डिंडौरी। जिले में न्यायिक प्रक्रिया को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से अभियोजन अधिकारियों और पुलिस अधिकारियों की एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यशाला 15 मार्च 2026 को बायपास रोड स्थित नेचर कोर्टयार्ड में संपन्न हुई। कार्यक्रम का आयोजन लोक अभियोजन संचालनालय भोपाल के निर्देशानुसार किया गया।
मीडिया सेल प्रभारी एवं अभियोजन अधिकारी ने जानकारी देते हुए बताया कि कार्यशाला में अभियोजन अधिकारियों के न्यायालयीन कार्य से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। इसके साथ ही एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम तथा पॉक्सो (POCSO) अधिनियम – प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंस एक्ट से जुड़े प्रावधानों और उनके प्रभावी क्रियान्वयन पर भी विस्तार से जानकारी दी गई।
कार्यशाला में पुलिस विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों को न्यायालयीन प्रक्रिया, अनुसंधान की गुणवत्ता, साक्ष्य संकलन तथा अभियोजन को मजबूत बनाने से जुड़े महत्वपूर्ण बिंदुओं पर प्रशिक्षण दिया गया। इस दौरान डीएसपी, निरीक्षक, उपनिरीक्षक, सब-इंस्पेक्टर, आरक्षक और महिला आरक्षक सहित बड़ी संख्या में पुलिस अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिला कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया ने कहा कि न्यायालय, पुलिस और प्रशासन एक ही माला के मोती हैं और इन तीनों के बेहतर समन्वय से ही समाज में न्याय व्यवस्था मजबूत होती है। उन्होंने विशेष रूप से एससी/एसटी एक्ट और पॉक्सो से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता, विश्वास और सकारात्मक सोच के साथ कार्य करने पर जोर दिया।
कलेक्टर ने कहा कि पुलिस और सेना की वर्दी का समाज में विशेष सम्मान होता है और उस सम्मान को बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस और प्रशासन एक ही गाड़ी के दो पहिए हैं, जो आपसी तालमेल के साथ समाज और देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
इस अवसर पर तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश कमलेश कुमार सोनी ने अपने संबोधन में कहा कि उच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुसार पॉक्सो तथा एससी/एसटी एक्ट से जुड़े मामलों का संचालन पूरी गंभीरता और विधिक प्रक्रिया के अनुरूप किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि न्यायालय का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी निर्दोष व्यक्ति को सजा न मिले। न्याय व्यवस्था की मूल भावना यही है कि भले ही कोई अपराधी बच जाए, लेकिन निर्दोष व्यक्ति को दंडित नहीं किया जाना चाहिए।
कार्यशाला के दौरान सभी प्रतिभागियों को गुणवत्तापूर्ण अध्ययन सामग्री भी उपलब्ध कराई गई, ताकि वे अपने कार्य में विधिक प्रावधानों का बेहतर उपयोग कर सकें। इस अवसर पर तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश कमलेश कुमार सोनी, कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया, प्रभारी सहायक निदेशक मनोज कुमार वर्मा, एडीपीओ लक्ष्मीनारायण साहू, प्रमोद कुमार पटेल, कमलेश कुमार पटले, निहाल टेकाम, एसडीओपी डिंडौरी श्री द्विवेदी सहित अन्य पुलिस अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।








