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Dindori Corruption News:बिना निर्माण निकाली राशि, रोजगार सहायक पर लटकी कार्रवाई की तलवार

रिपोर्ट: Chetram Rajpoot February 21, 2026

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– 15 दिवस के भीतर 1.33 लाख रु जमा करने के आदेश अन्यथा अनुशासनात्मक कार्यवाही की चेतावनी

डिंडौरी न्यूज । जनपद पंचायत समनापुर की ग्राम पंचायत मारगांव में मनरेगा योजना के तहत हितग्राही मूलक चैकडेम निर्माण कार्य में बगैर कार्य कराए फर्जी मस्टर जारी करने के मामले में जिला पंचायत सीईओ ने शिकंजा कसा है। मनरेगा के तहत स्वीकृत चैकडेम हितग्राही बेयान बाई, जमुना बाई और तुलादास मोदी के नाम पर स्वीकृत निर्माण कार्य स्थल पर जब सामाजिक अंकेक्षण टीम ने भौतिक सत्यापन किया, तो मौके पर कोई निर्माण कार्य नहीं पाया गया। इसके बावजूद रोजगार सहायक ने सरपंच, सचिव को अंधेरे में रखकर फर्जी मस्टर जारी करते हुए ₹1,33,270 की शासकीय राशि का दुरुपयोग किया गया।

सामाजिक अंकेक्षण से खुली परतें

मध्यप्रदेश सामाजिक संपरीक्षा समिति, भोपाल के निर्देश और कलेक्टर डिण्डौरी के आदेश पर वित्तीय वर्ष 2021-22, 2022-23 एवं 2023-24 के मनरेगा कार्यों का सामाजिक अंकेक्षण कराया गया। जांच के बाद जनपद स्तर पर समिति गठित कर विस्तृत प्रतिवेदन तैयार किया गया, जिसमें स्पष्ट हुआ कि कार्य कराए बिना ही मस्टर रोल जारी कर भुगतान दर्शाया गया था।

– फर्जी मस्टर जारी करने वाले रोजगार सहायक जिम्मेदार

जांच में पाया गया कि तत्कालीन ग्राम रोजगार सहायक श्री कमलेश धनंजय ने यूजर आईडी और पासवर्ड का उपयोग करते हुए नियम विरुद्ध तरीके से मस्टर रोल जारी कर राशि भुगतान की गई हैं । सुनवाई के दौरान उन्हें अपने पक्ष में दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए पांच अवसर दिए गए, लेकिन वे कोई ठोस साक्ष्य पेश नहीं कर सके।

कार्यालय ग्राम पंचायत मारगाँव

प्रारंभ में सरपंच अमरीश सैयाम और तत्कालीन सचिव दुर्गेश बरोतिया से भी समान हिस्सेदारी में वसूली का प्रस्ताव था, लेकिन सामग्री मद में भुगतान न होने और प्रत्यक्ष संलिप्तता सिद्ध न होने पर उन्हें प्रकरण से मुक्त कर दिया गया।

– 15 दिवस में राशि जमा करने के आदेश, अन्यथा कार्रवाई तय 

मामले की सुनवाई म.प्र. पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम 1993 की धारा 89 और 92 के तहत की गई। जिला पंचायत डिण्डौरी के मुख्य कार्यपालन अधिकारी एवं विहित प्राधिकारी दिव्यांशु चौधरी ने 20 फरवरी 2026 को आदेश जारी करते हुए ₹1,33,270 की संपूर्ण राशि ग्राम रोजगार सहायक से भू-राजस्व बकाया की भांति वसूलने के निर्देश दिए हैं।

आदेश में स्पष्ट किया गया है कि 15 दिनों के भीतर राशि जमा न करने पर संबंधित के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की जाएगी। कार्रवाई ने यह संदेश दिया है कि मनरेगा जैसी जनकल्याणकारी योजना में गड़बड़ी करने वालों को किसी भी स्तर पर बख्शा नहीं जाएगा। सामाजिक अंकेक्षण की प्रक्रिया ने एक बार फिर साबित किया है कि पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन सतर्क है।

एडीटर

Chetram Rajpoot

चेतराम राजपूत ‘मध्यभूमि के बोल’ के संपादक हैं और दो दशक से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। स्थानीय मुद्दों, भ्रष्टाचार के खुलासे और जमीनी खोजी पत्रकारिता के लिए उनकी पहचान है।...

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