डिंडौरी न्यूज | पुलिस द्वारा सामुदायिक पुलिसिंग के अंतर्गत संचालित “सृजन कार्यक्रम” का समापन समारोह सोमवार को पुलिस कंट्रोल रूम में गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। यह कार्यक्रम पुलिस अधीक्षक वाहनी सिंह के कुशल मार्गदर्शन में आयोजित किया गया, जिसमें अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक डॉ. अमित वर्मा की विशेष उपस्थिति रही।
कार्यक्रम का उद्देश्य समाज के कमजोर एवं वंचित वर्ग के बच्चों को सकारात्मक दिशा प्रदान करना तथा पुलिस और आमजन के बीच विश्वास एवं सहभागिता को सुदृढ़ करना रहा। सृजन कार्यक्रम के अंतर्गत नगर एवं ग्रामीण क्षेत्रों में झोपड़ियों एवं आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों में निवास करने वाले बच्चों को दिनांक 16 दिसंबर 2025 से 06 जनवरी 2026 तक विशेष अभियान के माध्यम से पुलिसिंग प्रणाली से परिचित कराया गया।
इस दौरान बच्चों को पुलिस की कार्यप्रणाली, कर्तव्यों एवं समाज में पुलिस की भूमिका की जानकारी दी गई। साथ ही उन्हें पुलिस विभाग की विभिन्न शाखाओं का शैक्षणिक भ्रमण कराया गया, जहाँ प्रत्येक शाखा की कार्यप्रणाली को सरल एवं रोचक तरीके से समझाया गया, जिससे बच्चों में पुलिस के प्रति सकारात्मक सोच विकसित हो सके।
डिंडौरी पुलिस द्वारा बच्चों के सर्वांगीण विकास को ध्यान में रखते हुए आत्मरक्षा प्रशिक्षण, यूएसी, पीटी, परेड, खेलकूद एवं अन्य शारीरिक गतिविधियों का आयोजन किया गया। इन गतिविधियों के माध्यम से बच्चों में आत्मविश्वास, अनुशासन, टीम भावना एवं सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने का प्रयास किया गया। इसके अतिरिक्त बच्चों को महिला संबंधी अपराधों, बाल सुरक्षा एवं साइबर अपराधों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियाँ देकर उन्हें जागरूक भी किया गया।

समापन समारोह के अवसर पर कार्यक्रम में सहभागिता करने वाले सभी बच्चों को प्रमाण पत्र प्रदान कर सम्मानित एवं प्रोत्साहित किया गया। इससे बच्चों के चेहरे पर उत्साह एवं आगे बढ़ने की नई ऊर्जा देखने को मिली।
इस सराहनीय अभियान में प्रदीपन संस्था एवं जन साहस (NGO) द्वारा महत्वपूर्ण एवं अनुकरणीय सहयोग प्रदान किया गया। कार्यक्रम में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक डॉ. अमित वर्मा, सूबेदार श्री अभिनव राय (प्रभारी रक्षित केंद्र), महिला आरक्षक भगवती रावत, आरक्षक पिंटू कुशवाह, प्रदीपन संस्था एवं जन साहस (NGO) के कर्मचारीगण सहित लगभग 50 बच्चे उपस्थित रहे।
डिंडौरी पुलिस द्वारा संचालित सृजन कार्यक्रम न केवल बच्चों को सकारात्मक एवं सुरक्षित भविष्य की ओर प्रेरित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, बल्कि यह पुलिस-जन सहभागिता को मजबूत करने एवं समाज के कमजोर वर्ग के बच्चों को मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में एक अनुकरणीय प्रयास भी है।








