जाता है कि अपना ही मानदेय मात्र 4000/माह पाने के लिए प्रदेश के अनुसूचित जनजाति पेसा ग्राम पंचायत में कार्यरत 5254 पेसा मोबिलाइजरों को आगे हाथ फैलाने पड़ते हैं आश्चर्य की बात यह है कि हर बात की गारंटी देने वाली सरकार या बड़े-बड़े पदों पर काबिज नेता निचले स्तर पर काम करने वाले कर्मचारियों के हितों की चिंता क्यों नहीं करते, लगता है इस नेतागिरी के दौर में कर्मचारियों को गुलाम समझा जा रहा है ।











