– दूधी मझौली पंचायत में ‘अन्य व्यय’ और कथित गैर-अनुमत्य कार्यों पर लाखों के भुगतान का मामला, दस्तावेजों से उठे सवाल
डिंडौरी न्यूज । जनपद पंचायत डिंडौरी अंतर्गत ग्राम पंचायत दूधी मझौली में 15वें वित्त आयोग के तहत प्राप्त राशि के उपयोग को लेकर गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। उपलब्ध दस्तावेजों और प्राप्त जानकारी के अनुसार वित्तीय वर्ष 2022-23 से 2026-27 की अवधि में पंचायत द्वारा विभिन्न मदों में किए गए भुगतानों को लेकर कार्ययोजना, वर्क आईडी, तकनीकी स्वीकृति और निर्धारित मद में व्यय किए जाने की प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
15वें वित्त आयोग की राशि के उपयोग के लिए केंद्र सरकार द्वारा पेयजल, स्वच्छता तथा अन्य अनुमत विकास कार्यों को प्राथमिकता देते हुए आबद्ध (Tied) और अनाबद्ध (Untied) मदों में राशि का प्रावधान किया गया है। पंचायतों में राशि का उपयोग स्वीकृत कार्यों और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार किए जाने की व्यवस्था है। ऐसे में यदि बिना कार्ययोजना अथवा निर्धारित स्वीकृति प्रक्रिया के भुगतान किए गए हैं, तो उनकी जांच की आवश्यकता बनती है।

– सीसी सड़क के नाम पर 5.41 लाख का भुगतान
उपलब्ध विवरण के अनुसार वित्तीय वर्ष 2022-23 में मदन के घर से जहांगीर के घर तक सीसी सड़क निर्माण के लिए करीब 5.88 लाख रुपये की स्वीकृति दर्शाई गई। इसके विरुद्ध सप्लायर आरके ट्रेडर्स के बिल के आधार पर एकमुश्त करीब 5.41 लाख रुपये का भुगतान किए जाने की जानकारी सामने आई है।
इस भुगतान को लेकर सबसे बड़ा सवाल मजदूरी भुगतान से जुड़ा है। उपलब्ध दस्तावेजों में उक्त निर्माण कार्य में मजदूरों को मजदूरी भुगतान किए जाने का स्पष्ट अभिलेख नहीं होने का दावा किया गया है। यदि निर्माण कार्य वास्तव में कराया गया है, तो सामग्री एवं मजदूरी से संबंधित अभिलेखों की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
– दर्जनों कार्यों की जीपीडीपी में नहीं होने का दावा
मामला केवल एक निर्माण कार्य तक सीमित नहीं बताया जा रहा है। पंचायत के ई-पंचायत पोर्टल पर दर्ज भुगतानों की पड़ताल में ऐसे कई कार्य सामने आने का दावा है, जिनका उल्लेख ग्राम पंचायत विकास योजना (GPDP) में नहीं होने की बात कही जा रही है।
इसके अलावा कुछ कार्यों की वर्क आईडी उपलब्ध नहीं होने का भी आरोप है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि संबंधित कार्य ग्राम पंचायत की स्वीकृत कार्ययोजना में शामिल नहीं थे अथवा उनके लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत वर्क आईडी नहीं बनाई गई थी, तो उनके नाम पर भुगतान किस आधार पर किया गया।
– ‘अन्य व्यय’ के नाम पर बड़ी रकम खर्च
उपलब्ध भुगतान विवरण में अन्य व्यय, कार्यालय व्यय तथा विभिन्न सामग्री एवं छोटे-बड़े कार्यों के नाम पर कई भुगतान दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। इनमें मटेरियल, नाडेप, पुताई सहित विभिन्न मदों में किए गए भुगतान शामिल बताए जा रहे हैं।
दस्तावेजों में क्रमशः 51,400, 16,158, 500, 4,500, 18,500, 52,510, 36,348, 32,400, 12,000, 22,000, 34,102, 31,000, 89,772, 89,400, 43,880, 26,500, 42,900, 89,500, 41,700, 16,960, 38,495, 83,000, 56,100, 40,600, 7,600, 2,400, 22,500, 12,750, 40,750, 68,258, 20,505, 34,339 और 40,500 रुपये सहित अनेक भुगतानों का उल्लेख है।

इन सभी भुगतानों की वास्तविक प्रकृति, स्वीकृति, कार्ययोजना में उनका समावेश, वर्क आईडी, तकनीकी स्वीकृति, माप पुस्तिका, बिल-वाउचर तथा कार्यस्थल पर वास्तविक निष्पादन की स्थिति की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि इनमें से कौन से भुगतान नियमसम्मत थे और किन भुगतानों में अनियमितता हुई।
– पंचायत की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवाल
15वें वित्त आयोग की राशि का उद्देश्य पंचायतों में मूलभूत सुविधाओं और स्थानीय विकास कार्यों को मजबूत करना है। ऐसे में यदि स्वीकृत कार्ययोजना से बाहर जाकर अथवा निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना राशि खर्च की गई है, तो इससे न केवल वित्तीय अनुशासन पर सवाल उठते हैं, बल्कि पंचायत स्तर पर विकास निधि के उपयोग की पारदर्शिता भी प्रभावित होती है।
दूधी मझौली पंचायत के मामले में सामने आए दस्तावेजों के आधार पर GPDP, ई-पंचायत पोर्टल, वर्क आईडी, तकनीकी स्वीकृति, प्रशासकीय स्वीकृति, माप पुस्तिका, बिल-वाउचर, सामग्री खरीदी और मजदूरी भुगतान सहित संबंधित अभिलेखों की जांच किए जाने की जरूरत दिखाई देती है।
