– सीसी सड़क बनी धूल का ढेर, CM हेल्पलाइन में झूठा प्रतिवेदन, शिकायतें बिना जांच फोर्स क्लोज
डिंडौरी। लोक निर्माण विभाग द्वारा धनुवासागर मुख्य मार्ग से सीएम राइज स्कूल तक कराए गए सीसी सड़क निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जनपद पंचायत डिंडौरी क्षेत्र क्रमांक 17 के जनपद सदस्य संतोष सिंह चंदेल ने जनसुनवाई में कलेक्टर को लिखित शिकायत सौंपते हुए सड़क निर्माण में भारी अनियमितताओं, सीएम हेल्पलाइन में झूठा प्रतिवेदन देने तथा शिकायतों को बिना जांच बंद किए जाने के गंभीर आरोप लगाए हैं।

जनपद सदस्य ने बताया कि निर्माण के कुछ ही समय बाद सड़क की गिट्टी उखड़कर धूल में बदल रही है, सीसी सड़क के दोनों ओर मिट्टी-मुरूम का साइड सोल्डर कार्य नहीं किया गया, जो तकनीकी मानकों की खुली अवहेलना है। यह मार्ग स्कूल जाने वाले बच्चों और किसानों के लिए दैनिक आवागमन का प्रमुख रास्ता है, जिससे खराब सड़क के कारण छात्र छात्राओं को परेशानी हो रही है और दुर्घटना की आशंका बढ़ गई है।
– बिना स्थल निरीक्षण के शिकायत बंद करने का आरोप
घटिया निर्माण को लेकर जनपद सदस्य द्वारा सीएम हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज कराई गई थी, लेकिन आरोप है कि लोक निर्माण विभाग ने बिना स्थल निरीक्षण, बिना संपर्क और बिना वास्तविक जांच के शिकायत को फोर्स क्लोज कर दिया। जनपद सदस्य ने इसे मुख्यमंत्री की जनहितकारी योजना को बदनाम करने वाला कृत्य बताया। एसडीओ पर फोन काटने व दुर्व्यवहार के आरोप लगाए हैं।
शिकायत बंद होने के बाद जब जनपद सदस्य ने संबंधित एसडीओ से संपर्क किया, तो उन्होंने बात सुने बिना फोन काट दिया और इसके बाद किसी भी प्रकार का संवाद नहीं किया। जनपद सदस्य का कहना है कि यह रवैया एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि एवं क्षेत्र की जनता के प्रति अत्यंत अपमानजनक है।

अधिकारी ठेकेदार के पक्ष में खड़े?
इस मामले में कार्यपालन यंत्री एम.एस. धुर्वे ने सड़क की गुणवत्ता को सही बताते हुए कहा कि सड़क परफॉर्मेंस गारंटी में है और खराब होने पर मरम्मत कराई जाएगी। जनपद सदस्य ने इसे ठेकेदार के पक्ष में लिया गया बयान बताते हुए कहा कि अधिकारी शासन की मंशा के विपरीत कार्य कर रहे हैं।
कलेक्टर से की स्वतंत्र जांच व कार्रवाई की मांग
जनपद सदस्य संतोष सिंह चंदेल ने कलेक्टर महोदया से मांग की है कि सड़क निर्माण की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष तकनीकी जांच कराई जाए, सीएम हेल्पलाइन में झूठा प्रतिवेदन देने वाले अधिकारियों पर कठोर विभागीय कार्रवाई हो, संबंधित एसडीओ के दुर्व्यवहार की जांच कर दंडात्मक कार्रवाई की जाए तथा सड़क को मानक अनुसार सुधार या पुनर्निर्माण कराया जाए। यह मामला अब केवल सड़क निर्माण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि शासन की योजनाओं की विश्वसनीयता और प्रशासनिक जवाबदेही से भी जुड़ गया है।









