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Dindori Court News: महिला एवं बाल विकास विभाग के परियोजना अधिकारियों की अग्रिम जमानत याचिका खारिज

एडीटर: Chetram Rajpoot December 22, 2025

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– गर्भवती बैगा महिलाओं के स्वास्थ्य परीक्षण एवं पोषण आहार घोटाला मामला 

– न्यायालय -द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश डिंडौरी ने खारिज की अग्रिम जमानत याचिका 

डिंडौरी न्यूज। गर्भवती बैगा महिलाओं के स्वास्थ्य परीक्षण एवं पोषण आहार में गड़बड़ी और अनियमितताओं को लेकर परिवादी पत्रकार चेतराम राजपूत द्वारा महिला एवं बाल विकास विभाग के कार्यक्रम अधिकारी सहित 7 परियोजना अधिकारियों के विरुद्ध परिवाद दायर किया गया था। प्रकरण की सुनवाई करते हुए न्यायालय न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी डिंडौरी श्रीमती कमला उईके द्वारा दिनांक 27/10/2025 को धारा 420/35 के तहत पंजीबद्ध करते हुए अभियुक्त गण श्रीमती कल्पना तिवारी कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास विभाग, त्रिलोक सिंह भवेदी, मनमोहन कुशराम, श्रीमती उदयवती तेकाम, श्रीमती नीतू तिलगाम को निर्धारित दिनांक 29/12/2025 को पेश होने हेतु नोटिस जारी किया गया था।

अभियुक्तगण श्रीमती नीतू तिलगाम पति बीएस तिलगाम, तत्कालीन परियोजना अधिकारी करंजिया, एवं वर्तमान पदस्थापना परियोजना अधिकारी मोहखेड़, जिला छिंदवाड़ा एवं सेवानिवृत्त परियोजना अधिकारी श्रीमती उदयवती तेकाम पति एम.एल धुर्वे के द्वारा न्यायालय – द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश डिंडौरी, श्री शिवकुमार कौशल के समक्ष अग्रिम जमानत याचिका दायर की गई थी। जिसकी सुनवाई करते हुए माननीय न्यायालय द्वारा अभियुक्तों की जमानत याचिका दिनांक 28/11/2025 को खारिज कर दी गई है।

माननीय न्यायालय -द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश डिंडौरी द्वारा पारित आदेश में उल्लेखित है कि….प्रकरण का अवलोकन किया गया। अवलोकन से दर्शित है कि अभियुक्तगण पर धारा 420/34 भादं० सं० का गंभीर अभियोग है, जोकि अजमानती प्रकृति का है।

प्रकरण में ऐसे कोई आधार भी प्रकट नहीं होते हैं, जिनसे यह परिलक्षित होता हो कि आवेदक / अभियुक्तगण को असत्य रूप से प्रकरण में फंसाया जा रहा हो। अभियुक्तगण पर शासकीय योजनाओं का विधिवत् संचालन न कर हितग्राहियों के पक्ष में जारी शासकीय धनराशि का व्यक्तिगत उपयोग किये जाने का गंभीर अभियोग है।

 जोकि प्रथम दृष्टि में अनियमिता एवं शासकीय योजनाओं के संचालन में लापरवाही के परिधि में होकर कदाचरण की श्रेणी में आता है। माननीय न्यायदृष्टांत स्टेट ऑफ एम.पी. विरूद्ध प्रदीप शर्मा, (2014) 2 एस. सी.सी. 171 में अग्रिम जमानत के संबंध में यह अवधारित किया गया है कि, धारा-438 द.प्र.सं. (वर्तमान प्रवृत्त भा.ना.सु.सं. 2023 की धारा 482) की शक्तियां असाधारण हैं। जिनका उपयोग अपवाद स्वरूप उन प्रकरणों में किया जा सकता है जहां यह प्रतीत होता हो कि अभियुक्तगण को असत्य रूप से लिप्त किया गया है।

आवेदक/अभियुक्तगण एक लोक सेवक है, और किसी लोक सेवक के इस प्रकार के कृत्य से शासकीय कार्यप्रणाली पर विपरीत प्रभाव पड़ने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।

 अनावेदकगण का उक्त कृत्य शासकीय दायित्व के निर्वहन में प्रथम दृष्टि में विपरीत होकर लोककार्य के विरूद्ध भी दर्शित है। यद्यपि समस्त तथ्यों को अंतिम रूप से प्रमाणित करने के लिये साक्ष्य की आवश्यकता है।

प्रकरण के इस प्रकम पर अनावेदकगण को जमानत का लाभ दिया जाता है तो उनके द्वारा साक्ष्य को बिगाड़े जाने, फरार होने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता तथा अनावेकदगण के अधिवक्ता द्वारा तर्क के दौरान बताये गये तर्कों के तथ्यों पर अंतिम निष्कर्ष साक्ष्य उपरांत ही दिया जाना संभव है। उपरोक्त तथ्य परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए आवेदक / अभियुक्तगण को अग्रिम जमानत का लाभ दिया जाना उचित प्रतीत नहीं होता है।

परिणामस्वरूप उक्त तथ्यों एवं प्रकरण की परिस्थिति को दृष्टिगत रखते हुए आवेदक / अभियुक्तगण श्रीमती नीतू तिलगाम पत्नि बी एस तिलगाम, उम्र 45 वर्ष, श्रीमती उदयवती तेकाम पत्नि एम एल धुर्वे, उम्र 64 वर्ष की ओर से अधिवक्ता श्री जे०आर०बांधव द्वारा प्रस्तुत अग्रिम जमानत आवेदन पत्र अंतर्गत धारा 482 भा.ना.सु.सं. 2023, गुण-दोष पर अभिमत प्रकट किये बिना निरस्त किया जाता है।

एडीटर

Chetram Rajpoot

चेतराम राजपूत ‘मध्यभूमि के बोल’ के संपादक हैं और दो दशक से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। स्थानीय मुद्दों, भ्रष्टाचार के खुलासे और जमीनी खोजी पत्रकारिता के लिए उनकी पहचान है।...

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