– डिंडौरी में धान खरीदी की समय-सीमा बढ़ाने की मांग तेज
डिंडौरी न्यूज । जिले में धान खरीदी की निर्धारित समय-सीमा के बीच उत्पन्न अव्यवस्थाओं से जूझ रहे किसानों के लिए राहत की आवाज बुलंद करते हुए क्षेत्रीय विधायक एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री ओंकार सिंह मरकाम ने शासन का ध्यान आकृष्ट किया है। उन्होंने खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग, मध्यप्रदेश शासन के प्रमुख सचिव को पत्र लिखकर डिंडौरी जिले में धान खरीदी की अंतिम तिथि बढ़ाने की मांग की है।
विधायक मरकाम ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि शासन द्वारा प्रदेशभर में धान खरीदी की अंतिम तिथि 31 जनवरी 2026 निर्धारित की गई है, लेकिन डिंडौरी जिले की वास्तविक स्थिति इससे बिल्कुल भिन्न है। जिले में 9 जनवरी 2026 से अधिकांश उपार्जन केंद्रों पर टोकन वितरण और खरीदी की प्रक्रिया लगभग ठप पड़ी हुई है, जिससे हजारों किसान अब तक अपना धान नहीं बेच पाए हैं।
उन्होंने बताया कि कई खरीदी केंद्रों पर स्लॉट बुकिंग अचानक बंद, परिवहन व्यवस्था में भारी अव्यवस्था, ट्रकों की कमी और प्रशासनिक समन्वय के अभाव के चलते किसान दिन-रात परेशान हो रहे हैं। कई किसानों को बार-बार केंद्रों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं, वहीं धान खुले में पड़े रहने से उसके खराब होने का भी खतरा बढ़ गया है।
विधायक मरकाम ने चेताया कि यदि मौजूदा परिस्थितियों में समय-सीमा समाप्त हो गई, तो बड़ी संख्या में किसान समर्थन मूल्य पर धान बेचने से वंचित रह जाएंगे, जिससे उन्हें गंभीर आर्थिक नुकसान झेलना पड़ेगा।
उन्होंने शासन से आग्रह किया है कि डिंडौरी जिले के लिए धान खरीदी की समय-सीमा कम से कम 3 से 4 दिन बढ़ाई जाए, ताकि सभी पात्र किसानों का धान खरीदा जा सके।
इस मुद्दे को गंभीरता से उठाते हुए विधायक ओंकार सिंह मरकाम ने राजधानी भोपाल में संबंधित वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात कर व्यक्तिगत रूप से पत्र सौंपा और जिले की जमीनी हकीकत से अवगत कराया।
उन्होंने स्पष्ट किया कि डिंडौरी एक आदिवासी बहुल, दूरस्थ एवं भौगोलिक रूप से कठिन जिला है, जहां तकनीकी, नेटवर्क और परिवहन संबंधी समस्याएं आम हैं। ऐसे में समय-सीमा में लचीलापन दिखाना किसानों के हित में बेहद जरूरी है।
विधायक मरकाम ने कहा कि यदि समय रहते शासन द्वारा निर्णय नहीं लिया गया, तो किसानों में गहरा असंतोष और आक्रोश फैल सकता है। उन्होंने शासन से अपेक्षा की है कि वह संवेदनशीलता दिखाते हुए शीघ्र सकारात्मक निर्णय ले, ताकि जिले के अन्नदाता राहत की सांस ले सकें।








