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43 साल पुरानी 11 केवी लाइन बनी काल, खेत में काम कर रहे आदिवासी मजदूर की करंट से मौत 

एडीटर: Chetram Rajpoot September 6, 2026

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– मेंटेनेन्स व रखरखाव पर गंभीर सवाल

द्वारिका यादव उमरिया । दो वक्त की रोटी के लिए खेत में पसीना बहा रहा आदिवासी मजदूर क्या जानता था कि सिर के ऊपर दौड़ रही 11 हजार केवी की तार ही उसकी मौत की वजह बन जायेगी। अचानक तार टूटी,करंट बरसा और गरीब की जिंदगी पलभर में खत्म हो गई।जिसने भी यह खौफनाक मंजर देखा,उसकी आंखें नम और दिल दहल उठा।

चंदिया थाना क्षेत्र के ग्राम रोझिन में हलफल नदी के बगल से रविवार सुबह करीब 11:30 बजे दर्दनाक हादसे में आदिवासी युवक की करंट की चपेट में आने से मौत हो गई।हादसे के बाद गांव में मातम है और परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है।ग्रामीणों के मुताबिक रोझिन गांव से गुजर रही 11 हजार केवी विद्युत लाइन वर्ष 1983 में स्थापित हुई थी,यानी करीब 43 वर्ष पुरानी है।ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों पुरानी इस लाइन में समय-समय पर मेंटेनेंस के दौरान तारों में जोड़ लगाए जाते रहे,जिसके चलते लाइन पर कई जगह जोड़ बन गए हैं।ग्रामीणों का दावा है कि घटना वाले दिन भी 11 हजार केवी लाइन का एक जोड़ टूट गया और उसी दौरान दुर्भाग्य से उसके नीचे कृषि कार्य कर रहा आदिवासी मजदूर चपेट में आ गया और दर्दनाक मौत हुई है।हादसे का वास्तविक कारण जांच के बाद ही स्पष्ट होगा,लेकिन ग्रामीणों द्वारा लाइन की जर्जर स्थिति और बार-बार और जगह जगह किए गए जोड़ को लेकर लगाए जा रहे आरोप विद्युत विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं,यदि जांच में यह सामने आता है कि लाइन की स्थिति पहले से खराब थी और सुरक्षा मानकों की अनदेखी हुई,तो यह केवल एक दुर्घटना नहीं बल्कि गंभीर विभागीय लापरवाही का मामला माना जाएगा।

घटना की सूचना मिलते ही चंदिया पुलिस मौके पर पहुंची और आवश्यक कार्रवाई करते हुए शव को कब्जे में ली है,और शव को पोस्टमार्टम के लिए चंदिया ले गई है।पीएम की कार्रवाई उपरांत शव परिजनों को सौंपा जाएगा।ग्रामीणों की मांग है कि हादसे की निष्पक्ष जांच हो और यह पता लगाया जाए कि आखिर ग्रामीणों के बारम्बार शिकायत के बाद भी 43 साल पुरानी विद्युत लाइन को सुरक्षित रखने पूरी तरह बदला क्यों नहीं गया?आपको बता दे हलफल नदी के ऊपर कई खेत ऐसे है,जो 11 हजार केवी के बिल्कुल नीचे है और यहाँ 11 हजार विद्युत लाइन बहुत नीचे से गुजरी है,जो अभी अभी जान माल के लिए खतरनाक साबित हो सकते है।

 

 

एडीटर

Chetram Rajpoot

चेतराम राजपूत ‘मध्यभूमि के बोल’ के संपादक हैं और दो दशक से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। स्थानीय मुद्दों, भ्रष्टाचार के खुलासे और जमीनी खोजी पत्रकारिता के लिए उनकी पहचान है।...

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