– एक के बाद एक किसानों के खेतों में पहुंचा हाथी, फसल बर्बाद होने से लाखों के नुकसान की आशंका; ग्रामीणों में दहशत
उमरिया। पनपथा क्षेत्र में इन दिनों जंगली हाथी की आवाजाही ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। बीती रात मंझौली और पनपथा गांव में पहुंचे हाथी ने खेतों में जमकर उत्पात मचाया और कई किसानों की खड़ी धान की फसल को रौंदकर बर्बाद कर दिया। हाथी के लगातार विचरण से जहां किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है, वहीं ग्रामीणों में रात के समय भय का माहौल बना हुआ है।
जानकारी के अनुसार, बीती रात करीब 9 बजे एक हाथी पनपथा क्षेत्र के मंझौली गांव में पहुंचा। हाथी ने किसान रामचरण सिंह के खेत में घुसकर खड़ी धान की फसल को रौंद दिया। देखते ही देखते खेत में तैयार हो रही फसल का बड़ा हिस्सा हाथी के पैरों तले बर्बाद हो गया। अचानक खेतों में हाथी की मौजूदगी से ग्रामीणों में भी अफरा-तफरी की स्थिति निर्मित हो गई।
इसके करीब दो घंटे बाद, रात लगभग 11 बजे हाथी मंझौली से लगे पनपथा गांव की ओर पहुंच गया। यहां भी हाथी ने किसानों के खेतों को अपना निशाना बनाया और खड़ी धान की फसल को भारी नुकसान पहुंचाया। बताया गया है कि हाथी ने पनपथा निवासी कन्हैया महोबिया, रामकिशोर सिंह और अर्जुन सिंह के खेतों में पहुंचकर धान की खड़ी फसल को पूरी तरह रौंद दिया।
– सटे हुए खेतों में मचाई तबाही
जिन किसानों की फसल को नुकसान पहुंचा है, उनके खेत लगभग एक-दूसरे से सटे हुए बताए जा रहे हैं। हाथी के लगातार विचरण के कारण किसानों को अपनी मेहनत से तैयार की गई फसल की सुरक्षा को लेकर चिंता सता रही है। किसानों का कहना है कि फसल बर्बाद होने से उन्हें सीधा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा और यदि हाथी की आवाजाही इसी तरह जारी रही तो आसपास के अन्य खेत भी इसकी चपेट में आ सकते हैं।
– फसल के साथ ग्रामीणों की सुरक्षा भी चिंता का विषय
हाथी के रात के समय गांव और खेतों के आसपास पहुंचने से ग्रामीणों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। ग्रामीणों का कहना है कि हाथी की गतिविधियां लगातार बनी रहने से खेतों में जाने और फसल की रखवाली करने में भी खतरा बना हुआ है। रातभर हाथी की आवाजाही से गांव में दहशत का माहौल है।
ग्रामीणों ने वन विभाग से हाथी की लगातार निगरानी करने, प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाने तथा किसानों की नष्ट हुई फसल का शीघ्र सर्वे कराकर उचित मुआवजा दिलाने की मांग की है। किसानों का कहना है कि वन्यजीवों के विचरण और फसल नुकसान की स्थिति में विभाग द्वारा समय रहते प्रभावी कदम उठाए जाएं, ताकि किसानों की मेहनत और आजीविका पर संकट न आए।
