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डिंडौरी में तीन हाथियों का मूवमेंट, गांव-गांव अलर्ट: 6 टीमें निगरानी में जुटीं

रिपोर्ट: Chetram Rajpoot March 31, 2026

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– हाथियों से 250 मीटर दूरी रखने की अपील

डिंडौरी। सामान्य वनमंडल डिंडौरी अंतर्गत वनपरिक्षेत्र डिंडौरी में तीन हाथियों के विचरण से क्षेत्र में सतर्कता बढ़ा दी गई है। वन विभाग के अनुसार ये हाथी कुई से होते हुए रामगुड़ा, त्यागपुर, सारसताल, गोपालपुर, बांसी देवरी, देवकरा एवं मिगड़ी के जंगलों में लगातार मूवमेंट कर रहे हैं, जिससे आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।

वनमंडलाधिकारी श्री अशोक कुमार सोलंकी एवं उपवनमंडल अधिकारी श्री सुरेन्द्र सिंह जाटव के निर्देशन में हाथियों की निगरानी और जनसुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए छह विशेष टीमें लगातार क्षेत्र में तैनात हैं। वरिष्ठ अधिकारी स्वयं मौके पर पहुंचकर हालात का जायजा ले रहे हैं और गांव-गांव जाकर वन समितियों एवं ग्रामीणों के साथ बैठक कर जरूरी दिशा-निर्देश दे रहे हैं।

स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए वन विभाग ने “हाथी मित्र दल” का गठन किया है, जिसमें स्थानीय ग्रामीणों को शामिल कर उनकी मदद ली जा रही है। ये दल हाथियों की गतिविधियों पर नजर रखने, समय पर सूचना साझा करने और लोगों को जागरूक करने का काम कर रहे हैं।

आपात स्थिति से निपटने के लिए रैपिड रिस्पॉन्स टीम भी सक्रिय कर दी गई है, जो किसी भी सूचना पर तुरंत मौके पर पहुंचकर कार्रवाई कर रही है। वहीं, हाथियों की सुरक्षित आवाजाही और जनसुरक्षा को ध्यान में रखते हुए विद्युत विभाग के साथ समन्वय कर जरूरत पड़ने पर बिजली आपूर्ति और प्रकाश व्यवस्था अस्थायी रूप से बंद कराई जा रही है।

किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए चिकित्सा विभाग को भी अलर्ट पर रखा गया है, ताकि दुर्घटना या जनहानि की स्थिति में तुरंत एम्बुलेंस और उपचार उपलब्ध कराया जा सके। इसके अलावा, यदि हाथियों द्वारा फसल, मकान या अन्य संपत्ति को नुकसान पहुंचता है, तो राजस्व विभाग के साथ मिलकर त्वरित सर्वे और मुआवजा प्रक्रिया सुनिश्चित की जाएगी।इस पूरे अभियान में वन, राजस्व, पुलिस, विद्युत और स्वास्थ्य विभाग आपसी समन्वय से लगातार कार्य कर रहे हैं।

– आमजन के लिए जरूरी अपील

वन विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि वे हाथियों से कम से कम 250 मीटर की दूरी बनाए रखें। किसी भी हालत में उनके पास न जाएं, न ही उन्हें उकसाएं। फोटो या वीडियो लेने के चक्कर में अपनी जान जोखिम में न डालें। किसी भी आपात स्थिति में तुरंत वन विभाग या स्थानीय प्रशासन को सूचना दें।

एडीटर

Chetram Rajpoot

चेतराम राजपूत ‘मध्यभूमि के बोल’ के संपादक हैं और दो दशक से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। स्थानीय मुद्दों, भ्रष्टाचार के खुलासे और जमीनी खोजी पत्रकारिता के लिए उनकी पहचान है।...

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