भोपाल। जनजाति कार्य विभाग में पदस्थ रहे तत्कालीन सहायक आयुक्त संतोष शुक्ला एक बार फिर सुर्खियों में हैं। सेवानिवृत्ति के ठीक पहले उनके कार्यकाल में हुई कथित वित्तीय अनियमितताओं और प्रशासनिक गड़बड़ियों को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। मामले की गंभीरता को देखते हुए खंडवा कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने जांच समिति गठित कर गहन जांच के आदेश जारी कर दिए हैं।

जारी आदेश में उल्लेख है कि सहायक आयुक्त रहते हुए संतोष शुक्ला के खिलाफ कई शिकायतें प्राप्त हुई थीं। इनमें नियम विरुद्ध तरीके से कर्मचारियों का स्थानांतरण और संलग्नीकरण, स्थाई नियुक्तियों में अनियमितता, छात्रावासों के लिए सामग्री खरीदी में नियमों की अनदेखी, बस्ती विकास योजना में बिना अनुमति कार्य स्वीकृति तथा विभिन्न योजनाओं में प्रक्रियाओं का उल्लंघन जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं। साथ ही मरम्मत कार्यों में लागत से अधिक भुगतान किए जाने की शिकायत भी सामने आई है। संतोष शुक्ला द्वारा आनन फानन में किए समस्त ट्रांसफर पोस्टिंग को प्रभारी सहायक आयुक्त ने तत्काल निरस्त करने के आदेश जारी किए हैं।
सूत्रों के अनुसार, डिंडौरी जिले में पदस्थ रहने के दौरान भी संतोष शुक्ला पर स्मार्ट क्लास प्रोजेक्ट, सामग्री खरीदी और निर्माण/मरम्मत कार्यों में बड़े पैमाने पर घोटाले के आरोप लगे थे। हालांकि उस समय यह मामला फाइलों में ही दबकर रह गया और कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी ।
अब सेवानिवृत्ति के दौरान सामने आए नए तथ्यों ने पूरे मामले को फिर से जीवित कर दिया है। यह मामला जनजाति कार्य मंत्री विजय शाह के गृह जिले खंडवा से जुड़ा होने के कारण प्रदेशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है।
कलेक्टर द्वारा गठित जांच दल में श्रीमती सृष्टि देशमुख, बजरंग बहादुर सिंह डिप्टी कलेक्टर, आरएस गवली जिला कोषालय अधिकारी को शामिल किया गया है, जिन्हें 5 दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। जांच में विशेष रूप से वित्तीय लेनदेन, योजनाओं के क्रियान्वयन और प्रशासनिक निर्णयों की वैधता की पड़ताल की जाएगी।
प्रशासन ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित अधिकारी के विरुद्ध कड़ी वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। इस पूरे प्रकरण ने एक बार फिर जनजाति कार्य विभाग की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।










