– वायरल वीडियो के बाद पुलिस विभाग की कार्रवाई, 15 दिन में विस्तृत जांच रिपोर्ट पेश करने के निर्देश; एसटी-एससी एक्ट के तहत कार्रवाई की मांग
भोपाल न्यूज। राजधानी भोपाल में छात्र-छात्राओं की विभिन्न मांगों को लेकर आयोजित विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस के कथित अभद्र व्यवहार का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। गोंडवाना स्टूडेंट यूनियन के आंदोलन के दौरान मिसरोद थाना प्रभारी रतनलाल सिंह परिहार पर आंदोलनकारी छात्रों के साथ अभद्रता करने और गाली-गलौज करने के आरोप लगे हैं। आरोप है कि छात्रों द्वारा ‘जय जोहार’ का नारा लगाने पर थाना प्रभारी ने आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया। घटना का वीडियो सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म पर वायरल होने के बाद पुलिस विभाग ने मामले को गंभीरता से लिया है।
पुलिस उपायुक्त, जोन-2, नगरीय पुलिस भोपाल विकास कुमार शाहवाल द्वारा 14 अक्टूबर 2026 को जारी आदेश के अनुसार, थाना मिसरोद के निरीक्षक रतनलाल सिंह परिहार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय रक्षित केंद्र भोपाल निर्धारित किया गया है। आदेश में यह भी उल्लेख किया गया है कि निलंबन अवधि में उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा।
– वायरल वीडियो में आचरण पर उठे सवाल
पुलिस उपायुक्त कार्यालय से जारी आदेश में सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि वीडियो में थाना प्रभारी रतनलाल सिंह परिहार ड्यूटी के दौरान कथित तौर पर अभद्र टिप्पणी करते हुए नजर आ रहे हैं। आदेश के मुताबिक, वीडियो में प्रदर्शित आचरण प्रथम दृष्टया पुलिस विभाग की सेवा एवं आचरण संबंधी अपेक्षाओं के प्रतिकूल प्रतीत होता है। आदेश में घटना की गंभीरता और पुलिस विभाग की छवि पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव को ध्यान में रखते हुए मामले की विस्तृत जांच कराने की आवश्यकता बताई गई है। इसी आधार पर थाना प्रभारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने का निर्णय लिया गया।
– 15 दिन में जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश
जारी आदेश में सहायक पुलिस आयुक्त, एमपी नगर, भोपाल को वायरल वीडियो की पेनड्राइव संलग्न कर मामले की विस्तृत निष्पक्ष जांच करने और 15 दिनों के भीतर जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
इसके साथ ही संबंधित पक्षों को आदेश की प्रतियां तामील कराने और आवश्यक प्रशासनिक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश भी जारी किए गए हैं। फिलहाल निलंबन की कार्रवाई प्रारंभिक प्रशासनिक कदम है। मामले में आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर निर्धारित होगी।

– आदिवासी संगठनों और युवाओं में आक्रोश
घटना का वीडियो सामने आने के बाद आदिवासी संगठनों और प्रदेश के युवाओं के बीच नाराजगी देखी जा रही है। आंदोलनकारी छात्रों के साथ कथित अभद्रता को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। विरोध करने वालों का कहना है कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगें रखने वाले विद्यार्थियों के साथ सम्मानजनक व्यवहार किया जाना चाहिए।
मामले को लेकर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, कांग्रेस विधायक ओंकार सिंह मरकाम सहित अन्य लोगों द्वारा सोशल मीडिया पर वीडियो साझा कर सरकार और पुलिस व्यवस्था पर सवाल उठाए जाने की बात भी सामने आई है। संबंधित लोगों ने कथित अभद्रता के मामले में कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
– एससी-एसटी एक्ट के तहत कार्रवाई की मांग
मामले में थाना प्रभारी के विरुद्ध अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत कार्रवाई की मांग भी उठाई गई है। हालांकि, इस कानून के तहत कार्रवाई का आधार घटना के वास्तविक तथ्यों, कथित शब्दों, संबंधित व्यक्तियों की परिस्थितियों और कानून में निर्धारित आवश्यक शर्तों पर निर्भर करेगा। इस संबंध में सक्षम प्राधिकारी द्वारा जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
