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सरकारी नौकरी, निजी स्कूल का कारोबार! खुद ही मकान मालिक, खुद ही किराएदार: मान्यता पर उठे गंभीर सवाल

एडीटर: Chetram Rajpoot October 29, 2026

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डिंडौरी । आदिवासी बाहुल्य डिंडौरी जिले में शिक्षा का बाजारीकरण जोरों पर है, मध्य प्रदेश शासन के आदेश निर्देश का घोर उपेक्षा और अवहेलना कर बगैर बुनियादी संसाधनों के निजी स्कूल का संचालन किया जा रहा है। भोले भाले गरीबी से पीड़ित आदिवासी को अच्छी और गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने का झांसा देकर शिक्षण संस्थान शिक्षा काव्यापार कर रहे हैं।निजी स्कूल संचालकों पर शिक्षा विभाग के अधिकारी अत्यधिक मेहरबान होकर शिक्षण संस्थान के लिए मूलभूत संसाधनों की उपलब्धता का मौका परीक्षण और भौतिक सत्यापन किए बिना ही मनमानी ढंग से प्रसाद की तर्ज पर मान्यता बाँट रहे हैं। जिले में संचालित सैकड़ों निजी स्कूलों में न तो समुचित बैठक व्यवस्था है और न शौचालय, पेयजल और खेल मैदान जैसे जरूरी व्यवस्था, इसके बावजूद धड़ल्ले से शिक्षा का व्यापार जोर शोर से चल रहा है।

निजी विद्यालय संचालकों पर शिक्षा व्यवस्था का दुधारू पशु के तर्ज पर अतिरेक दोहन करने की मानसिकता किस कदर हावी है इसकी बानगी सामने आए मामले में देखी जा सकती है। जिले के समनापुर में शासकीय कर्मचारी होकर भी निजी विद्यालय का संचालन कर रहे हैं, । शिक्षा विभाग से प्राप्त दस्तावेजों के अनुसार समनापुर में संचालित निजी विद्यालय दिशा पैसेफिक स्कूल की मान्यता लेने में महिला एवं बाल विकास विभाग में कार्यरत पर्यवेक्षक द्वारा बड़ा खेल किये जाने का मामला सामने आया है, महिला एवं बाल विकास विभाग में कार्यरत पर्यवेक्षक श्रीमती स्वप्निल पूरी द्वारा शासकीय रिकॉर्ड में खुद की उप जीविका का साधन शिक्षका दर्शा कर निजी विद्यालय की मान्यता प्राप्त की गई है।

यद्यपि सरकारी अधिकारी/कर्मचारियों का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मूल पद पर कार्य करते हुए शासन से वेतन प्राप्त करने के साथ ही अन्य वैकल्पिक व्यापार , किसी संस्था में पद धारण करना दोहरे लाभ के श्रेणी में आता है। जो कि मध्यप्रदेश सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के प्रतिकूल है। सिविल सेवा आचरण नियम को ताक पर रख कर शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारी द्वारा शिक्षा व्यवस्था को व्यवसाय का साधन बना दिया गया।

– बगैर अनुशंसा डीपीसी ने जारी किया मान्यता

समनापुर में संचालित दिशा पैसेफिक स्कूल को मान्यता प्रदान करने हेतु समनापुर बीआरसी के द्वारा अनुशंसा नहीं की गई है,। शिक्षा विभाग से प्राप्त दस्तावेजों के अवलोकन से जाहिर हो रहा है कि तत्कालीन डीपीसी डिंडौरी राघवेंद्र मिश्रा ने संसाधनहीन संस्था दिशा पैसेफिक स्कूल को नियम कायदा को ताक पर रख कर एवं अपने पद के प्रभाव का दुरूपयोग कर 2025 से लेकर 2028 तक के लिए दिनांक 27/03/2025 को मान्यता प्रदान किया गया है। मान्यता देने वाले अधिकारी ने मान्यता देने में इतनी तत्परता दिखाई कि स्कूल का संचालक कौन है, भवन कहां है, उपलब्ध संसाधन, किराया नामा,निजी विद्यालय का संचालन की आवश्यक नियम शर्ते तक का परीक्षण करना भी उचित नहीं समझा।

– दस्तावेजों में धोखाधड़ी का खेल उजगर…?

राइट डायरेक्शन एजुकेशनल सोसायटी समनापुर के अध्यक्ष श्रीमती स्वप्निल पुरी द्वारा दिनांक 02/02/2025 को मान्यता हेतु ऑनलाइन पोर्टल में आवेदन दर्ज किया गया, जिसमें उन्होंने खुद को समिति का अध्यक्ष बताया है..अब सवाल यह है कि क्या सरकारी कर्मचारी लाभकारी संगठन के अध्यक्ष होकर क्या निजी विद्यालय का संचालन कर सकते हैं..?

राइट डायरेक्शन एजुकेशनल सोसायटी के सचिव दीपक गुप्ता द्वारा असिस्टेंट रजिस्ट्रार फर्म एवं सोसायटी जबलपुर के समक्ष दिनांक 03/01/25 को प्रस्तुत किए गए विद्यमान पदाधिकारियों की सूची में महिला एवं बाल विकास विभाग में कार्यरत पर्यवेक्षक श्रीमती स्वप्निल पुरी को समिति का अध्यक्ष बताया गया है, जिनकी मुख्य उपजीविका शिक्षिका दर्शाया गया है। इस तरह से समिति के सचिव के द्वारा रजिस्ट्रार के समक्ष समिति के विद्यमान पदाधिकारियों के जीविका की जानकारी को लेकर शासन के साथ धोखाधड़ी किया गया है।

– स्वप्निल पुरी ने स्वयं की भवन को खुद को दिया पट्टे पर…?

निजी स्कूल संचालक श्रीमती स्वप्निल पुरी द्वारा गजब कारनामा किया गया है, उन्होंने स्कूल संचालन के लिए स्वयं के भवन को खुद को किराए/पट्टे पर अनुबंधित कर 20 हजार रुपए मासिक किराया प्राप्त कर रही हैं। दिनांक 03/02/25 को निष्पादित किराएनामा पट्टे पर उल्लेख है कि पक्षकार क्रमांक 1.श्रीमती स्वप्निल पुरी पति श्री दीपक गुप्ता जाति गोस्वामी, आयु 37 वर्ष, निवासी ग्राम समनापुर पोस्ट ऑफिस समनापुर,तहसील व जिला डिंडौरी, मकान मालिक पक्ष क्रमांक 2. राइट डायरेक्शन एजुकेशनल सोसायटी समिति समनापुर द्वारा अध्यक्ष श्रीमती स्वप्निल पुरी पति श्री दीपक गुप्ता जाति गोस्वामी आयु 37 को किराए पर दिया गया है। समनापुर -बिछिया राजकीय मार्ग में स्थिति भवन को स्कूल संचालन हेतु पट्टा निष्पादित किया गया है। इस तरह से स्कूल संचालक और निजी विद्यालयों को मान्यता, एवं निगरानी करने वाले अधिकारी मौन साधे हुए हैं।

 

एडीटर

Chetram Rajpoot

चेतराम राजपूत ‘मध्यभूमि के बोल’ के संपादक हैं और दो दशक से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। स्थानीय मुद्दों, भ्रष्टाचार के खुलासे और जमीनी खोजी पत्रकारिता के लिए उनकी पहचान है।...

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