डिंडौरी मध्यप्रदेश राष्ट्रीय

युवा,महिला एवं बेरोजगारों ने आम बजट को बताया निराशाजनक

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– रोजगार और महंगाई को लेकर बजट में कुछ खास नही है
– ईंधन के दामो में वृद्धि होने से घरेलू सामग्री सहित अन्य वस्तुएं होंगे महंगे

डिंडौरी। केंद्र सरकार के द्वारा वित्तीय वर्ष 2022 के लिए कल संसद में बजट सत्र के पहले दिन वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट पेश करते हुए 25 वर्षो का रोडमैप सामने रखने दावा किया हैं। वही बजट को लेकर विपक्षी दलों के नेताओं ने बजट से आमजनता को कोई लाभ नही होने का दावा किया हैं । पिछले 2 वर्षों में वैश्विक महामारी कोविड संक्रमण के चलते पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था प्रभावित हुई है, देश में भी सरकार का राजकोषीय घाटा बढ़ा है। वित्तीय वर्ष 2022-23 के लिए विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के लिए केंद्र सरकार ने 3944909 करोड़ रुपये का खाखा पेश किया है। देश के आम बजट से आम लोगों को काफी उम्मीदें होती हैं, किन्तु सरकार ने निम्न एवं मध्यम वर्ग को कोई राहत नही दी गई है, इनकम टैक्स का स्लैब पूर्ववत ही रखा गया है जबकि कोविड काल के दौरान लोगों की आमदनी घटी है और खर्च व मंहगाई बढ़ी हैं, आम लोगों को टैक्स में राहत की काफी उम्मीदें थीं। किसानों का आय 2022 तक दोगुनी करने के लिए केंद्र सरकार के द्वारा दावा किया जाता रहा है किंतु किसानों की आय भी घटी है। मनरेगा योजना ग्रामीण इलाकों की रोजगार और अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानी जाती हैं किंतु गत वर्ष के मुकाबले लगभग 25 फीसदी बजट कटौती की गई हैं। 2021-22 में मनरेगा योजना के लिए 98 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था जबकि 2022-23 के लिए 73 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। युवाओं और बेरोजगारों के लिए बजट में कुछ खास होने का कोई रूपरेखा तय नही है न ही रोजगार सृजन के लिए कोई खाखा तैयार है, इस तरह से यह बजट युवाओं को निराश करने वाला है।
डिंडौरी के उम्मीदों पर फिरा पानी
डिंडौरी जिलेवासियों के मन में सदैव बजट पेश करने के दौरान जिले को रेल लाइन से जोड़ने की घोषणा की उम्मीदें रहती हैं,किन्तु 2022-23 के आम बजट में भी डिंडौरी जिले के वशिंदों के उम्मीदों पर पानी फिरा हैं।

इनका कहना है ,,,
केंद्र सरकार के गलत नीतियों के कारण बेरोजगारी,मंहगाई, चरम पर है, बजट में ईंधन ,गैस सिलेंडर,और घरेलू किराना सामग्री के दामों में वृद्धि की गई हैं जिससे महंगाई और बढ़ेगी,सरकार के द्वारा बजट में योजनाओं के नाम पर राशि का प्रावधान तो किया जाता हैं किंतु आवंटित नही किया जाता हैं,एमएसएमई में 15 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है,जो राशि योजनाओं के नाम पर निर्धारित किये गए हैं उन्हें ईमानदारी से आवंटित किया जाए,जिससे युवा,महिला और छोटे कारोबारियों को फायदा मिल सकें।


चेतराम राजपूत, वरिष्ठ पत्रकार, डिंडौरी

 

हाल ही में सरकार ने तीन कृषि क़ानून वापस लिया गया है, परंतु न तो किसानों ,युवाओं ,महिलाओं नोकरी पेशा वर्ग , मध्यम वर्ग किसी के लिए इस बजट में कुछ विशेष नहीं है। अत्यधिक महंगाई से जूझ रहे देश के निम्न और मध्यम वर्ग को इस बजट से काफी उम्मीदें थी कि उन्हें सरकार से कुछ मदद मिलेगी। आज संसद में पेश हुआ बजट 2022-23 पर पूरे देश की निगाहें टिकी हुई थी। केंद्र सरकार देश की आम जनता को इस महंगाई से थोड़ी राहत दे सकती थी, जिससे उनका जीवन आसानी से आगे बढ़ता रहे और उन्हें किसी तरह की विकट परिस्थितियों का सामना करना न पड़े । इस बजट में किसी भी वर्ग के लिए कुछ नहीं है। ना ही इनकम टैक्स स्लैब में छूट या राहत प्रदान की गई ।

सम्यक जैन ,युवा अधिवक्ता, डिंडौरी

मनरेगा की बजट कटौती से प्रतीत होता है कि बजट आम आदमी पर नही बडे पूंजीपतियों पर केंद्रित हैं महगाई के दौर में जंहा मनरेगा सहित सभी रोजगार मूलक योजनाओं पर बजट बढाना था ताकि आम आदमी की आय मे वृद्धि हो परंतु बजट मे ऐसा कुछ नही है। कोविड के दौर में मनरेगा आम आदमी की जीवन दायिनी योजना साबित हुई थी ,मनरेगा के बजट कटौती से ग्रामीण क्षेत्रों में विशेषकर आदिवासी क्षेत्रो मे पलायन बढेगा और शहरो के बडे-बडे पूंजीपतियों को सस्ते दाम मे मानव संसाधन मिल सकेगे और पूंजीपतियों का फायदा होगा।जिससे आर्थिक असमानता पैदा होगी।विद्यार्थियों,महिलाओं और किसानों,बेरोजगारो एवं कर्मचारियों के लिए कोई विशेष प्रावधान नही है ना ही महगाई कम करने का कोई ठोस प्रयास किया गया है,इंकमटैक्स स्लैब मे छूट या राहत नही है। हमारी मांग और कोशिश होनी चाहिए की पुरानी पेंशन फिर से लागू हो।

डॉ.दिग्विजय मरावी,जयस प्रदेश सचिव

आज पेश आम बजट में बेरोज़गारी पर कुछ नही, कृषि क्षेत्र पर कुछ नही, किसी को कोई राहत नही, आम आदमी को कोई राहत नही। सिर्फ़ बड़े उद्योगपतियों को लाभ पहुँचाने का काम बजट है। आज का बेरोज़गार युवा युवती जो भटक रहा है, उसके चेहरे पर इस बजट से निराशा है।

श्रीमती संतोषी रामजी साहू,जिलाध्यक्ष, महिला कांग्रेस

आम बजट पूरी तरह से निराशाजनक है,बेरोज़गारी,कृषि क्षेत्र पर कुछ नही,आम आदमी को कोई राहत नही। सिर्फ़ बड़े उद्योगपतियों को लाभ पहुँचाने का काम आम बजट में नजर आ रहा है, छोटे व्यापारियों के लिए कोई राहत नहीं।आज का बेरोज़गार युवा जो भटक रहा है,उसके चेहरे पर इस बजट से निराशा है। इस बजट में किसी भी वर्ग के लिए कुछ नहीं है। आमजन इनकम टैक्स स्लैब में छूट बढ़ाने की मांग बड़े लंबे समय से कर रहे थे। किसानों ,युवाओं ,महिलाओं ,नौकरीपेशा वर्ग , मध्यम वर्ग किसी के लिए इस बजट में कुछ नहीं है।यह बजट किसान विरोधी , युवा विरोधी , आमजन विरोधी है।

वीरेन्द्र बिहारी शुक्ला, अध्यक्ष जिला कांग्रेस कमेटी डिंडौरी

केंद्र सरकार घोर किसान विरोधी है। आज के बजट में एक बार फिर सरकार का किसान विरोधी चेहरा उजागर हो गया है। 2022 में किसानों की आय दोगुनी करने के वादे के खिलाफ किसानों की कमर तोड़ने वाला बजट है। सरकार को किसानों की फिक्र नहीं है, तभी MSP की लिखित गारंटी का जिक्र नहीं है। खाद की किल्लत से देश भर के किसान परेशान हैं, खाद की कमी के कारण उत्पादन कम हो रहा है। सरकार ने बजट में खाद सब्सिडी 1.40 लाख करोड़ रु से 35000 करोड़ कम करके 1.05 लाख करोड़ रु की। हर रोज बढ़ती महंगाई ने खेती की लागत बढ़ा दी, वहीं 7% महंगाई बढ़ने के बावजूद सरकार ने 2.7% खेती का बजट बढ़ाया। जो कि ऊंट के मुंह में जीरा भर है। यह बजट पूरी तरह से किसानों की कमर तोड़ने वाला और पूंजीपतियों को फायदा पहुंचाने वाला है। केंद्र सरकार का यह बजट वित्तीय संघीय ढांचे पर एक कड़ा प्रहार करने जैसा है। इसमें न किसी वर्ग की कोई चिंता की गई है, न कोई राहत प्रदान करने की बात की गई है।

सेजल जैन (छात्रा पत्रकारिता एवं जनसंचार)

 

 

 

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