– जबलपुर-अमरकंटक नेशनल हाइवे 45 E जाम करने की दी चेतावनी
– अब नहीं सहेंगे, अपना अधिकार लेकर रहेंगे – जिलाध्यक्ष बिहारी लाल साहू
डिंडौरी न्यूज । जिले के शहपुरा में भारतीय किसान संघ के बैनर तले किसानों की अनिश्चितकालीन हड़ताल तीसरे दिन भी लगातार जारी रही। अपनी 29 सूत्रीय मांगों को लेकर किसान दिन-रात धरने पर बैठे हुए हैं, लेकिन तीसरे दिन भी उनकी मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। किसानों का कहना है कि अब तक शासन-प्रशासन की ओर से केवल आश्वासन मिले हैं, जबकि जमीनी स्तर पर कोई ठोस पहल या लिखित आदेश सामने नहीं आया है।
किसानों के अनुसार सड़क, बिजली, पेयजल, सिंचाई व्यवस्था, नहरों में हुए भ्रष्टाचार की जांच, दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई और रेलवे लाइन निर्माण जैसी बुनियादी मांगें लंबे समय से लंबित हैं। इन्हीं मांगों को लेकर किसान मजबूरी में अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठे हैं, लेकिन तीन दिन बीत जाने के बावजूद शासन-प्रशासन ने गंभीरता नहीं दिखाई।
हड़ताल स्थल पर लगातार किसानों की संख्या बढ़ रही है। आसपास के गांवों से किसान, युवा और सामाजिक संगठन आंदोलन स्थल पर पहुंचकर समर्थन जता रहे हैं। किसानों का कहना है कि पहले भी कई बार ज्ञापन सौंपे गए, अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से मुलाकात की गई, लेकिन हर बार उनकी समस्याओं को नजरअंदाज किया गया। इसी कारण अब वे केवल लिखित आश्वासन और ठोस कार्यवाही से कम पर आंदोलन खत्म करने को तैयार नहीं हैं।
भारतीय किसान संघ के पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यदि शीघ्र ही शासन-प्रशासन द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। जरूरत पड़ी तो जिले के अन्य क्षेत्रों में भी आंदोलन फैलाया जाएगा।
किसानों ने दो टूक कहा है कि यह लड़ाई सिर्फ किसानों की नहीं, बल्कि पूरे डिंडौरी जिले के विकास और आदिवासी समाज के भविष्य से जुड़ी है। जब तक उनकी सभी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक यह अनिश्चितकालीन हड़ताल जारी रहेगी। तीसरे दिन भी प्रशासनिक उदासीनता के चलते आंदोलन और तेज होने की आशंका जताई जा रही है।
डिंडौरी में बृहद सिंचाई योजनाओं की पोल खुली, करोड़ों खर्च के बावजूद खेतों तक नहीं पहुंचा पानी
– किसान संघ ने भ्रष्टाचार व लापरवाही के आरोप लगाते हुए जांच की मांग की
जिले में किसानों के खेतों तक सिंचाई सुविधा पहुंचाने के उद्देश्य से संचालित बृहददेशीय सिंचाई योजनाएं जमीनी स्तर पर दम तोड़ती नजर आ रही हैं। डिंडौरी जिले में निर्मित 97 बांधों के माध्यम से 291 गांवों तक पानी पहुंचाने का दावा किया गया था, जिस पर सरकार द्वारा सैकड़ों करोड़ रुपये खर्च किए जाने की बात कही जाती है। लेकिन हकीकत यह है कि इन बांधों से लगभग 50 गांवों तक भी नियमित रूप से पानी नहीं पहुंच पा रहा है।
पानी की कमी के कारण किसान फसल उत्पादन में असफल हो रहे हैं, वहीं कई स्थानों पर रिसाव और अव्यवस्थित जल प्रबंधन के चलते खेतों में पानी भरने से फसल सड़कर खराब हो रही है। इससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान के साथ-साथ मानसिक तनाव का सामना करना पड़ रहा है।
– योजनाएं कागजों तक सीमित
बिलगांव जलाशय मध्य परियोजना से 43 गांवों को सिंचाई का लाभ मिलना था, लेकिन वर्तमान में मात्र 15 गांवों तक ही पानी पहुंच पा रहा है। जलाशय क्षेत्र में रिसाव की समस्या के चलते फसलें नष्ट हो रही हैं। इसी तरह चौरा जलाशय से 8 गांव लालपुर, कछारी जलाशय से 2 गांव, सारसडोली से 7 गांव, कुडदर जलाशय से 3 गांव तथा अन्य जलाशय से 10 गांवों को लाभ मिलना था, लेकिन अधिकांश गांव आज भी पानी से वंचित हैं।
विकासखंड अमरपुर के खुड़िया डायवर्सन से 4 गांवों तथा बंजर टोला जलाशय से 9 गांवों तक पानी पहुंचाने की योजना भी विफल साबित हुई है। समनापुर विकासखंड अंतर्गत स्कीम के तहत सुंदरपुर, केवलारी और खाम्ही गांवों में आज तक जल आपूर्ति नहीं हो सकी है। वहीं मेंहदवानी विकासखंड के दनदना बांध में जल भराव के बजाय अतिक्रमण कर कृषि कार्य कराया जा रहा है।
– आदिवासी क्षेत्रों में सबसे ज्यादा असर
ये सभी योजनाएं आदिवासी बहुल क्षेत्रों के लिए बनाई गई थीं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही और कथित भ्रष्टाचार के कारण किसान अपनी ही जमीन पर सिंचाई के लिए पानी को तरस रहे हैं। किसानों का आरोप है कि विकास कार्यों के लिए जारी भारी-भरकम बजट का दुरुपयोग किया गया है और योजनाएं कागजों में ही पूरी दिखा दी गईं।
– मनरेगा व समर्थन मूल्य पर भी सवाल
किसान संघ ने जल संसाधन विभाग पर मनरेगा के अंतर्गत वर्ष 2021 में किए गए साफ-सफाई कार्यों में भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। वहीं चुनावी घोषणा पत्र में किए गए वादों के बावजूद धान का समर्थन मूल्य 3100 रुपये और गेहूं का 2700 रुपये प्रति क्विंटल किसानों को नहीं मिल पाने पर भी नाराजगी जताई गई है।
– किसान सम्मान निधि में गड़बड़ी
किसान सम्मान निधि योजना में भी अधिकारियों की लापरवाही सामने आई है, जहां पूर्व में पति-पत्नी दोनों को लाभ दिया गया और अब नए आदेश के तहत दोनों को अपात्र घोषित किया जा रहा है। इससे भोले-भाले किसान परेशान हो रहे हैं।
– जांच व कार्रवाई की मांग
किसान संघ ने मांग की है कि सभी बांधों और सिंचाई योजनाओं से वास्तविक रूप से पानी खेतों तक पहुंचाया जाए, योजनाओं में हुए भ्रष्टाचार की निष्पक्ष जांच हो और दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।









