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गोरखपुर में ‘इंस्टाग्राम’ का पागलपन:लाइक और कमेंट्स कम मिलने से डिप्रेशन में आ रहे स्टूडेंट्स

गोरखपुर में ‘इंस्टाग्राम’ का पागलपन:लाइक और कमेंट्स कम मिलने से डिप्रेशन में आ रहे स्टूडेंट्स, यंगस्टर्स हो रहे ‘साइकोपैथिक’; गोरखपुर यूनिवर्सिटी में हो रही काउंसलिंग

करीब दो दर्जन अजीबो-गरीब मामले बीते 6 महीने के दौरान स्वस्ति मनोविज्ञान परामर्श केंद्र में काउंसिलिंग के लिए आए हैं।

सोशल मीडिया प्लेटफार्म से लेकर उस पर मिलने वाले लाइक्स और कमेंट्स का यूथ्स पर भूत सवार है। मगर, जिन लोगों को लाइक्स और कमेंट्स कम मिलते हैं, वो मनोरोगी होते जा रहे हैं। जी हां, वर्चुअल दुनिया की चकाचौंध देख युवा रियल लाइफ से दूर होकर अवसाद में घिरते जा रहे हैं। उनके बदलते व्यवहार और चि​ड़चिड़ापन देख परिवार के लोग भी हैरान और परेशान हैं।

ऐसे एक- दो नहीं बल्कि करीब दो दर्जन अजीबो-गरीब मामले बीते 6 महीने के दौरान गोरखपुर यूनिवर्सिटी के साइकोलॉजी डिपार्टमेंट में स्थापित स्वस्ति मनोविज्ञान परामर्श केंद्र में काउंसिलिंग के लिए आए हैं। सबसे बड़ी बात इसमें ये देखने को मिल रही है कि इसे प्रॉब्लम मानकर उसका युवा उसका सॉल्यूशन तो चाह रहे हैं, पर वे चाहकर भी खुद को वर्चुअल दुनिया से वो बाहर निकल नहीं पा रहे।

DDU में 6 महीने पहले बना सेंटर

दरअसल, 6 महीने पहले गोरखपुर यूनिवर्सिटी के साइकोलॉजी डिपार्टमेंट में इंट्रेस्टेड स्टूडेंट्स की काउंसिलिंग के लिए इस सेंटर की स्थापना हुई। इसके बाद अब तक चार दर्जन से अधिक स्टूडेंट्स इस सेंटर पर अपनी प्रॉब्लम्स को लेकर आ चुके हैं। इनमें दो दर्जन से अधिक स्टूडेंट्स की प्रॉब्लम इंटरनेट मीडिया से जुड़ी हुई है। यह सारे स्टूडेंट्स अपनी एक दिन की दिनचर्या का आधा से अधिक समय फेसबुक, वाट्सएप या इंस्टाग्राम पर गुजारते हैं।

रील्स बनाने की लगी लत

कुछ को तो रील्स बनाने और यू-ट्यूबर बनने की लत लग चुकी है। वह कुछ बहुत च्यादा गलत नहीं कर रहे, इसके लिए वह यह बताने से नहीं चूक रहे कि कि उनके साथी भी इसे लेकर परेशान रहते हैं। लेकिन वह सेंटर तक इसलिए नहीं आते कि कहीं उन्हें कोई मनोरोगी न मानने लगे।

सोशल मीडिया से होने वाले रोग

स्नैपचैट डिस्मॉर्फिया सिंड्रोम, फ़बिंग, फेसबुक डिप्रेशन, स्नैपचैट डिस्मॉर्फिया सिंड्रोम, सोशल मीडिया एंग्जायटी डिसऑर्डर, फैंटम रिंगिंग सिंड्रोम, नोमोफोबिया, साइबरचोंड्रिया, गूगल इफेक्ट, फोमो।

केस- 1

बीए सेकेंड इयर में पढऩे वाली एक स्टूडेंट ने इंस्टाग्राम पर अपनी फोटो को एडिट कर डाल दिया। उस फोटो को उसने एडिट कर इतना संवार दिया था कि अब उसी तरह खुद को रियल लाइफ में दिखाना स्टूडेंट के लिए चुनौती बन गई है। अब उसे बाहर निकलने में भी डर लग रहा है। वो बार-बार यही सोच रही है कि वो लोगों के सामने अब असली चेहरा कैसे दिखाए।

केस- 2

बीकॉम की एक स्टूडेंट केवल इसलिए परेशान रहती है कि उसकी अच्छी से अच्छी पोस्ट पर अधिक लाइक नहीं मिलते हैं। पूरे दिन कभी-कभी रात में पूरा समय लाइक देखने के लिए मोबाइल झांकने में गुजर जाता। आखिर कैसी पोस्ट डालूं? मैडम मैंने शुरू में शौक से एक-दो रील्स बनाए। लोगों ने सराहा तो अब पूरा समय उसे बनाने के लिए आइडिया सोचने में लग जाता है। बीए थर्ड इयर की स्टूडेंट हूं, करियर प्रभावित हो रहा है, पर लत ऐसी पड़ी है कि छूटने का नाम नहीं ले रही।

ब्रेकअप और पारिवारिक समस्या के भी आ रहे मामले
सेंटर में लव ब्रेकअप के भी मामले आए हैं। इनमें सबसे अधिक स्टूडेंट्स हैं, जो ब्रेकअप से मिले अवसाद से उबरने का रास्ता तलाश रहे। इसके अलावा दो तीन मामले ऐसे भी आए हैं, जो पारिवारिक समस्याओं से प्रभावित होकर खुद को अवसाद में पा रहे हैं और इसका प्रभाव करियर पर न पडऩे देने की सलाह मांग रहे।

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