– हर दिन 216 करोड़ का कर्ज़! बजट सत्र में सरकार पर बरसा विपक्ष
मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के तीसरे दिन प्रदेश पर लगातार बढ़ते कर्ज़ को लेकर सियासी तापमान तेज हो गया। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंगार के नेतृत्व में कांग्रेस विधायक दल ने विधानसभा परिसर में पोस्टर-बैनर के साथ सांकेतिक प्रदर्शन किया और मोहन यादव सरकार के बजट पर तीखा हमला बोला।
कांग्रेस ने सरकार के 4.38 लाख करोड़ रुपये के बजट को “कर्ज़ आधारित बजट” करार देते हुए आरोप लगाया कि भाजपा सरकार की नीतियों के कारण प्रदेश पर कुल कर्ज़ का बोझ 6 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि सरकार ने यह नहीं बताया कि प्रदेश के हर नागरिक पर 60 हजार रुपये से अधिक का कर्ज़ है और किसानों पर लाखों रुपये का भार है।

विपक्ष का दावा है कि प्रदेश की कुल आय का 16 प्रतिशत हिस्सा केवल कर्ज़ के ब्याज और उस पर लगने वाले ब्याज के भुगतान में खर्च हो रहा है, जो कई विभागों के बजट से भी अधिक है। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि पिछले वित्तीय वर्ष में सरकार ने 28,636 करोड़ रुपये ब्याज के रूप में अदा किए, जबकि बीते पांच वर्षों में 1.16 लाख करोड़ रुपये सिर्फ ब्याज भुगतान में खर्च किए गए।
26 माह में 1.69 लाख करोड़ का कर्ज़
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि मोहन यादव सरकार ने अपने 26 माह के कार्यकाल में 1.69 लाख करोड़ रुपये का कर्ज़ लिया है। उनके अनुसार, औसतन हर माह 6,500 करोड़ और प्रतिदिन लगभग 216 करोड़ रुपये का कर्ज़ लिया जा रहा है। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि यह कर्ज़ विकास कार्यों के बजाय “सरकारी प्रचार-प्रसार और पार्टी गतिविधियों” पर खर्च किया जा रहा है।
“कृषिक कल्याण वर्ष” पर सवाल
सरकार द्वारा वर्ष 2026 को ‘कृषिक कल्याण वर्ष’ घोषित किए जाने पर भी विपक्ष ने सवाल उठाए। कांग्रेस का कहना है कि किसानों के लिए ठोस बजटीय प्रावधान स्पष्ट नहीं किए गए हैं। साथ ही खाद आपूर्ति निगम, मंडी बोर्ड, बिजली कंपनियों और अन्य राज्य उपक्रमों के घाटे में होने का मुद्दा भी उठाया गया।
ग्लोबल इन्वेस्टर समिट पर घेरा
विपक्ष ने ग्लोबल इन्वेस्टर समिट में 33 लाख करोड़ रुपये के निवेश दावों पर भी सवाल खड़े किए। कांग्रेस ने मांग की कि पिछली सात समिट में वास्तविक निवेश और रोजगार के आंकड़े सार्वजनिक किए जाएं।
साथ ही सरकार पर आरोप लगाया गया कि प्रदेश की बिजली, कोयला, सोलर ऊर्जा, कृषि क्षेत्र और एयरपोर्ट जैसी परिसंपत्तियों को निजी हाथों, विशेषकर बड़े औद्योगिक समूहों को सौंपने की तैयारी की जा रही है।
शहरी सुविधाओं और जल संकट पर हमला
इंदौर सहित अन्य शहरों में पेयजल की गुणवत्ता को लेकर भी विपक्ष ने सरकार को घेरा। कांग्रेस का दावा है कि स्वच्छता के लिए प्रसिद्ध शहरों में भी जल शुद्धता को लेकर गंभीर सवाल हैं और जल ऑडिट नहीं कराया गया। स्मार्ट सिटी परियोजनाओं पर खर्च हुए अरबों रुपये के बावजूद अपेक्षित परिणाम न मिलने का आरोप भी लगाया गया।
“जनता पर टैक्स का बोझ”
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि प्रदेश का मध्यम वर्ग प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष करों के रूप में अपनी आय का बड़ा हिस्सा चुका रहा है, जबकि बदले में स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क और रोजगार के क्षेत्र में संतोषजनक सुविधाएं नहीं मिल रही हैं।
सरकार से जवाब की मांग
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंगार ने सरकार से पूछा कि बढ़ते कर्ज़ को नियंत्रित करने और वित्तीय स्थिति सुधारने के लिए ठोस रणनीति क्या है। उन्होंने कहा कि यदि यही स्थिति रही तो प्रदेश आर्थिक संकट की ओर बढ़ सकता है।
विधानसभा परिसर में हुए इस प्रदर्शन ने बजट सत्र के तीसरे दिन को पूरी तरह राजनीतिक रंग दे दिया। आने वाले दिनों में सत्ता और विपक्ष के बीच इस मुद्दे पर और तीखी बहस की संभावना है।








