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आरटीआई के तहत सूचना देने में कार्यपालन यंत्री का क्यों छूट रहा पसीना..?

डिंडौरी। सूचना का अधिकार अधिनियम का मूल उद्देश्य नागरिकों को सशक्त बनाने, सरकारी कार्यों में पारदर्शिता और उत्तरदायित्व को बढ़ावा देना ,  ...

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Chetram Rajpoot

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डिंडौरी। सूचना का अधिकार अधिनियम का मूल उद्देश्य नागरिकों को सशक्त बनाने, सरकारी कार्यों में पारदर्शिता और उत्तरदायित्व को बढ़ावा देना ,  भ्रष्टाचार को नियंत्रित कर वास्तविक अर्थों में लोकतांत्रिक व्यवस्था को लोगों के लिए सफल बनाना है।  यह कानून नागरिकों को सरकार की गतिविधियों के बारे में जानकारी देने के लिए बड़ा कदम  है।
डिंडौरी जिले के लोक निर्माण विभाग में सूचना का अधिकार अधिनियम की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं, आवेदकों से फोटो कॉपी के नाम पर राशि जमा कराने के बाद भी दस्तावेजो की छाया प्रति प्रदान नही की जा रही हैं।
आरटीआई कार्यकर्ता चेतराम राजपूत द्वारा दिनांक 10/01/2024 को विभाग में आवेदन प्रस्तुत कर दो बिंदुओं में जानकारी चाही गई थी, विभाग के द्वारा 36 पृष्ठों कि छायाप्रति हेतु दिनांक 29/02/2024 को जमा कराया गया, इसके बावजूद छः माह से अधिक समय गुजरने के बावजूद जानकारी नहीं दी जा रही हैं।
वही सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार कार्यपालन यंत्री संतोष ठाकुर के द्वारा चहेते ठेकेदारों से सांठगांठ कर लाखों रुपए का बंदरबांट किया गया है, पेंच रिपेयर और सड़क मरम्मत के नाम पर किये गए करोड़ो रूपये के फर्जीवाड़े  उजागर न हो जाये इस डर से जानकारी देने में कार्यपालन यंत्री संतोष ठाकुर का पसीना छूट रहा है,विभाग में दर्जनों की संख्या में आरटीआई के आवेदन धूल खा रहे हैं, आवेदकों को गुमराह किया जा रहा है, विभाग में पारदर्शिता के कमी के कारण करप्शन और बंदरबांट चरम पर है, जब भी दस्तावेज निकलेगें तो लूट की कहानी स्वयं बयां करेंगें..?
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