– महिला बाल विकास विभाग समनापुर की पर्यवेक्षक की भूमिका पर उठे सवाल, शिक्षक दिवस कार्यक्रम में निजी विद्यालय में नजर आने का मामला
संतोष सिंह चंदेल,डिंडौरी । महिला एवं बाल विकास विभाग, समनापुर में पदस्थ एक पर्यवेक्षक की कार्यप्रणाली इन दिनों सवालों के घेरे में है। आरोप है कि शासकीय दायित्वों का निर्वहन करने के बजाय पर्यवेक्षक निजी विद्यालय में आयोजित शिक्षक दिवस कार्यक्रम में शिक्षिका की भूमिका में नजर आईं। मामला सामने आने के बाद विभागीय जिम्मेदारियों और सरकारी कर्मचारी की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
बताया जा रहा है कि शिक्षक दिवस के अवसर पर निजी विद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में महिला बाल विकास विभाग की पर्यवेक्षक की मौजूदगी रही। कार्यक्रम में उनकी भूमिका को लेकर भी चर्चाएं हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या विभाग की ओर से उन्हें निजी विद्यालय के शिक्षक दिवस कार्यक्रम में शामिल होने की अनुमति अथवा विधिवत आदेश दिया गया था? यदि आदेश था तो उसका आधार क्या था और यदि आदेश नहीं था, तो शासकीय कार्य अवधि में निजी विद्यालय में उनकी मौजूदगी किस नियम के तहत रही?
– आंगनवाड़ी केंद्रों की निगरानी छोड़ निजी स्कूल में मौजूदगी क्यों?
महिला एवं बाल विकास विभाग की पर्यवेक्षक का दायित्व आंगनवाड़ी केंद्रों की निगरानी, विभागीय योजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा, कार्यकर्ताओं से समन्वय और शासन की योजनाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों तक पहुंचाने जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों से जुड़ा है। ऐसे में यदि शासकीय ड्यूटी के समय अधिकारी-कर्मचारी निजी संस्थान में मौजूद रहते हैं तो स्वाभाविक रूप से उनकी सरकारी जिम्मेदारियों को लेकर सवाल उठना लाजिमी है।
स्थानीय स्तर पर अब यह चर्चा भी तेज है कि जब सरकारी विभाग में जिम्मेदारियां तय हैं तो निजी विद्यालय के कार्यक्रम में सरकारी कर्मचारी की यह भूमिका किस हैसियत से रही?
– विभागीय अधिकारियों से जांच की मांग
मामले में विभागीय अधिकारियों से यह स्पष्ट किए जाने की मांग उठ रही है कि संबंधित पर्यवेक्षक को निजी विद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होने की अनुमति दी गई थी या नहीं। यदि अनुमति नहीं थी तो शासकीय कार्य समय में निजी विद्यालय में उनकी मौजूदगी की जांच कर जिम्मेदारी तय की जाए।
सरकारी कर्मचारी का पहला दायित्व शासकीय कार्य और जनता से जुड़ी जिम्मेदारियों का निर्वहन करना है। ऐसे में एक तरफ आंगनवाड़ी व्यवस्था की निगरानी की जिम्मेदारी और दूसरी तरफ निजी विद्यालय में शिक्षक की भूमिका—इन दोनों के बीच आखिर सरकारी ड्यूटी कहां रह गई? यह सवाल अब विभागीय अधिकारियों से जवाब मांग रहा है।
