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प्रधान आरक्षक पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज.. ये है वजह

रिपोर्ट: Chetram Rajpoot April 2, 2026

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भोपाल न्यूज | पुलिस विभाग की छवि को धूमिल करने वाले एक मामले में पुलिस मुख्यालय भोपाल स्थित सतर्कता थाना ने कड़ी कार्रवाई करते हुए पुलिस ट्रेनिंग स्कूल ग्वालियर में पदस्थ एक प्रधान आरक्षक के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत प्रकरण दर्ज किया है। आरोपी पुलिसकर्मी पर अपने पद का दुरुपयोग कर होटल में बिना किराया दिए ठहरने का गंभीर आरोप है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, सतर्कता थाना में अपराध क्रमांक 01/26 के तहत दर्ज इस मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 11 लागू की गई है। प्रारंभिक जांच और सूचना सत्यापन प्रक्रिया में यह सामने आया कि संबंधित पुलिसकर्मी वर्ष 2024 में प्रतिनियुक्ति के दौरान इंदौर जिले में पदस्थ रहते हुए करीब डेढ़ माह तक एक होटल के कमरे में बिना किराया भुगतान किए निवासरत रहे।

जांच में यह भी खुलासा हुआ कि इस दौरान आरोपी ने अपने पद का प्रभाव दिखाते हुए होटल प्रबंधन पर दबाव बनाया और करीब 1.5 लाख रुपये का अनुचित लाभ प्राप्त किया। इतना ही नहीं, आरोप है कि पुलिसकर्मी ने अपने वास्तविक पद से उच्च पद की वर्दी धारण की, ताकि होटल प्रबंधन किराया मांगने से हिचकिचाए।

सतर्कता विभाग द्वारा दर्ज प्रकरण के बाद मामले की विस्तृत विवेचना प्रारंभ कर दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी।

उल्लेखनीय है कि संबंधित पुलिसकर्मी का नाम पहले भी विवादों में रह चुका है। उसके खिलाफ ग्वालियर जिले में वर्ष 2021 से एक अन्य मामला भी दर्ज है, जिसकी विवेचना अभी लंबित है।

इस कार्रवाई को पुलिस मुख्यालय द्वारा भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनाई जा रही “जीरो टॉलरेंस” नीति के तहत एक सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है, जिससे स्पष्ट है कि विभाग में अनुशासनहीनता और पद के दुरुपयोग को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

एडीटर

Chetram Rajpoot

चेतराम राजपूत ‘मध्यभूमि के बोल’ के संपादक हैं और दो दशक से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। स्थानीय मुद्दों, भ्रष्टाचार के खुलासे और जमीनी खोजी पत्रकारिता के लिए उनकी पहचान है।...

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