डिंडौरी। जिले में धान खरीदी व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। नर्मदा राइस मिल स्थित धान खरीदी केंद्र पर वारदाना (बारदाना) नहीं मिलने से नाराज किसानों ने जबलपुर–अमरकंटक मुख्य मार्ग पर सड़क जाम कर दिया। यह घटना केवल किसानों के आक्रोश की अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि प्रशासनिक तैयारियों की गंभीर कमी को भी उजागर करती है।
धान खरीदी शासन की प्राथमिक योजनाओं में शामिल है, जिसका उद्देश्य किसानों को उनकी उपज का समय पर और उचित मूल्य दिलाना है। लेकिन जब खरीदी केंद्रों पर आवश्यक संसाधन ही उपलब्ध न हों, तो यह योजना किसानों के लिए राहत नहीं, बल्कि परेशानी का कारण बन जाती है। सड़क जाम जैसी स्थिति यह बताती है कि किसानों की बात सुनने के लिए उन्हें मजबूरन कठोर कदम उठाने पड़ रहे हैं।
सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि वारदाना जैसी बुनियादी आवश्यकता की कमी पहले से अनुमानित की जा सकती थी। इसके बावजूद समय रहते व्यवस्था न करना, सीधे तौर पर प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है। इसका खामियाजा न केवल किसानों को, बल्कि आम नागरिकों को भी भुगतना पड़ा, क्योंकि मुख्य मार्ग पर जाम से यातायात प्रभावित हुआ।
अब आवश्यकता है कि जिला प्रशासन तात्कालिक समाधान के साथ-साथ दीर्घकालीन व्यवस्था पर भी गंभीरता से काम करे। किसानों को भरोसा दिया जाना चाहिए कि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा उत्पन्न नहीं होगी। साथ ही जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करना भी जरूरी है। किसान अन्नदाता है, बाधा नहीं। यदि उनकी समस्याओं को समय पर सुना और सुलझाया जाए, तो सड़क पर उतरने की नौबत ही नहीं आएगी।









