संतोष सिंह चंदेल, डिंडौरी। जनजातीय कार्य विभाग द्वारा जिले में शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से प्रशासनिक आधार पर बड़े पैमाने पर तबादला आदेश जारी किए गए हैं। विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार कुल 96 शिक्षकों एवं प्रभारियों का स्थानांतरण कर उन्हें नवीन पदस्थापन स्थल पर तत्काल प्रभाव से कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश दिए गए हैं। यह आदेश सामान्य प्रशासन विभाग की स्थानांतरण नीति के तहत जारी किया गया है।
जारी सूची में प्राथमिक शिक्षक, प्रभारी प्रधानाध्यापक एवं अन्य शैक्षणिक कर्मचारियों को एक विद्यालय से दूसरे विद्यालय में स्थानांतरित किया गया है। विभाग का मानना है कि इस फेरबदल से विद्यालयों में शिक्षकों की उपलब्धता संतुलित होगी तथा दूरस्थ और जनजातीय क्षेत्रों के विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिल सकेगा।
– प्रशासनिक कसौटी पर हुआ तबादला
आदेश में स्पष्ट किया गया है कि सभी स्थानांतरित कर्मचारियों को निर्धारित समय-सीमा के भीतर नवीन पदस्थापना स्थल पर कार्यभार ग्रहण करना होगा। साथ ही सेवा पुस्तिका, एचआरएमएस रिकॉर्ड एवं अन्य आवश्यक दस्तावेज अद्यतन करने के निर्देश भी दिए गए हैं। बिना अनुमति पदस्थापना स्थल छोड़ने या कार्यभार ग्रहण करने में अनावश्यक विलंब करने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।
– ग्रामीण स्कूलों पर रहेगा सबसे अधिक असर
स्थानांतरण सूची में जिले के कई ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रों के विद्यालय शामिल हैं। दर्रागांव, चरगांव, चांटी, कोहानी देवी, पिपरिया, समनापुर, बघर्रा, कूड़ा, मेढ़ियारास, बरखेड़ा, रहंगी, मेंहदवानी सहित अनेक स्कूलों में शिक्षकों की नई तैनाती की गई है। इससे उन विद्यालयों को राहत मिलने की उम्मीद है जहां लंबे समय से शिक्षकों की कमी या असंतुलित पदस्थापना की शिकायतें सामने आती रही हैं।
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– शिक्षा गुणवत्ता सुधारने की उम्मीद
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्थानांतरण के बाद शिक्षक नियमित रूप से विद्यालयों में उपस्थित रहते हैं और विभाग रिक्त पदों की पूर्ति भी समय पर करता है, तो इसका सकारात्मक असर विद्यार्थियों की पढ़ाई पर देखने को मिल सकता है। विशेषकर जनजातीय अंचलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में यह कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
– अब नजर परिणामों पर
जिले में लंबे समय बाद इतने बड़े स्तर पर हुए इस प्रशासनिक फेरबदल के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इससे विद्यालयों की शैक्षणिक गुणवत्ता में वास्तविक सुधार होगा? क्या दूरस्थ जनजातीय क्षेत्रों के विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षण सुविधा मिल पाएगी? इसका जवाब आने वाले शैक्षणिक सत्र में विद्यालयों के परिणाम और विद्यार्थियों की उपस्थिति से सामने आएगा।







