ब्रेकिंग न्यूज़

शादी समारोह के बाद कोरोना विस्फोट,दुल्हन के पिता पर मुकदमा दर्ज

सबसे पहले शेयर करें

कोरोना का हुआ विस्फोट दुल्हन के पिता पर तहसीलदार ने कराया fir दर्ज:-

रिपोर्टर:- योगेंद्र मणि वर्मा
लोकेशन:- गौरेला

तहसीलदार पेंड्रारोड के द्वारा थाना गौरेला में लिखित आवेदन पर से रिपोर्ट दर्ज कराया गया कि दिनांक 30/4/2021 को रात्रि में ग्राम अंजनी में रोहिणी प्रसाद उपाध्याय पिता गणेश प्रसाद उपाध्याय के द्वारा 60-70 व्यक्ति को एकत्र कर अपनी पुत्री सुमन उपाध्याय का विवाह आयोजित किया गया था। उक्त विवाह कार्यक्रम में लगभग 25 व्यक्ति बिलासपुर से तथा 40 व्यक्ति बड़े अंजनी से शामिल हुए थे जिसके पश्चात दिनांक 4 मई से 8 मई तक स्वास्थ्य विभाग के द्वारा कोविड-19 का चेकअप ग्राम अंजनी में किया गया जिसमें 69 व्यक्ति कोविड-19 पाए गए जिससे बड़े अंजनी को कंटेनमेंट जोन घोषित करना पड़ा। रोहणी प्रसाद पांडेय के घर में भी पांच लोग कोरोना पॉजीटिव पाए गए। यदि उक्त विवाह में नियमों का पालन किया जाता तो व्यापक पैमाने पर संक्रमण नहीं फैलता जो रोहणी प्रसाद द्वारा उपेक्षा पूर्ण तरीके से विवाह कार्यक्रम करने के कारण क्षेत्र विशेष में कोरोनावायरस का संक्रमण फैला है। जिले में आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 की धारा 30,34 सहपठित एपिडेमिक एक्ट 1987 के प्रावधानों के अनुसार 14/4/21 के बाद से लगातार संपूर्ण जिला कंटेनमेंट जोन घोषित है। जिसमें सभी प्रकार के सामाजिक कार्यक्रम प्रतिबंधित हैं रोहिणी प्रसाद उपाध्याय निवासी अंजनी के द्वारा नियमों का उल्लंघन कर क्षेत्र में संक्रमण फैलाने में अपनी सहभागिता प्रदर्शित किया गया है। रिपोर्ट पर से थाना गौरेला में अपराध क्रमांक 162/2021 धारा 269, 270 भादवि रोहणी प्रसाद उपाध्याय के विरुद्ध कायम कर विवेचना जांच पर लिया गया है।

 

पुलिस अधीक्षक श्री सूरज सिंह परिहार ने जिलेवासियों से अपील की है कि ऐसे भीड़भाड़ वाले प्रत्येक कार्यक्रम से खुद जाने से बचें तथा परिवार के अन्य सदस्यों को भी न जाने दें । ऐसे भीड़भाड़ वाली जगहों में ही कोरोना संक्रमित होने के पूर्ण संभावनायें होते है। इसलिए घर में रहे सुरक्षित रहें।

क्या है आईपीसी की धारा 269 और 270?
धारा 269 का अर्थ है, किसी बीमारी को फैलाने के लिए किया गया लापरवाही भरा काम जिससे किसी अन्य व्यक्ति की जान को खतरा हो सकता है।
धारा 270 का अर्थ है, किसी बीमारी को फैलाने के लिए किया गया घातक या नुकसानदेह काम जिससे किसी अन्य व्यक्ति की जान को खतरा हो सकता है।

ये दोनों धाराएं भारतीय दंड सहिता के अध्याय 14 के तहत आते हैं, जिसमें जनता के स्वास्थ्य, सुरक्षा, सुख, शिष्टाचार और नैतिकता पर असर डालने वाले अपराध शामिल है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *