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सरकारी धन की लूट: विक्रमपुर पंचायत में 13.66 लाख की अनियमितता, दोषी सरपंच-सचिव से होगी वसूली!

akvlive.in

Published

डिंडौरी न्यूज। जिला पंचायत डिंडौरी के मुख्य कार्यपालन अधिकारी एवं विहित प्राधिकारी (पंचायत) दिव्यांशु चौधरी ने ग्राम पंचायत विक्रमपुर में वित्तीय अनियमितताओं के मामले में सख्त आदेश जारी करते हुए सरपंच और तत्कालीन सचिव से कुल 13,66,518 रुपये की वसूली के निर्देश दिए हैं। यह आदेश 5 मार्च 2026 को पारित किया गया।

गौरतलब है कि इस पूरे मामले को लेकर मध्यभूमि न्यूज पोर्टल द्वारा ग्राम पंचायत विक्रमपुर में वित्तीय अनियमितता और शासन की राशि के दुरुपयोग का मामला प्रमुखता से उजागर किया गया था। समाचार प्रकाशित होने के बाद जिला प्रशासन ने मामले को संज्ञान में लेते हुए जांच के आदेश दिए, जिसके बाद जनपद स्तर पर जांच कराई गई। जांच में वित्तीय अनियमितताओं और नियमों के उल्लंघन का बड़ा मामला सामने आया।

प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम पंचायत विक्रमपुर में वित्तीय वर्ष 2022-23 से 2024-25 के दौरान 15वें वित्त आयोग एवं 5वें वित्त आयोग की राशि के उपयोग में शासन के दिशा-निर्देशों के विपरीत व्यय किए जाने की शिकायत दर्ज की गई थी। इसके बाद जनपद स्तरीय जांच समिति द्वारा 2 जनवरी 2026 को जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया, जिसमें कई अनियमितताएं पाई गईं। जांच में पाया गया कि ग्राम पंचायत में अकस्मिक एवं अन्य मद में शासन द्वारा निर्धारित 10 प्रतिशत सीमा से अधिक राशि खर्च की गई।

वर्षवार अनियमित व्यय इस प्रकार पाया गया—

– वित्तीय वर्ष 2022-23 में 1,85,262 रुपये का अधिक व्यय

– वित्तीय वर्ष 2023-24 में 5,61,774 रुपये का अधिक व्यय

– वित्तीय वर्ष 2024-25 में 6,19,482 रुपये का अधिक व्यय

इस प्रकार कुल 13,66,518 रुपये की राशि शासन के नियमों के विपरीत खर्च होना पाया गया। जांच रिपोर्ट के आधार पर यह राशि सरपंच रामनारायण धुर्वे और तत्कालीन सचिव तीरथ प्रसाद गोसाई से बराबर-बराबर 6,83,259 रुपये वसूल करने का प्रस्ताव रखा गया।

सुनवाई के दौरान दोनों अनावेदकों को जांच प्रतिवेदन की प्रति उपलब्ध कराते हुए अपने पक्ष में दस्तावेज प्रस्तुत करने का अवसर दिया गया। 13 फरवरी 2026 को दोनों ने संयुक्त रूप से लिखित जवाब प्रस्तुत किया, लेकिन अपने पक्ष में कोई ठोस दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सके। प्रकरण के परीक्षण में यह भी पाया गया कि नल-जल योजना के अंतर्गत बिना प्रशासकीय एवं तकनीकी स्वीकृति के कार्य कराए गए और नियमों के विपरीत राशि का आहरण किया गया। इसे शासन की राशि का दुरुपयोग मानते हुए दोनों को दोषी पाया गया।

इसके आधार पर मध्यप्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम 1993 की धारा 89 के तहत सरपंच और सचिव की देयता निर्धारित करते हुए 13,66,518 रुपये की वसूली का आदेश दिया गया है। आदेश में कहा गया है कि 7 दिवस के भीतर राशि जमा नहीं करने पर धारा 92 तथा म.प्र. भू-राजस्व संहिता के प्रावधानों के तहत वसूली की कार्रवाई की जाएगी। मुख्य कार्यपालन अधिकारी एवं विहित प्राधिकारी (पंचायत) दिव्यांशु चौधरी द्वारा आदेश पारित कर प्रकरण को नस्तीबद्ध कर दिया गया है।

Chetram Rajpoot

चेतराम राजपूत मध्यभूमि के बोल समाचार पत्र के संपादक हैं। 2013 से इस दायित्व का निर्वहन कर रहे हैं। निष्पक्ष और निर्भीक पत्रकारिता के प्रति उनकी प्रतिबद्धता ने madhyabhoomi.in को विश्वसनीय समाचार स्रोत बनाया है, जो मुख्यधारा की मीडिया से अलग, विकास, समानता, आर्थिक और सामाजिक न्याय जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर केंद्रित है। हम सच्चाई और पारदर्शिता में विश्वास रखते हैं। मीडिया की स्वतंत्रता और निष्पक्षता को बनाए रखने के लिए सतत प्रयासरत हैं। बेखौफ कलम... जो लिखता है बेलिबास सच..

Chetram Rajpoot

चेतराम राजपूत मध्यभूमि के बोल समाचार पत्र के संपादक हैं। 2013 से इस दायित्व का निर्वहन कर रहे हैं। निष्पक्ष और निर्भीक पत्रकारिता के प्रति उनकी प्रतिबद्धता ने madhyabhoomi.in को विश्वसनीय समाचार स्रोत बनाया है, जो मुख्यधारा की मीडिया से अलग, विकास, समानता, आर्थिक और सामाजिक न्याय जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर केंद्रित है। हम सच्चाई और पारदर्शिता में विश्वास रखते हैं। मीडिया की स्वतंत्रता और निष्पक्षता को बनाए रखने के लिए सतत प्रयासरत हैं। बेखौफ कलम... जो लिखता है बेलिबास सच..