होम राज्य मध्यप्रदेश छत्तीसगढ़़ क्राइम न्यूज इंटरनेशनल न्यूज कोर्ट न्यूज राजनीति संसदीय संपादकीय अर्थ जगत हेल्थ शिक्षा खेल विज्ञान

MP के 55 जिलों में मनरेगा कर्मियों को 4 माह से मानदेय नहीं: 313 जनपद और 23 हजार ग्राम पंचायतों का अमला प्रभावित

akvlive.in

Published

– घरेलू बजट गड़बड़ाया, परिजन त्रस्त; आवंटन के अभाव में हजारों कर्मचारियों को मानदेय का इंतजार

डिंडौरी न्यूज। एक ओर जहां होली को लेकर प्रदेशभर में उत्साह और उल्लास का माहौल है, वहीं दूसरी ओर महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) से जुड़े हजारों कर्मचारियों के लिए इस वर्ष का रंगोत्सव फीका साबित हो रहा है। जानकारी के अनुसार मध्यप्रदेश के 55 जिलों की 313 जनपद पंचायतों और लगभग 23 हजार ग्राम पंचायतों में योजना के क्रियान्वयन के लिए परियोजना अधिकारी, लेखा अधिकारी, अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी, उपयंत्री एवं रोजगार सहायक सहित विभिन्न पदों पर कर्मचारी कार्यरत हैं।

बताया जा रहा है कि आवंटन के अभाव में इन कर्मचारियों को विगत चार महीनों से मानदेय का भुगतान नहीं हो सका है। वेतन न मिलने से न केवल त्यौहार की खुशियां प्रभावित हुई हैं, बल्कि कर्मचारियों के घरेलू बजट भी पूरी तरह से चरमरा गए हैं। कई कर्मियों ने बताया कि बच्चों की फीस, राशन, दवाइयों और अन्य आवश्यक खर्चों को लेकर गंभीर परेशानियां खड़ी हो गई हैं।

– बढ़ता आक्रोश, गहराती आर्थिक चिंता

लंबे समय से भुगतान लंबित रहने के कारण मनरेगा कर्मियों में आक्रोश व्याप्त है। उनका कहना है कि नियमित कार्य करने के बावजूद मानदेय में देरी से मानसिक और आर्थिक दबाव लगातार बढ़ रहा है। परिजनों को भी आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ रहा है, जिससे पारिवारिक माहौल प्रभावित हो रहा है।

– पहले भी उठा था मुद्दा

मनरेगा मजदूरों और कर्मचारियों के लंबित भुगतान का मुद्दा पूर्व में भी प्रमुखता से उठ चुका है। डिंडौरी विधायक ओमकार सिंह मरकाम ने इस संबंध में विधानसभा में धरना-प्रदर्शन किया था। इतना ही नहीं, जिला मुख्यालय डिंडौरी में प्रतीकात्मक रूप से भीख मांगकर विरोध दर्ज कराया था, ताकि सरकार का ध्यान इस गंभीर समस्या की ओर आकर्षित हो सके। इसके बावजूद मजदूरों, सप्लायरों और अब कर्मचारियों के भुगतान की स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हो पाया है।

त्योहार पर मनरेगा कर्मी मायूस..!

रंगों के पर्व पर जहां हर घर में खुशियां बिखरनी चाहिए थीं, वहीं मनरेगा कर्मियों के घरों में मायूसी छाई हुई है। कर्मचारियों ने शासन से शीघ्र आवंटन जारी कर लंबित मानदेय का भुगतान करने की मांग की है, ताकि वे भी सम्मानपूर्वक अपने परिवार के साथ त्योहार मना सकें। प्रदेशभर में फैली इस समस्या के समाधान की ओर अब सभी की निगाहें शासन-प्रशासन पर टिकी हैं।

Chetram Rajpoot

चेतराम राजपूत मध्यभूमि के बोल समाचार पत्र के संपादक हैं। 2013 से इस दायित्व का निर्वहन कर रहे हैं। निष्पक्ष और निर्भीक पत्रकारिता के प्रति उनकी प्रतिबद्धता ने madhyabhoomi.in को विश्वसनीय समाचार स्रोत बनाया है, जो मुख्यधारा की मीडिया से अलग, विकास, समानता, आर्थिक और सामाजिक न्याय जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर केंद्रित है। हम सच्चाई और पारदर्शिता में विश्वास रखते हैं। मीडिया की स्वतंत्रता और निष्पक्षता को बनाए रखने के लिए सतत प्रयासरत हैं। बेखौफ कलम... जो लिखता है बेलिबास सच..

Chetram Rajpoot

चेतराम राजपूत मध्यभूमि के बोल समाचार पत्र के संपादक हैं। 2013 से इस दायित्व का निर्वहन कर रहे हैं। निष्पक्ष और निर्भीक पत्रकारिता के प्रति उनकी प्रतिबद्धता ने madhyabhoomi.in को विश्वसनीय समाचार स्रोत बनाया है, जो मुख्यधारा की मीडिया से अलग, विकास, समानता, आर्थिक और सामाजिक न्याय जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर केंद्रित है। हम सच्चाई और पारदर्शिता में विश्वास रखते हैं। मीडिया की स्वतंत्रता और निष्पक्षता को बनाए रखने के लिए सतत प्रयासरत हैं। बेखौफ कलम... जो लिखता है बेलिबास सच..