डिंडौरी। कुटुंब न्यायालय में बुधवार को पारिवारिक सौहार्द और मानवीय संवेदनाओं का सशक्त उदाहरण देखने को मिला। न्यायालय में पारिवारिक विवादों से जुड़े कुल 35 प्रकरणों की सुनवाई निर्धारित थी, जिनमें से 25 मामलों में पति-पत्नी ने आपसी सहमति से राजीनामा कर अपने मतभेद भुलाए और साथ जीवन बिताने का संकल्प लिया।
सुनवाई के बाद न्यायालय परिसर में भावुक माहौल देखने को मिला। दंपतियों ने एक-दूसरे को माला पहनाकर फिर से साथ रहने की कसमें खाईं। इस अवसर पर कुटुंब न्यायालय के न्यायाधीश श्री मुन्ना लाल राठौर, सदस्य श्री हेमंत पद्माकर एवं श्री जय सिंह ठाकुर की उपस्थिति में समझाइश और काउंसलिंग की प्रक्रिया संपन्न हुई, जिसने कई बिखरते परिवारों को फिर से जोड़ दिया।

राजीनामा करने वाले दंपतियों ने बताया कि आपसी संवाद की कमी और छोटी-छोटी गलतफहमियों के कारण विवाद गहराया था, लेकिन न्यायालय की पहल और परामर्श से उन्हें परिवार की अहमियत का अहसास हुआ। सभी ने बच्चों और परिवार के उज्ज्वल भविष्य को प्राथमिकता देने की बात कही।
माधोपुर निवासी नितेंद्र मरावी ने बताया कि उनका विवाह दस वर्ष पूर्व अनूपपुर जिले के मझौली गांव निवासी विद्या बाई से हुआ था। उनके दो बच्चे हैं, जिनमें बेटा मौसम कक्षा पांचवीं तथा बेटी मधु कक्षा पहली में पढ़ती है। करीब पांच महीने पहले हुए विवाद के बाद पत्नी बच्चों के साथ मायके चली गई थीं और कुटुंब न्यायालय में मामला दर्ज कराया गया था। कई चरणों की सुनवाई और समझाइश के बाद दोनों ने साथ रहने का निर्णय लिया।

पत्नी विद्या बाई ने कहा कि घर-परिवार में पति-पत्नी के बीच कभी-कभार नोक-झोंक होना स्वाभाविक है, लेकिन रिश्तों को तोड़ने के बजाय संवाद से सुलझाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अब वे दोनों मिलकर बच्चों का भविष्य संवारेंगे और समाज को यह संदेश देंगे कि पारिवारिक एकता ही समस्याओं का स्थायी समाधान है।
कुटुंब न्यायालय की इस पहल से न केवल 25 परिवारों को नई शुरुआत मिली, बल्कि समाज में यह सकारात्मक संदेश भी गया कि न्यायालय केवल विवाद निपटाने का ही नहीं, बल्कि रिश्तों को बचाने का भी सशक्त माध्यम है।









