– करोड़ों की जमीन के नामांतरण मामले में सीजेएम कोर्ट के आदेश पर कार्रवाई, पुलिस ने शुरू की जांच
डिंडौरी। पैतृक संपत्ति के नामांतरण और विक्रय में कथित फर्जीवाड़े के मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) न्यायालय के आदेश पर डिंडौरी पुलिस ने आवेदक के चाचा, चचेरे भाई, तत्कालीन पटवारी और तत्कालीन तहसीलदार के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। मामला डिंडौरी नगर और सुबखार क्षेत्र में स्थित करोड़ों रुपये मूल्य की पैतृक भूमि से जुड़ा हुआ है।
जानकारी के अनुसार डिंडौरी नगर के वार्ड क्रमांक-4 निवासी इन्द्रपाल उर्फ बबलू सोनपाली ने न्यायालय में परिवाद प्रस्तुत कर आरोप लगाया था कि उनके दादा स्वर्गीय बालमुकुंद सोनपाली की मृत्यु के बाद पैतृक संपत्ति को लेकर परिवार में विवाद चल रहा है। इस संपत्ति संबंधी दीवानी वाद तथा अपील वर्ष 2006 से उच्च न्यायालय में लंबित है।
परिवाद में आरोप लगाया गया है कि इसी दौरान वर्ष 2022 में उनके चाचा नंदलाल सोनपाली ने अपने पुत्र रोहित सोनपाली के साथ मिलकर उनकी दादी के नाम से कथित रूप से फर्जी वसीयत तैयार करवाई और उसके आधार पर डिंडौरी नगर की लगभग 3.245 हेक्टेयर तथा सुबखार स्थित 3.545 हेक्टेयर भूमि का नामांतरण अपने पक्ष में करा लिया।
– फर्जी हस्ताक्षर और शपथ पत्र तैयार करने का आरोप
आवेदक ने न्यायालय को बताया कि नामांतरण प्रक्रिया के दौरान उनके नाम से फर्जी हस्ताक्षर कर शपथ पत्र तैयार किया गया, जिसमें दर्शाया गया कि उन्हें नामांतरण से कोई आपत्ति नहीं है। जबकि उन्हें न तो सुनवाई की कोई सूचना दी गई और न ही वे कभी तहसीलदार के समक्ष उपस्थित हुए।
परिवाद में यह भी आरोप लगाया गया है कि तत्कालीन पटवारी हिरेन्द्र सूर्याम और तत्कालीन तहसीलदार गोविंदराम सलामे ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए राजस्व अभिलेखों में हेरफेर कर नामांतरण की प्रक्रिया पूर्ण कराई।
– पैतृक मकान और कुएं वाली जमीन को बताया गया खाली भूखंड
शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि डिंडौरी नगर स्थित जिस भूमि पर पैतृक मकान, कुआं एवं पुराने वृक्ष मौजूद हैं, उसे दानपत्र में खाली भूमि के रूप में दर्शाया गया। इतना ही नहीं, भूमि की श्रेणी में भी बदलाव किए जाने का आरोप लगाया गया है, ताकि बिना सक्षम अनुमति के उसका हस्तांतरण संभव हो सके।
– न्यायालय के आदेश के बाद दर्ज हुई एफआईआर
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय ने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 156(3) के तहत मामले की जांच के निर्देश दिए थे। न्यायालय के आदेश के बाद पुलिस ने नंदलाल सोनपाली, रोहित सोनपाली, तत्कालीन पटवारी हिरेन्द्र सूर्याम और तत्कालीन तहसीलदार गोविंदराम सलामे के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 318(4) के तहत अपराध पंजीबद्ध किया है। पुलिस का कहना है कि दस्तावेजों की जांच के दौरान यदि अन्य अपराधों के तथ्य सामने आते हैं तो मामले में अतिरिक्त धाराएं भी जोड़ी जाएंगी।
– “मेरी मां वर्षों से डिंडौरी नहीं आई, फिर भी बना दी गई नोटरी”
आवेदक बबलू उर्फ इन्द्रपाल सोनपाली ने दावा किया कि उनकी मां पंजाब में निवास करती हैं और वर्ष 2021 से डिंडौरी नहीं आई हैं। इसके बावजूद कथित रूप से एक फर्जी नोटरी तैयार कर यह दर्शाया गया कि उन्हें संपत्ति में किसी प्रकार का हिस्सा नहीं चाहिए और नामांतरण पर कोई आपत्ति नहीं है। इन्द्रपाल का आरोप है कि इस कथित फर्जी दस्तावेज का उपयोग पैतृक संपत्ति के नामांतरण और हस्तांतरण की प्रक्रिया को वैध दिखाने के लिए किया गया।
सिटी कोतवाली प्रभारी दुर्गा प्रसाद नगपुरे ने बताया कि न्यायालय के आदेश के पालन में चारों आरोपितों के विरुद्ध प्रकरण दर्ज कर विवेचना प्रारंभ कर दी गई है। मामले से जुड़े दस्तावेजों और राजस्व अभिलेखों की जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद न्यायालय में अभियोग पत्र प्रस्तुत किया जाएगा।









