दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंदर गुप्ता ने दिल्ली के मुख्य सचिव धर्मेंद्र IAS को एक पत्र लिखकर शिकायत की है कि सरकारी अधिकारी MLAs के फोन, कॉल्स और लेटर्स तक का जवाब नहीं देते। उन्होंने इस मामले को गंभीर बताते हुए सख्त निर्देश जारी करने को कहा है।
लेकिन दिलचस्प बात यह है कि जब अरविंद केजरीवाल सरकार ने इसी मुद्दे को उठाया था, तब BJP ने इसे मज़ाक में उड़ा दिया था! अब जब खुद BJP के नेता इसी समस्या का सामना कर रहे हैं, तो क्या यह उनकी अपनी ही चाल में फंसने जैसा नहीं है?

“जाके पैर ना फटे बिवाई, वो क्या जाने पीर पराई!”
क्या अब BJP मान लेगी कि दिल्ली में सरकारी अफसरों की मनमानी सच में एक बड़ी समस्या है? या फिर यह सिर्फ राजनीति का एक और नया मोड़ है?
