डिंडौरी। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण नई दिल्ली एवं मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जबलपुर के निर्देशन में तथा माननीय प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश/अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण डिंडौरी श्रीमती शशिकान्ता वैश्य के मार्गदर्शन में शनिवार 14 मार्च 2026 को जिला न्यायालय परिसर डिंडौरी में नेशनल लोक अदालत का आयोजन किया गया।
लोक अदालत का शुभारंभ प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्रीमती शशिकान्ता वैश्य, कलेक्टर श्रीमती अंजू पवन भदौरिया तथा अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष श्री यू.के. पटेरिया द्वारा माँ सरस्वती के छायाचित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलित कर किया गया।
इस अवसर पर प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्रीमती शशिकान्ता वैश्य ने कहा कि नेशनल लोक अदालत का उद्देश्य न्यायालयों में लंबित प्रकरणों का आपसी समझौते और सुलह के माध्यम से शीघ्र एवं सरल निराकरण करना है। उन्होंने बताया कि लोक अदालत के माध्यम से पारिवारिक विवाद, मोटरयान दुर्घटना दावा, चेक अनादरण, राजीनामा योग्य आपराधिक एवं दीवानी प्रकरणों सहित विभिन्न मामलों का निराकरण आपसी सहमति से किया जाता है। इसके साथ ही बैंकों की ऋण वसूली, विद्युत एवं दूरभाष बिल बकाया, नगर पालिका के संपत्ति कर और जल कर से संबंधित प्रकरणों का भी निपटारा किया गया।
कार्यक्रम में कलेक्टर श्रीमती अंजू पवन भदौरिया ने नेशनल लोक अदालत के आयोजन की सराहना करते हुए इसे न्याय सुलभता की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया तथा इसकी सफलता के लिए सभी को शुभकामनाएं दीं।
लोक अदालत के शुभारंभ कार्यक्रम में तृतीय जिला न्यायाधीश श्री कमलेश कुमार सोनी, द्वितीय जिला न्यायाधीश श्री शिवकुमार कौशल, प्रथम जिला न्यायाधीश श्री रविंद्र गुप्ता, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट श्री गिरजेश कुमार सनोडिया, न्यायाधीश/सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण श्री आशीप कुमार केशरवानी, न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी श्री आर.पी. सिंह, श्रीमती कमला उइके, श्री उत्कर्ष राज सोनी एवं सुश्री रिया डहेरिया सहित अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष श्री यू.के. पटेरिया, कर्मचारी संघ के अध्यक्ष श्री भीम प्रकाश रामटेके, डिफेंस काउंसिल टीम के अधिवक्तागण, न्यायालयीन कर्मचारी, विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारी, बैंक प्रतिनिधि तथा पक्षकार उपस्थित रहे।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव श्री आशीप कुमार केशरवानी ने बताया कि नेशनल लोक अदालत में विभिन्न न्यायालयों में लंबित कुल 259 प्रकरणों का आपसी समझौते से निराकरण किया गया, जिनमें 82 लाख 40 हजार 455 रुपये की राशि का अवार्ड पारित हुआ। वहीं प्री-लिटिगेशन श्रेणी के 74 प्रकरणों का भी निराकरण किया गया, जिनसे 18 लाख 49 हजार 579 रुपये की राशि संबंधित विभागों को प्राप्त हुई।
इस प्रकार नेशनल लोक अदालत के माध्यम से कुल मिलाकर 1 करोड़ 9 हजार 34 रुपये की राशि के अवार्ड पारित किए गए। अधिकारियों ने बताया कि लोक अदालत की सफलता में न्यायाधीशों, अधिवक्ताओं, पक्षकारों तथा विभिन्न विभागों के अधिकारियों-कर्मचारियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।








