डिंडौरी। जनपद पंचायत डिंडौरी में प्रशासनिक अनुशासन को लेकर जनपद सीईओ प्रमोद ओझा के द्वारा बड़ी कार्रवाई की गई है। योजनाओं की समीक्षा बैठक में बिना सूचना अनुपस्थित रहने वाले ग्राम पंचायत सचिवों पर मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत डिंडौरी ने सख्त रुख अपनाते हुए एक दिन के वेतन की कटौती के आदेश जारी किए हैं। यह आदेश “कार्य नहीं तो वेतन नहीं” के सिद्धांत के तहत तत्काल प्रभाव से लागू किया गया है।
कार्यालय जनपद पंचायत डिंडौरी से जारी आदेश के अनुसार, 06 जनवरी 2026 को मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत डिंडौरी की अध्यक्षता में जनपद पंचायत कार्यालय में विभिन्न शासकीय योजनाओं की समीक्षा बैठक आयोजित की गई थी। बैठक का उद्देश्य ग्राम पंचायत स्तर पर संचालित विकास कार्यों, योजनाओं की प्रगति, वित्तीय स्थिति एवं क्रियान्वयन की समीक्षा करना था।
हालांकि बैठक के दौरान यह पाया गया कि ग्राम पंचायत जमगांव, बटौधा, दुहनिया, सारंगपुर पड़रिया, खम्हरियामाल, कुईमाल, सारसताल, विक्रमपुर, नारायणडीह रै, नरिया, नेवसा, बिजौरा, शाहपुर, जुनवानी, केवलारी, धुर्रा, डांडविदयपुर, औरई, सुबखार, रयुपरा, उदरीमाल एवं धनुवासागर के सचिव बैठक में उपस्थित नहीं रहे। सचिवों की अनुपस्थिति के कारण संबंधित ग्राम पंचायतों की किसी भी योजना की समीक्षा नहीं हो सकी, जिससे प्रशासनिक कार्य प्रभावित हुआ।
आदेश में स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि सचिवों का यह कृत्य पंचायत सेवा नियम 2011 का उल्लंघन है और इसे गंभीर लापरवाही व अनुशासनहीनता की श्रेणी में माना गया है। इसके चलते अनुपस्थित सभी सचिवों के 06 जनवरी 2026 (एक दिवस) के वेतन में कटौती करने का निर्णय लिया गया है।
मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत डिंडौरी ने आदेश में यह भी स्पष्ट किया है कि प्रशासनिक बैठकों में उपस्थिति अनिवार्य है और शासन की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए अधिकारियों एवं कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय की गई है। और चेतावनी दी गई कि भविष्य में इस प्रकार की लापरवाही दोहराने पर और कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।
बता दें कि प्रशासन की इस कार्रवाई को जनपद स्तर पर अनुशासन स्थापित करने की दिशा में एक सख्त कदम माना जा रहा है, जिससे पंचायत स्तर पर कार्यों की समीक्षा एवं योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित हो सके।









