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सरपंच, सचिव और रोजगार सहायकों ने उठाई समस्याओं के निराकरण की मांग, कलेक्टर को सौंपा 8 सूत्रीय ज्ञापन

एडीटर: Chetram Rajpoot September 9, 2026

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– जांच-वसूली की कार्रवाई पर रोक, मानदेय बढ़ाने और सीएम हेल्पलाइन की शिकायतों की निष्पक्ष जांच सहित 8 मांगें

डिंडौरी न्यूज। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अंतर्गत कार्यरत सरपंचों, पंचायत सचिवों और ग्राम रोजगार सहायकों से जुड़ी विभिन्न समस्याओं के निराकरण की मांग को लेकर सरपंच, पंचायत सचिव एवं ग्राम रोजगार सहायक संगठनों ने बुधवार को कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में पंचायत स्तर पर कार्यों के क्रियान्वयन के दौरान आने वाली समस्याओं का उल्लेख करते हुए प्रशासन से शीघ्र निराकरण की मांग की गई है।

ज्ञापन में कहा गया है कि पंचायतों में निर्माण एवं विकास कार्यों के संचालन के दौरान विभिन्न स्तरों पर जांच, वसूली तथा कार्रवाई की प्रक्रिया से सरपंच, सचिव एवं रोजगार सहायकों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। संगठनों ने इन समस्याओं के समाधान के लिए आठ प्रमुख मांगें प्रशासन के समक्ष रखी हैं।

– निर्माण कार्यों की जांच और वसूली की कार्रवाई पर सवाल

ज्ञापन में कहा गया है कि ग्राम पंचायतों द्वारा कराए जा रहे निर्माण कार्यों पर आए दिन जांच एवं वसूली की कार्रवाई की जाती है, जिससे पंचायत स्तर पर कार्य करने में परेशानी उत्पन्न होती है। संगठन ने मांग की है कि इस व्यवस्था की समीक्षा कर अनावश्यक कार्रवाई पर रोक लगाई जाए तथा जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया स्पष्ट की जाए।

संगठन ने यह भी आरोप लगाया कि निर्माण कार्यों की तकनीकी एवं प्रशासनिक स्वीकृति के बाद मूल्यांकन के आधार पर भुगतान किया जाता है, लेकिन यदि बाद में निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठते हैं तो सचिव, सरपंच अथवा ग्राम रोजगार सहायक को जिम्मेदार ठहराते हुए कार्रवाई की जाती है। ज्ञापन में ऐसी कार्रवाई को लेकर भी उचित व्यवस्था बनाए जाने की मांग की गई है।

– मीडिया रिपोर्ट और जांच को लेकर भी आपत्ति

ज्ञापन के तीसरे बिंदु में कुछ मीडिया रिपोर्टों के आधार पर तत्काल जांच टीम गठित किए जाने का उल्लेख करते हुए इस प्रक्रिया की समीक्षा की मांग की गई है। संगठन का कहना है कि किसी भी शिकायत या समाचार के आधार पर कार्रवाई से पहले तथ्यों की निष्पक्ष जांच की जानी चाहिए।

– निर्माण कार्यों के लिए राशि उपलब्ध कराने की मांग

ज्ञापन में निर्माण कार्य शुरू होने के बाद सामग्री खरीद सहित अन्य आवश्यक कार्यों के लिए राशि की व्यवस्था का मुद्दा भी उठाया गया है। संगठन ने कहा कि पंचायतों को समय पर आवश्यक राशि उपलब्ध होने से निर्माण कार्य निर्धारित समय में पूरे किए जा सकेंगे। साथ ही बाद में मूल्यांकन अथवा वसूली से संबंधित कार्रवाई को लेकर भी स्पष्ट एवं न्यायसंगत व्यवस्था बनाने की मांग की गई है।

– पीएम आवास की प्रगति को लेकर सचिवों पर कार्रवाई का विरोध

संगठन ने प्रधानमंत्री आवास एवं जनमन आवास की प्रगति कम होने की स्थिति में पंचायत सचिव और ग्राम रोजगार सहायकों को निलंबन तथा राशि वसूली की कार्रवाई की धमकी दिए जाने का मुद्दा भी उठाया है। ज्ञापन में कहा गया है कि हितग्राहियों के खातों में राशि सीधे जमा होती है, ऐसे में केवल सचिव अथवा रोजगार सहायक को दोषी मानकर कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए। आवास निर्माण में देरी के वास्तविक कारणों की जांच कर जिम्मेदारी तय करने की मांग की गई है।

– सीएम हेल्पलाइन शिकायतों की निष्पक्ष जांच की मांग

ज्ञापन में सीएम हेल्पलाइन से संबंधित शिकायतों का भी उल्लेख किया गया है। संगठन का आरोप है कि कई बार शिकायतों के आधार पर सरपंच, सचिव और रोजगार सहायकों पर दबाव बनाया जाता है तथा शिकायतों को बंद कराने के लिए अधिकारियों की ओर से दबाव की स्थिति बनती है। संगठन ने मांग की है कि प्रत्येक शिकायत की निष्पक्ष जांच कर तथ्य सामने आने के बाद ही कार्रवाई की जाए तथा रिपोर्ट के आधार पर कर्मचारियों का वेतन अथवा मानदेय नहीं रोका जाए।

– 18 हजार रुपये मानदेय को अपर्याप्त बताते हुए बढ़ाने की मांग

ग्राम रोजगार सहायकों के मानदेय का मुद्दा भी ज्ञापन में प्रमुखता से उठाया गया। संगठन ने कहा कि वर्तमान समय में 18 हजार रुपये का मानदेय महंगाई के अनुरूप काफी कम है। रोजगार सहायकों की जिम्मेदारियों और कार्यभार को देखते हुए मानदेय में वृद्धि किए जाने की मांग की गई है।

– शासकीय कार्यक्रमों के खर्च की व्यवस्था की मांग

ज्ञापन में ग्राम पंचायतों में आयोजित होने वाली शासकीय एवं विकास यात्राओं, सम्मेलनों और अन्य कार्यक्रमों का भी उल्लेख किया गया है। संगठन ने कहा कि कई कार्यक्रमों में टेंट, माइक, कुर्सी, मजदूरी और वाहन जैसी व्यवस्थाएं पंचायतों को करनी पड़ती हैं, जबकि इनके लिए अलग से बजट का प्रावधान नहीं होता। ऐसी स्थिति में कार्यक्रमों के लिए आवश्यक राशि का प्रावधान किए जाने तथा उच्च कार्यालय से भुगतान संबंधी स्पष्ट आदेश जारी करने की मांग की गई है।

– एक सप्ताह में निराकरण नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी

ज्ञापन के अंत में संगठन ने प्रशासन से बिंदु क्रमांक 1 से 8 तक रखी गई मांगों पर एक सप्ताह के भीतर विचार कर निराकरण करने का आग्रह किया है। संगठन ने चेतावनी दी है कि निर्धारित अवधि में समस्याओं का समाधान नहीं होने की स्थिति में आंदोलनात्मक कदम उठाए जा सकते हैं।

ज्ञापन में विभिन्न ग्राम पंचायतों के सरपंच, पंचायत सचिव एवं ग्राम रोजगार सहायकों के हस्ताक्षर एवं मुहरें संलग्न हैं। संगठनों ने प्रशासन से पंचायत स्तर पर कार्यरत प्रतिनिधियों एवं कर्मचारियों की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए व्यावहारिक एवं न्यायसंगत समाधान की अपेक्षा जताई है।

एडीटर

Chetram Rajpoot

चेतराम राजपूत ‘मध्यभूमि के बोल’ के संपादक हैं और दो दशक से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। स्थानीय मुद्दों, भ्रष्टाचार के खुलासे और जमीनी खोजी पत्रकारिता के लिए उनकी पहचान है।...

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