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निर्माण से मूल्यांकन तक सवालों में पुलिया, उपयंत्री निलंबित : सहायक यंत्री पर कार्रवाई कब?

एडीटर: Chetram Rajpoot September 24, 2026

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– 13.59 लाख की पुलिया में स्थल चयन से लेकर मूल्यांकन और सत्यापन तक सवाल, पहले कशिश नायक को भी दिया गया था कारण बताओ नोटिस

डिंडौरी/करंजिया। ग्राम पंचायत सैनगूढ़ा के ग्राम सरैहा में शिवनार नाले पर बनी करीब 13.59 लाख रुपये की पुलिया क्षतिग्रस्त होकर आवागमन के लिए अनुपयोगी हो गई। जिला प्रशासन ने मामले में ग्रामीण यांत्रिकी सेवा के उपयंत्री भवन प्रसाद भैना को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया, लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब निर्माण कार्य में स्थल चयन, निर्माण गुणवत्ता, मूल्यांकन और सत्यापन तक गंभीर कमियां पाई गईं, तो इन कार्यों की निगरानी और तकनीकी पर्यवेक्षण से जुड़े सहायक यंत्री कशिश नायक की जवाबदेही पर कार्रवाई कहां तक पहुंची? उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार इस प्रकरण में उपयंत्री के साथ सहायक यंत्री कशिश नायक और ग्राम पंचायत सचिव को भी कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था।

कलेक्टर द्वारा जारी निलंबन आदेश में स्वयं दर्ज है कि पुलिया का स्थल चयन निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुरूप नहीं किया गया, निर्माण निर्धारित मानकों के अनुसार नहीं कराया गया तथा कार्य के मूल्यांकन एवं एमआईएस के दौरान गुणवत्ता पर ध्यान नहीं दिया गया। आदेश में यह भी उल्लेख है कि पुलिया पूर्व में भी गुणवत्ताहीन निर्माण के कारण क्षतिग्रस्त हुई थी और मरम्मत के बावजूद पुनः क्षतिग्रस्त हो गई। मजदूरी मद में लगभग 1.86 लाख रुपये व्यय होने तथा सामग्री मद की 9.39 लाख रुपये की राशि के देयक के मूल्यांकन के बाद एमआईएस किए जाने का भी उल्लेख आदेश में है।

ऐसे में सवाल सीधा है—यदि मूल्यांकन और सत्यापन में गुणवत्ता की कमी पाई गई, तो केवल मूल्यांकन करने वाले उपयंत्री को प्रथम दृष्टया दोषी मानना पर्याप्त क्यों माना गया? सहायक यंत्री का पद ही तकनीकी पर्यवेक्षण, मार्गदर्शन और कार्यों की गुणवत्ता की निगरानी से जुड़ा है। यदि विभागीय अभिलेखों में सहायक यंत्री की भी जिम्मेदारी निर्धारित थी, तो उनके विरुद्ध समान रूप से तथ्यात्मक जांच और जवाबदेही तय किए जाने की आवश्यकता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

और यह सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि जिला पंचायत डिंडौरी स्वयं पूर्व में सहायक यंत्री कशिश नायक को कारण बताओ सूचना पत्र जारी कर चुकी है। पत्र क्रमांक क्र./जि.पं./स्था./VB-GRAMG/2026/1781, दिनांक 30.07.2026 में ग्राम पंचायत सेलवार में अमृत सरोवर निर्माण कार्य निर्धारित मापदंडों के विपरीत एवं गुणवत्ताहीन पाए जाने, निर्माण कार्य समय-सीमा में पूर्ण नहीं कराने तथा वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों के बावजूद कार्य पूर्ण नहीं कराने को लेकर उन पर शासकीय कर्तव्य के निर्वहन में लापरवाही एवं स्वेच्छाचारिता के आरोप में स्पष्टीकरण मांगा गया था।

यानी सवाल यह नहीं है कि किसी अधिकारी को दोषी घोषित कर दिया जाए। सवाल यह है कि जब एक ही अधिकारी के विरुद्ध अलग-अलग निर्माण कार्यों को लेकर विभागीय स्तर पर लगातार जवाबदेही के प्रश्न उठ रहे हों, तो क्या केवल कारण बताओ नोटिस जारी करना पर्याप्त है? और यदि वर्तमान पुलिया प्रकरण में उपयंत्री के विरुद्ध निलंबन जैसी कठोर कार्रवाई की गई है, तो सहायक यंत्री की भूमिका की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच क्यों नहीं की गई?

– तीन साल से अधिक का कार्यकाल, फिर भी स्थानांतरण पर रोक

कशिश नायक ने 18 अगस्त 2023 को डिंडौरी में पदभार ग्रहण किया था। उनके डिंडौरी में तीन वर्ष का कार्यकाल पूरा होने के बाद स्थानांतरण आदेश क्रमांक 33 के माध्यम से उन्हें डिंडौरी से जबलपुर स्थानांतरित किया गया था। हालांकि स्थानांतरण आदेश के संबंध में उच्च न्यायालय के समक्ष मामला पहुंचा और न्यायालय द्वारा, उपलब्ध विवरण के अनुसार, यदि याचिकाकर्ता को पहले ही कार्यमुक्त नहीं किया गया है तो स्थानांतरण आदेश का प्रभाव 45 दिनों अथवा अभ्यावेदन के निर्णय तक, जो पहले हो, स्थगित रखने का निर्देश दिया गया था।

आज की स्थिति में 18 अगस्त 2023 से 23 सितंबर 2026 तक उनका डिंडौरी में 3 वर्ष 36 दिन का कार्यकाल हो चुका है। ऐसे में प्रशासनिक स्तर पर यह भी सवाल उठता है कि स्थानांतरण से संबंधित न्यायालयीन निर्देश की अवधि और वर्तमान पदस्थापना की स्थिति का विभागीय स्तर पर क्या परीक्षण किया गया है।

– एक ही प्रकरण में कार्रवाई का पैमाना अलग क्यों?

पुलिया प्रकरण में विभागीय जांच के अनुसार स्थल चयन से लेकर निर्माण, मूल्यांकन और एमआईएस तक कई स्तरों पर सवाल सामने आए। इसके बावजूद अंतिम कार्रवाई में उपयंत्री को निलंबित कर दिया गया। दूसरी ओर सहायक यंत्री के संबंध में पूर्व में जारी कारण बताओ नोटिस और वर्तमान प्रकरण में उनकी भूमिका को देखते हुए यह जानना जरूरी है कि क्या उनकी जिम्मेदारी का पृथक निर्धारण किया गया, क्या उनका स्पष्टीकरण लिया गया और यदि लिया गया तो उसका निष्कर्ष क्या रहा?

जनता का सवाल किसी एक कर्मचारी को बचाने या किसी दूसरे को दोषी ठहराने का नहीं, बल्कि जवाबदेही की समान कसौटी का है। यदि कनिष्ठ अधिकारी के स्तर पर हुई तकनीकी चूक के लिए निलंबन उचित माना गया है, तो पर्यवेक्षण एवं सत्यापन की जिम्मेदारी वाले अधिकारियों की भूमिका की भी उसी गंभीरता से जांच होना चाहिए।

– पुराने आरोपों की भी निष्पक्ष जांच की मांग

सहायक यंत्री कशिश नायक को लेकर पूर्व में सरपंच संघ द्वारा कार्य आवंटन के बदले कथित रूप से धनराशि मांगने संबंधी आरोप लगाए जाने और ज्ञापन दिए जाने की बात भी सामने आई है। ऐसे आरोपों पर कोई आधिकारिक शिकायत या ज्ञापन विभागीय रिकॉर्ड में मौजूद है, तो प्रशासन को स्पष्ट करना चाहिए कि उस पर क्या जांच हुई और उसका परिणाम क्या रहा। वही सरपंच संघ ने शीघ्र कार्यवाहि नहीं करने पर अनिश्चितकालीन हड़ताल की बात कही है l

 

 

एडीटर

Chetram Rajpoot

चेतराम राजपूत ‘मध्यभूमि के बोल’ के संपादक हैं और दो दशक से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। स्थानीय मुद्दों, भ्रष्टाचार के खुलासे और जमीनी खोजी पत्रकारिता के लिए उनकी पहचान है।...

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