डिंडौरी न्यूज। समनापुर विकासखंड अंतर्गत शासकीय हाई स्कूल मझगांव में छात्र–छात्राओं से वसूले गए प्रवेश शुल्क की राशि में बड़े पैमाने पर हेराफेरी का मामला सामने आया है। आरोप है कि विद्यालय में पदस्थ रहे तत्कालीन प्राचार्य मोहन लाल जंघेला द्वारा वर्षों तक शुल्क पंजी का संधारण नहीं किया गया और प्राप्त राशि का दुरुपयोग किया गया।
सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI) के तहत प्राप्त जानकारी के अनुसार वर्ष 2020 से 2025 तक विद्यालय में प्रवेश शुल्क पंजी संधारित ही नहीं की गई, वहीं केशबुक में भी प्रवेश शुल्क की राशि दर्ज नहीं की गई। इससे यह आशंका गहराती है कि इस अवधि में छात्रों से वसूली गई राशि का नियमानुसार लेखा-जोखा नहीं रखा गया।
जानकारी के मुताबिक तत्कालीन प्राचार्य मोहन लाल जंघेला का 18 जून 2025 को स्थानांतरण शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय दानी टोला, भुआ-बिछिया, जिला मंडला किया गया था। स्थानांतरण के बाद उन्होंने 20 जून 2025 को प्राथमिक शिक्षक श्रीमती मधु मरावी को विद्यालय का समस्त प्रभार सौंपकर भारमुक्ति ली।

जब RTI के तहत प्रवेश शुल्क पंजी की छायाप्रति मांगी गई, तो वर्तमान प्राचार्य श्रीमती मधु मरावी ने 28 अगस्त 2025 को पत्र लिखकर सहायक आयुक्त जनजातीय कार्य विभाग, विकासखंड शिक्षा अधिकारी एवं जिला शिक्षा अधिकारी को सूचित किया कि तत्कालीन प्राचार्य के कार्यकाल की शुल्क पंजी उपलब्ध नहीं है। इस आधिकारिक पत्र के बाद भी अब तक कोई ठोस कार्रवाई न होना कई सवाल खड़े कर रहा है।
सूत्रों के अनुसार, विगत वर्षों में शाला प्रवेश शुल्क के तहत लाखों रुपये की राशि का बंदरबाट किया गया है। हैरानी की बात यह है कि वरिष्ठ अधिकारियों को समय रहते सूचना देने के बावजूद आज दिनांक तक न तो जांच बैठी और न ही जिम्मेदारों पर कार्रवाई हुई है। इससे विभागीय कार्यप्रणाली पर संदेह और गहरा गया है।
– भ्रष्टाचार पर सवाल
जनजातीय कार्य विभाग में इस तरह के मामले पहले भी सामने आते रहे हैं, लेकिन समुचित और समयबद्ध कार्रवाई के अभाव में भ्रष्टाचार पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। जानकारों का मानना है कि यदि इस प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारों पर कड़ी कार्रवाई नहीं की गई, तो यह लापरवाही भविष्य में ऐसे मामलों को और बढ़ावा देगी।







