डिंडौरी/समनापुर। निजी विद्यालयों के संचालन और मान्यता को लेकर मध्यप्रदेश शासन द्वारा निर्धारित मापदंडों के बावजूद समनापुर में एक निजी स्कूल के संचालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि दिशा पेसेपिक स्कूल में शासन के निर्धारित मानकों की अनदेखी कर कक्षा 1 से 8वीं तक की कक्षाएं संचालित की जा रही हैं। स्कूल की व्यवस्थाओं को लेकर सामने आ रही शिकायतों ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
शासन के दिशा-निर्देशों के अनुसार निजी विद्यालयों को मान्यता प्रदान करने से पहले विद्यालय भवन, पर्याप्त कक्ष, विद्यार्थियों के लिए आवश्यक सुविधाएं, खेल मैदान तथा योग्य एवं प्रशिक्षित शिक्षकों सहित निर्धारित मूलभूत मानकों की उपलब्धता सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है। लेकिन समनापुर में संचालित इस विद्यालय को लेकर आरोप है कि इन बुनियादी मापदंडों का पालन किए बिना ही लंबे समय से विद्यालय का संचालन किया जा रहा है।
न पर्याप्त कमरे, न खेल मैदान की व्यवस्था
प्राप्त जानकारी और स्थानीय स्तर पर सामने आए तथ्यों के अनुसार जिस स्थान पर दिशा पेसेपिक स्कूल संचालित किया जा रहा है, वहां विद्यार्थियों की संख्या के अनुपात में पर्याप्त कक्ष उपलब्ध नहीं होने का आरोप है। विद्यालय परिसर में खेल मैदान की व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
आरोप है कि सीमित स्थान में बड़ी संख्या में बच्चों को कक्षाओं में बैठाकर पढ़ाई कराई जा रही है। यदि ये आरोप सही पाए जाते हैं तो यह विद्यार्थियों की सुविधा, सुरक्षा और उनके सर्वांगीण विकास से जुड़े महत्वपूर्ण मानकों की गंभीर अनदेखी का मामला हो सकता है।
प्रशिक्षित शिक्षकों की उपलब्धता पर भी सवाल
कक्षा पहली से आठवीं तक संचालित विद्यालय में विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए योग्य एवं प्रशिक्षित शिक्षकों की उपलब्धता महत्वपूर्ण है। लेकिन दिशा पेसेपिक स्कूल में शासन के निर्धारित मापदंड के अनुरूप प्रशिक्षित शिक्षकों की उपलब्धता को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
अभिभावकों का आरोप है कि विद्यालय में शिक्षा की गुणवत्ता और आवश्यक शैक्षणिक संसाधनों की स्थिति की नियमित निगरानी की आवश्यकता है। सवाल यह भी है कि यदि विद्यालय में निर्धारित मानकों के अनुरूप सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं तो संबंधित विभाग द्वारा विद्यालय को मान्यता अथवा संचालन की अनुमति किस आधार पर दी गई और लंबे समय से इसकी निगरानी क्यों नहीं की गई?
अधिकारियों की भूमिका भी सवालों के घेरे में
सबसे बड़ा सवाल शिक्षा विभाग की निगरानी व्यवस्था को लेकर खड़ा हो रहा है। यदि विद्यालय में शासन द्वारा निर्धारित आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं, तो विभागीय स्तर पर निरीक्षण के दौरान यह स्थिति अधिकारियों की नजर में क्यों नहीं आई? वहीं यदि विद्यालय सभी मानकों को पूरा करता है तो शिकायतों और आरोपों की वास्तविकता सामने लाने के लिए विभाग को मौके पर जांच कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
स्थानीय लोगों का कहना है कि शिक्षा जैसी महत्वपूर्ण व्यवस्था में नियमों का पालन केवल कागजों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। विद्यालयों में बच्चों को सुरक्षित वातावरण, पर्याप्त कक्ष, खेल एवं अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध होना जरूरी है।
जिला शिक्षा अधिकारी से नहीं हो सकी बात
मामले में शिक्षा विभाग का आधिकारिक पक्ष जानने के लिए जिला शिक्षा अधिकारी से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। ऐसे में विद्यालय की मान्यता, निरीक्षण रिपोर्ट, उपलब्ध संसाधनों तथा शासन के निर्धारित मापदंडों के पालन को लेकर विभाग का आधिकारिक पक्ष सामने नहीं आ सका।
अब देखना यह है कि शिक्षा विभाग इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और क्या विद्यालय का स्थलीय निरीक्षण कर दस्तावेजों एवं वास्तविक व्यवस्थाओं का सत्यापन कराया जाता है। यदि जांच में शासन के निर्धारित मानकों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित विद्यालय के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की आवश्यकता होगी।
