भोपाल । मध्यप्रदेश सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी, जवाबदेह और परिणाममुखी बनाने की दिशा में बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग ने वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारियों के व्यापक फेरबदल का आदेश जारी करते हुए 12 वरिष्ठ अधिकारियों का तत्काल प्रभाव से तबादला एवं नवीन पदस्थापना की है। इस प्रशासनिक बदलाव में कई जिलों के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) बदले गए हैं, जबकि कुछ अधिकारियों को प्रभारी के रूप में नई जिम्मेदारी सौंपी गई है।
स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार यह तबादले पूर्णतः प्रशासनिक आधार पर किए गए हैं। माना जा रहा है कि सरकार का उद्देश्य जिला स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी मजबूत करना, प्रशासनिक दक्षता बढ़ाना और आमजन को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना है।



– इन जिलों में बदले स्वास्थ्य प्रशासन के प्रमुख चेहरे
आदेश के अनुसार रतलाम, बड़वानी, ग्वालियर, झाबुआ, सीधी, टीकमगढ़, सिवनी और दमोह सहित कई जिलों में स्वास्थ्य प्रशासन की कमान नए अधिकारियों को सौंपी गई है।
डॉ. किरण वार्डिया को वरिष्ठ संयुक्त संचालक से मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, रतलाम बनाया गया।
डॉ. सरेखा जमरे को बड़वानी के CMHO पद से हटाकर क्षेत्रीय संचालक स्वास्थ्य सेवाएं, सागर कार्यालय में वरिष्ठ संयुक्त संचालक नियुक्त किया गया।
डॉ. मनीष सिंह सागर को प्रभारी CMHO ग्वालियर की जिम्मेदारी सौंपी गई।
डॉ. सचिन श्रीवास्तव को प्रभारी CMHO पद से मुक्त कर जिला चिकित्सालय ग्वालियर में उनके मूल पद पर भेजा गया।
डॉ. मुनलाल चौपड़ा को प्रभारी CMHO झाबुआ बनाया गया।
डॉ. बी.एस. बघेल को उनके मूल पद जिला चिकित्सालय झाबुआ भेजा गया।
डॉ. अशोक खरे को प्रभारी CMHO सीधी नियुक्त किया गया।
डॉ. अमित चौधरी को प्रभारी CMHO टीकमगढ़ का दायित्व सौंपा गया।
डॉ. जयपाल सिंह ठाकुर को CMHO सिवनी से CMHO बड़वानी पदस्थ किया गया।
डॉ. पंकज दुबे को CMHO सिवनी बनाया गया। डॉ. राकेश राय को वर्तमान CMHO के सेवानिवृत्त होने के बाद प्रभारी CMHO दमोह का कार्यभार सौंपा जाएगा।
– सरकार का स्पष्ट संदेश—समय पर ज्वाइन करें, नहीं तो होगी कार्रवाई
आदेश में स्थानांतरित अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे सात दिनों के भीतर अपने नए पदस्थापना स्थल पर कार्यभार ग्रहण करें। कार्यभार ग्रहण की प्रक्रिया eHRMS पोर्टल पर दर्ज होने के बाद ही मान्य मानी जाएगी।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई अधिकारी स्थानांतरण आदेश की अवहेलना करता है, बिना अनुमति अवकाश पर जाता है अथवा समय पर कार्यभार ग्रहण नहीं करता है तो उसके विरुद्ध मध्यप्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
स्थानांतरण आदेश की प्रमुख शर्तें
विभाग ने सभी संबंधित आहरण एवं संवितरण अधिकारियों (DDO) को निर्देश दिए हैं कि सेवा पुस्तिका, एलपीसी (Last Pay Certificate) एवं अन्य आवश्यक अभिलेख समय पर संबंधित कार्यालय को उपलब्ध कराए जाएं। स्थानांतरण अवधि के दौरान अवकाश केवल सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) की अनुमति से ही मान्य होगा। संविदा, निलंबन, न्यायालयीन प्रकरण अथवा अनधिकृत अनुपस्थिति की स्थिति में संबंधित अधिकारी को कार्यमुक्त नहीं किया जाएगा।
– स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की दिशा में अहम कदम
प्रदेश सरकार का यह प्रशासनिक फेरबदल ऐसे समय में सामने आया है जब जिला अस्पतालों से लेकर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तक स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुदृढ़ बनाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। नए अधिकारियों की नियुक्ति से स्वास्थ्य योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन, अस्पतालों की निगरानी, चिकित्सा सुविधाओं की उपलब्धता तथा जनहित से जुड़े कार्यों में तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है।







