– डिंडौरी जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत बिजौरा का मामला
– केंद्र और राज्य सरकार की मंशा को लगा रहे पलीता
– सरपंच मानदेय, कर्मचारी मानदेय, किराना सामग्री सहित अन्य के नाम पर लाखों रुपए का खेल

डिंडौरी न्यूज। जिला मुख्यालय के समीपी ग्राम पंचायत बिजौरा के सरपंच, सचिव द्वारा शासन के नियम निर्देशों को ठेंगा दिखाते हुए बड़े पैमाने पर शासकीय राशि का बंदरबाट किए जाने का मामला सामने आया है, लेकिन सचिव मदन सिंह के राजनीतिक रसूख के आगे स्थानीय प्रशासन आंख बंद कर तमाशबीन बना हुआ है । दरअसल केंद्र और राज्य द्वारा वित्त पोषित पांचवे और 15 वें वित्त के तहत ग्राम पंचायत को प्राप्त आवंटित राशि से योजनाबद्ध (जीपीडीपी) तरीके से ग्राम पंचायतों में विकास कार्य कराए जाने हेतु समय समय पर मंत्रालय पंचायती राज मध्यप्रदेश द्वारा निर्देश जारी किए गए हैं। ग्राम पंचायत के करिंदे पंचायती राज मंत्रालय द्वारा जारी दिशा निर्देशों को ठेंगा दिखाते हुए अन्य व्यय के नाम पर खुलकर आवंटित राशि का दुरुपयोग कर रहे हैं।

मंत्रालय द्वारा जारी दिशा निर्देशों की किस तरह धज्जियां उड़ाई जा रही हैं इसकी बानगी जिला मुख्यालय के नजदीकी ग्राम पंचायत बिजौरा में देखा जा सकता है। ग्राम पंचायत के सरपंच, सचिव के द्वारा बगैर सक्षम स्वीकृति के मनमाने ढंग से अन्य व्यय और गैर अनुमत्य कार्यों के नाम पर धड़ल्ले से लाखों रुपए का भुगतान किया जा रहा है।

सूत्रों की माने तो बिजौरा में विकास के नाम पर सिर्फ कागजों में बिल बाउचर तैयार कर शासन को पलीता लगाई जा रही है, एक तरफ पंचायतों की जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए आवंटन – भुगतान, कार्यों का लेखा जोखा, कार्यों की प्रगति की तीन स्तरों पर फोटो जियो टैग करने के निर्देश है वहीं दूसरी तरफ बिजौरा सचिव मदन सिंह विकास कार्यों की जगह स्वयं की सेल्फी अपलोड कर रहे।

– नियमों की धज्जियां, अन्य व्यय के नाम पर लाखों का भुगतान..?
ग्राम पंचायत बिजौरा के सचिव मदन सिंह धुर्वे के द्वारा अन्य व्यय और गैर अनुमत्य कार्यों के नाम पर लाखों रुपए का बंदरबांट किए जाने का मामला सामने आया है। दरअसल ग्राम पंचायत द्वारा 2021 में जीपीडीपी में दर्ज प्रस्तावित 09 कार्यों में से महज 5 कार्य प्रारंभ किए गए,2022 में प्रस्तावित 23 कार्यों में एक भी प्रारंभ नहीं है, इसी तरह 2023 में प्रस्तावित 47 कार्यों में से सिर्फ एक काम प्रारंभ किया गया है, 2024 में प्रस्तावित 42 कार्यों में से 3 कार्य और 2025 में प्रस्तावित 40 कार्यों में से एक भी कार्य प्रारंभ नहीं कराए गए लेकिन उपरोक्त अवधि में 15 वें और 5वें वित्त के तहत आवंटित राशि का अन्य कार्यों के नाम पर अंधाधुंध भुगतान करते हुए शासन को पलीता लगाया है।










