मध्य प्रदेश के इंदौर में सामने आए जल कांड का असर अब प्रशासनिक स्तर पर देवास तक पहुंच गया है। सरकारी आदेश की भाषा और उसमें की गई टिप्पणियों को लेकर उपजे विवाद के बाद देवास के एसडीएम आनंद मालवीय को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। यह कार्रवाई उस समय हुई जब उनका हस्ताक्षरित आदेश सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया।
— आदेश की भाषा बनी विवाद की वजह
दरअसल मामला 3 जनवरी का है, जब देवास एसडीएम कार्यालय से कांग्रेस के प्रस्तावित प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने को लेकर एक आदेश जारी किया गया था। आदेश पर एसडीएम आनंद मालवीय के हस्ताक्षर थे, लेकिन इसमें सामान्य प्रशासनिक निर्देशों के बजाय राजनीतिक संदर्भ और संवेदनशील टिप्पणियां शामिल थीं।
आदेश में इंदौर नगर निगम की जल आपूर्ति से कथित रूप से हुई मौतों और बीमारियों के आंकड़े दर्ज किए गए थे। साथ ही मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की कथित विवादित टिप्पणी और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के निर्देश पर प्रदर्शन किए जाने का उल्लेख भी किया गया था। जबकि आम तौर पर ऐसे आदेशों में केवल प्रदर्शन की सूचना और ड्यूटी व्यवस्था से जुड़ा विवरण ही शामिल होता है।
— वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचा मामला
जैसे ही आदेश की प्रतियां सोशल मीडिया पर वायरल हुईं, मामला उच्च स्तर तक पहुंच गया। देवास कलेक्टर ने 4 जनवरी को पूरे प्रकरण की रिपोर्ट संभाग आयुक्त को भेजी। रिपोर्ट के परीक्षण के बाद संभाग आयुक्त आशीष सिंह ने एसडीएम आनंद मालवीय को निलंबित करने का आदेश जारी किया।
निलंबन आदेश में स्पष्ट किया गया कि संवेदनशील विषयों पर बिना जांच अप्रमाणित आंकड़ों का उपयोग करना गंभीर लापरवाही है और यह आचरण नियमों का उल्लंघन है। निलंबन अवधि के दौरान आनंद मालवीय का मुख्यालय उज्जैन संभाग आयुक्त कार्यालय निर्धारित किया गया है।
— सहायक ग्रेड-3 भी निलंबित
इस पूरे प्रकरण में एसडीएम कार्यालय में पदस्थ सहायक ग्रेड-3 अमित चौहान को भी निलंबित किया गया है। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, आदेश के प्रारूप तैयार करने में उनकी भूमिका सामने आई थी।
प्रशासनिक करियर पर लगा दाग
निलंबित एसडीएम आनंद मालवीय मूलतः मध्य प्रदेश के निवासी हैं। उनका जन्म इंदौर में हुआ और वहीं से उन्होंने स्कूली व कॉलेज शिक्षा प्राप्त की। निजी क्षेत्र में कार्यरत पिता के बावजूद उन्होंने प्रशासनिक सेवा को चुना। वर्ष 2007 में नायब तहसीलदार के रूप में खरगोन से सेवा की शुरुआत हुई। 2014 में वे तहसीलदार बने और वर्ष 2023 में देवास में एसडीएम के रूप में पदस्थ हुए। सरकारी आदेश की भाषा में की गई चूक अब उनके करियर की सबसे बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई का कारण बन गई है।









